मध्य प्रदेश के आगर मालवा में चर्चित NDPS कार्रवाई अब खुद पुलिस के लिए ही मुश्किल बन गई है. राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए दो थाना प्रभारी समेत करीब 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के सख्त आदेश दिए हैं. आरोप है कि ड्रग्स बरामदगी की पूरी कार्रवाई फर्जी और प्रक्रिया के खिलाफ थी. न्यायालय के इस फैसले के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच के तरीके पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
NDPS कार्रवाई पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
दरअसल, जनवरी 2026 में आगर मालवा कोतवाली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई का दावा किया था, जिसमें करोड़ों रुपये की एमडी ड्रग, केमिकल और मशीनरी जब्त करने की बात कही गई थी. लेकिन अब उसी कार्रवाई को लेकर अदालत ने गंभीर टिप्पणी करते हुए थाना प्रभारी शशि उपाध्याय सहित कई पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं.
डग थाना में दर्ज हुआ मामला
कोर्ट के आदेश के बाद राजस्थान के डग थाने में 6 नामजद और करीब 90 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया है. बताया जा रहा है कि इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला कायम किया गया है. मामले की जांच अब आगे बढ़ाई जाएगी.
आसानी से समझते हैं पूरा मामला
यह पूरा मामला 28 जनवरी 2026 का है, जब पुलिस ने झालावाड़ जिले के घाटाखेड़ी गांव में छापा मारकर भारी मात्रा में ड्रग्स जब्त करने का दावा किया था. इस कार्रवाई में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था. उस समय इसे बड़ी सफलता बताया गया था, लेकिन अब उसी पर सवाल उठ रहे हैं.
गिरफ्तार आरोपियों के परिजनों ने इस कार्रवाई को फर्जी बताते हुए अदालत का रुख किया. शिकायत में कहा गया कि पुलिस ने बिना सही प्रक्रिया के कार्रवाई की और पूरे मामले को मनगढ़ंत तरीके से पेश किया. अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए थे.
जांच में सामने आईं कई खामियां
जांच के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आईं. कहा गया कि पुलिस ने आमद-रवानगी (दूसरे राज्य में कार्रवाई की सूचना) दर्ज नहीं की, रोजनामचा अपडेट नहीं किया और स्थानीय पुलिस को भी जानकारी नहीं दी. नियमों के मुताबिक कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी जरूरी होती है, लेकिन वह भी नहीं की गई. इन सभी तथ्यों ने पुलिस की कार्रवाई पर संदेह खड़ा कर दिया.
मोबाइल बंद होने का तर्क भी सवालों में
पुलिस ने स्थानीय थाने को सूचना न देने के पीछे यह तर्क दिया कि मोबाइल की बैटरी खत्म हो गई थी. लेकिन जब कार्रवाई में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी शामिल थे, तो सभी के मोबाइल बंद होने की बात पर भी सवाल उठे. कोर्ट ने इस तर्क को भी संदिग्ध माना.
फरियादी पक्ष ने इसे बताया न्याय की जीत
फरियादी पक्ष के वकील असगर अली ने कहा कि अदालत के फैसले से यह साफ हो गया है कि पुलिस ने अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं किया. उन्होंने इस आदेश को न्याय की जीत बताया और कहा कि सच्चाई सामने आ रही है. आरोपियों के परिजनों ने कोर्ट के फैसले पर संतोष जताया है. उनका कहना है कि अब वे अपने भाइयों की जमानत और रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाएंगे. उनका आरोप है कि पुलिस ने गलत तरीके से उन्हें फंसाया था.
ऊपरी अदालत जाने की तैयारी में पुलिस
वहीं इस पूरे मामले पर थाना प्रभारी शशि उपाध्याय का कहना है कि वे कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे. पुलिस विभाग अब अपने बचाव में कानूनी विकल्प तलाश रहा है.
इन पुलिसकर्मियों पर एफआईआर
- शशि उपाध्याय, थाना प्रभारी कोतवाली आगर
- रूपसिंह राजपुत, थाना प्रभारी बड़ौद
- राखी गुर्जर, उप निरीक्षक
- अजय जाट, सहायक उप निरीक्षक
- राहुल विश्वकर्मा, पुलिसकर्मी
- शुभम, पुलिसकर्मी
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