उत्तराखंड का जोशीमठ याद है? ये जगह साढ़े तीन साल पहले अचानक चर्चा में तब आ गई थी, जब यहां की जमीन धंसने लगी थी, दीवारें दरकने लगी थीं और इमारतें ढहने लगी थीं. अब इसी तरह के हालात जम्मू के राजौरी जिले के कलाबन गांव में भी हो रहे हैं.
बिलाल अहमद यहां पर अपनी दुकान चलाते हैं. रविवार सुबह जब वह अपनी दुकान पर काम कर रहे थे, तभी अचानक उनकी दुकान की चारों दीवारों से चरमराने की आवाजें आने लगीं. इससे पहले कि वह समझ पाते कि क्या हो रहा है, उनके पैरों के नीचे की जमीन फट गई और उसमें बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गईं.
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
बिलाल ने उस डरावने अनुभव को याद करते हुए कहा, 'मैं बुरी तरह डर गया और तुरंत बाहर भागा. हमारे नीचे की जमीन खिसक रही थी.'
उनकी दुकान से कुछ ही मीटर की दूरी पर, एक घर ताश के पत्तों की तरह ढह गया. कुछ ही सेकंड में, घबराए हुए ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकल आए क्योंकि उनके नीचे की जमीन धंसने लगी थी, जिससे राजौरी की मंजाकोट तहसील के कलाबन गांव में अफरा-तफरी मच गई.
'जहां सड़क थी, वहां अब गड्ढा है'
कलाबन को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़क दो हिस्सों में बंट गई है, जिससे गांव का बाकी इलाके से संपर्क टूट गया है. यहां रहने वाले रियाज अहमद ने कहा, 'कल सड़क पर दरारें छोटी थीं, लेकिन आज वे खतरनाक रूप से चौड़ी हो गई हैं.'
कलाबन में हालात बहुत खराब हैं. इमारतें ढह गई हैं, घरों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, खेत फट गए हैं और जहां मुख्य सड़क हुआ करती थी, वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया है. यहां के परिवार युद्ध या किसी अचानक आई आपदा के कारण नहीं, बल्कि अपने पैरों के नीचे से चुपचाप खिसकती जमीन के कारण अपने घर खो रहे हैं.

ग्रामीणों की जमीनें बर्बाद
गांव में जमीन धंसने की प्रक्रिया एक हफ्ते पहले लैंडस्लाइड के बाद शुरू हुई थी, और मौसम बेहतर होने के बावजूद यह सिलसिला लगातार जारी है.
इस घटना से लोगों में भारी डर फैल गया है और बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ है. ग्रामीणों की सैकड़ों कनाल उपजाऊ जमीन बर्बाद हो गई है और दर्जनों इमारतें रहने लायक नहीं बची हैं.
राजौरी के डिप्टी कमिश्नर अभिषेक शर्मा ने राजस्व अधिकारियों की एक टीम के साथ घटनास्थल का दौरा किया और जमीन धंसने से हुए नुकसान का जायजा लिया.
शुरुआती जांच के अनुसार, तीन घर पहले ही ढह चुके हैं, जबकि कई अन्य घरों में गंभीर दरारें आ गई हैं, जिससे वे रहने के लिए पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं. कई अन्य इमारतें आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं और वे भी रहने लायक नहीं हैं. राजस्व अधिकारी नुकसान का आकलन करने के लिए घटनास्थल पर मौजूद हैं.
मॉनसून लेकर आया बड़ा डर
अब सबसे बड़ा डर मॉनसून का है. एक अन्य ग्रामीण मुनीर ने चेतावनी देते हुए कहा, 'ये इमारतें इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं कि बारिश के एक और दौर को नहीं झेल पाएंगी.'
निवासी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि उन्हें हुए नुकसान का तुरंत मुआवजा दिया जाए और उन्हें सुरक्षित जगहों पर बसाया जाए. गांव वालों का आरोप है कि जमीन का धंसना उस इलाके में बन रहे नेशनल हाईवे का सीधा नतीजा है. एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'सड़क बनाने के लिए जमीन की खुदाई में भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया था. इससे मिट्टी ढीली हो गई और अब जमीन धंस रही है, जिससे यहां रहना खतरनाक हो गया है.'
मानसून के करीब आने और ज़मीन के लगातार खिसकने के बीच, कालाबान के लोग राहत, पुनर्वास और अपने सवालों के जवाब का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं