नेपाल सरकार के भारत से सामान खरीदने पर भंसार (कस्टम शुल्क) वसूली पर सख्ती कर दी है. नए आदेश ने सीमावर्ती इलाकों की मुश्किलें बढ़ाई हैं. भारत के सीमावर्ती इलाकों के कई बाजार नेपाली नागरिकों के भरोसे चलते हैं. भारत का रक्सौल बाजार नेपाल के बीरगंज और आसपास के इलाके के लोगों से ही गुलजार रहता था लेकिन अब यहां सन्नाटा है.
रक्सौल के व्यापारी बताते हैं कि उनके 90% ग्राहक नेपाल के ही थे, जो अब नहीं आ रहे. वे नेपाल में ही सामान खरीद रहे. हालांकि इस फैसले से नेपाल के बीरगंज के दुकानदारों को भी खास लाभ नहीं हो पा रहा है. उनकी दुकानों में भी ग्राहक नहीं हैं और वे भी खुद को घाटे में बता रहे हैं. उसकी वजह है नेपाल के बीरगंज में अतिक्रमण हटाने के कवायद में हजारों दुकानों पर चलाया गया बुलडोजर. इससे बीरगंज बाजार का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो गया है. दुकानदार निराश और आक्रोशित हैं.
बीरगंज के हजारों दुकानों पर चला बुलडोजर
बीते 19 अप्रैल से नेपाल के बीरगंज में बुलडोजर चल रहा है. नेपाली सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने सीमावर्ती क्षेत्र में भारत-नेपाल को जोड़ने वाली त्रिभुवन मार्ग को दोनों तरफ 25-25 मीटर चौड़ा करने के लिए दुकानों को हटाने का फैसला किया था. बीरगंज के मेयर राजेश मान सिंह ने दुकानदारों से अपील कर अतिक्रमण हटाने के लिए सहयोग मांगा था. हालांकि दुकानदारों का कहना है कि उन्हें अपने सामान हटाने और तैयारी के लिए बहुत कम समय दिया गया, इससे उन्हें काफी नुकसान हुआ.
स्थानीय दुकानदार इस बात पर आक्रोशित हैं कि उन्हें 18 अप्रैल की शाम साढ़े 3-4 बजे के आसपास लाउडस्पीकर से सूचना दी गई और 19 अप्रैल की सुबह सवा 4 बजे बुलडोजर दुकान के पास लगा दिया गया. जिससे वे अपना सामान नहीं बचा पाए.
करोड़ो के नुकसान का दावा कर रहे स्थानीय दुकानदार.
बीरगंज के इस इलाके में बड़ा बाजार है. यहां होलसेल से लेकर रिटेल बिक्री करने वाले दुकानदार हैं. स्थानीय दुकानदार राजेश साह, विकास साह, डब्लू अग्रवाल, ओम अग्रवाल, नरेश ने हमसे बात की. इनमें ज्यादातर कपड़ों का व्यापार करते हैं. उनका दावा है कि पूरे बाजार में जिस जल्दबाजी से दुकानों पर बुलडोजर चला है, उससे करोड़ों का नुकसान हुआ है.
स्थानीय युवा शरण गुप्ता कहते हैं, "विकास के नाम किसी शहर की पहचान खत्म करना सही नहीं है. यहां बिना किसी ठोस योजना और पुनर्वास के बुलडोजर चलाया जा रहा है. यह हजारों लोगों की रोजी रोटी का सवाल है, जिस पर अब संकट आ गया है. जिस प्लानिंग के साथ यहां दुकानें तोड़ी गई हैं, उसका असर रक्सौल पर भी हो सकता है."
इस पूरे बाजार में दूर-दूर तक टूटे हुए मकान और दुकान दिखाई देते हैं. कुछ दुकानें अब टूटे मकानों में ही चलाई जा रही हैं लेकिन ज्यादातर दुकानें बंद हो गई हैं.
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