- NDTV वर्ल्ड 27 अगस्त को काठमांडू में भारत और नेपाल की प्रमुख हस्तियों को एक मंच पर लाने वाला है
- इस इवेंट से ‘एनडीटीवी अन्वीक्षा’ नाम की वैश्विक बातचीत की नई सीरीज की शुरुआत होगी जो देशों के नजरिए समझेगी
- कार्यक्रम में नेपाल के कई बड़े नेता, अधिकारी, कारोबारी, कलाकार और खेल जगत के दिग्गज शामिल होंगे
एक नया सफर, एक बड़ा मकसद... NDTV वर्ल्ड 27 अगस्त को काठमांडू में भारत और नेपाल की कई बड़ी हस्तियों को एक मंच पर लाने जा रहा है. इस इवेंट के साथ ‘एनडीटीवी अन्वीक्षा: आइडियाज अक्रॉस बॉर्डर्स' नाम की नई वैश्विक बातचीत की सीरीज शुरू होगी. हम एक एक कर दुनिया भर में जाएंगे और यह समझने की कोशिश की जाएगी कि ये देश खुद को, अपने पड़ोसी देशों और बदलती दुनिया को किस नजर से देखते हैं. इस सीरिज का पहला पड़ाव नेपाल होगा.
भारत-नेपाल डॉयलॉग में दोनों देशों के नेता, अधिकारी, डिप्लोमेट, कारोबारी, रणनीतिक विशेषज्ञ और कला-संस्कृति व खेल जगत की हस्तियां शामिल होंगी. बातचीत में नेपाल की बदलती राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज के साथ भारत के साथ उसके रिश्तों और क्षेत्र में उसकी भूमिका पर भी चर्चा होगी.
नेपाल के विदेश मंत्री, शशि थरूर और मनीषा कोइराला समेत कई बड़े नाम होंगे शामिल
इस इवेंट में दोनों देशों की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल होंगी. नेपाल की ओर से विदेश मंत्री शिशिर खनाल, वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले, नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन थापा और अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं पर्यटन संसदीय समिति की अध्यक्ष सुम्निमा उदास शामिल होंगी. नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव भी इस बातचीत का हिस्सा होंगे.
कारोबार और उद्योग जगत से नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष कमलेश अग्रवाल, कन्फेडरेशन ऑफ नेपालीज इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष बीरेंद्र राज पांडे, नेपाल-इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष और सूर्य नेपाल प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर गौरव तयाल कार्यक्रम में शामिल होंगे.
फिल्म एक्ट्रेस मनीषा कोइराला और एक्टर व टीवी होस्ट राजेश हमाल कला और संस्कृति के क्षेत्र की ओर से आवाज रखेंगे. नेपाल के पूर्व क्रिकेटर और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ नेपाल के सचिव पारस खड़का खेल जगत का नजरिया सामने रखेंगे.
किन मुद्दों पर होगी बातचीत?
यह खास इवेंट सिर्फ भारत-नेपाल रिश्तों पर होने वाली सामान्य चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा. इसमें नेपाल को उसकी अपनी आवाज, सोच, सपनों और भविष्य की योजनाओं के साथ समझने की कोशिश होगी. बातचीत में नेपाल की आर्थिक तरक्की की योजनाओं, कारोबार शुरू करने के मौकों, लोकतंत्र में आए बदलाव और युवाओं की उम्मीदों पर चर्चा होगी. इसके अलावा तकनीक, पर्यटन, बुनियादी ढांचा, पर्यावरण, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे भी उठेंगे.
‘अन्वीक्षा' की शुरुआत नेपाल से ही क्यों?
भारत और नेपाल के रिश्ते कई पीढ़ियों पुराने हैं. दोनों देशों को भूगोल, इतिहास, संस्कृति, आस्था और व्यापार ने करीब लाया है. लेकिन इतनी गहरी पहचान की वजह से कई बार नेपाल को सिर्फ भारत के साथ उसके रिश्ते या उसकी रणनीतिक स्थिति के नजरिए से देखा जाता है. ‘अन्वीक्षा' का मकसद इससे आगे जाकर नेपाल को एक ऐसे देश के रूप में समझना है, जिसकी अपनी प्राथमिकताएं, चुनौतियां और महत्वाकांक्षाएं हैं.
‘अन्वीक्षा' का बड़ा मकसद ऐसी बातचीत शुरू करना है, जिसमें देश खुद अपनी कहानी बता सकें. यह सीरीज अलग-अलग देशों तक जाएगी और हर कार्यक्रम में एक देश को बातचीत के केंद्र में रखा जाएगा.
‘अन्वीक्षा' का मतलब क्या है?
‘अन्वीक्षा' नाम प्राचीन भारतीय परंपरा के शब्द ‘आन्वीक्षिकी' से लिया गया है. इसका मतलब है तर्क, सोच-विचार और जांच के जरिए किसी चीज को समझना. इस पहल का मकसद जानी-पहचानी बातों और कहानियों को एक बार फिर नए नजरिए से देखना है. हर इवेंट में किसी देश के इतिहास, पहचान, वहां के लोगों की असल जिंदगी और उनकी महत्वाकांक्षाओं को समझने की कोशिश होगी. साथ ही इन्हें दुनिया के बड़े राजनीतिक और आर्थिक सवालों से जोड़कर देखा जाएगा.
इस पहल के बारे में NDTV के CEO और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने कहा कि देशों के बीच अच्छी बातचीत तब शुरू हो सकती है, जब लोग अपनी धारणाओं से आगे बढ़कर यह सुनें कि कोई देश खुद को किस तरह देखता है. उन्होंने कहा कि इस यात्रा की शुरुआत के लिए नेपाल एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण जगह है. वहीं NDTV वर्ल्ड के एडिटर नवीन कपूर ने कहा कि यह पहल भारत को दुनिया से जोड़ने के प्रयास को आगे बढ़ाएगी. उन्होंने कहा कि ‘अन्वीक्षा' में देशों को उनके अपने नजरिए, प्राथमिकताओं और उम्मीदों के आधार पर समझने पर ध्यान दिया जाएगा.
आगे क्या होगा?
काठमांडू में होने वाली भारत-नेपाल बातचीत ‘अन्वीक्षा' की बड़ी योजना का पहला कदम है. यह सीरीज अलग-अलग देशों और महाद्वीपों तक जाएगी. इसमें देशों की पहचान, उनकी महत्वाकांक्षाओं और उनके भविष्य को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर बातचीत होगी. इसलिए काठमांडू का कार्यक्रम सिर्फ भारत-नेपाल रिश्तों तक सीमित नहीं रहेगा. इसमें नेपाल की क्षेत्र और दुनिया में अपनी जगह, अपने सपनों को लेकर भी बड़े सवाल उठाए जाएंगे.
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