विज्ञापन

बेहाल बचपन... तंबुओं में कट रही रातें, घर-स्कूल बचे या खत्म हो गए पता नहीं- बेरूत से NDTV Ground Report

NDTV Ground Report From Beirut: लेबनान में 12 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं. इस युद्ध ने उन्हें पिछले 15 महीनों में दूसरी बार विस्थापित किया है. इजरायल दक्षिणी लेबनान पर कब्जा करने को आमादा दिख रहा है. ऐसे में लाखों लोग बेदखली और एक अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं.

बेहाल बचपन... तंबुओं में कट रही रातें, घर-स्कूल बचे या खत्म हो गए पता नहीं- बेरूत से NDTV Ground Report
बेरूत में फुटपाथ किनारे बने अस्थायी कैंप के सामने साइकिल चलाती 4 साल की फातिमा.
  • लेबनान में युद्ध के कारण दस लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें हजारों बच्चे अंधकार में हैं.
  • बेघर लोग फुटपाथों पर बने अस्थायी तंबुओं में रह रहे हैं, जहां साफ-सफाई और नहाने की कोई सुविधा नहीं है.
  • इजरायली हमले से कफरकेला और खैम जैसे गांव पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, जिससे वहां के निवासी बुरी तरह प्रभावित है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
बेरूत, लेबनान:

ऊपर तस्वीर में साइकिल चला रही 4 साल की फातिमा इतनी छोटी है कि वह इस त्रासदी की गंभीरता को समझ नहीं पाती. वह बारिश वाले बेरूत में साइकिल चलाते हुए खुशी के कुछ पल तलाश लेती है. पिछले दो साल में यह दूसरी बार है, जब इस चार साल की बच्ची ने अपना घर-बार खो दिया है. लेबनान में चल रहे युद्ध के कारण दस लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं, और फातिमा जैसे हजारों बच्चों का भविष्य अंधकार में डूबा है. जंग के हालात के बीच NDTV की टीम इस समय लेबनान में है. जहां युद्ध के कारण विस्थापित जीवन जी रहे लोगों का हाल बेहद बुरा है.  

फुटपाथ पर बने अस्थायी तंबुओं में कट रहा जीवन

बेरूत के फुटपाथों पर बने एक अस्थायी तंबू में एक परिवार ने बताया उनका कस्बा, कफरकेला लेबनान-इज़रायल सीमा के पास है. 2 मार्च को हुए इजरायल के जबरदस्त हमले का सबसे पहला शिकार यही गांव बना था. गांव पर हमला होने से पहले यह छोटी बच्ची छह महीने तक किंडरगार्टन (बालवाड़ी) गई थी. लेकिन अब वह कभी वहां वापस नहीं जा पाएगी, क्योंकि इजरायल ने पूरी तरह से तबाह हो चुके कफरकेला पर अपना झंडा फहरा दिया है.

एक महीने पहले युद्ध शुरू होने के बाद से लेबनान की लगभग एक-चौथाई आबादी विस्थापित हो चुकी है. UNICEF के अनुसार, हर दिन 19,000 बच्चे, लड़के और लड़कियां स्थापित हो रहे हैं. वे फुटपाथों पर बने अस्थायी तंबुओं में सोने को मजबूर हैं.

रिफ्यूजी कैंप में बच्चे के साथ महिला.

रिफ्यूजी कैंप में बच्चे के साथ महिला.

न साफ-सफाई, न नहाने-धोने की सुविधा

बेरूत के शरणार्थी कैंप में लोग बहुत ही खराब हालात में रह रहे हैं. वहां साफ-सफाई की कमी है, नहाने-धोने की कोई सुविधा नहीं है. खाने-पीने की भी दिक्कतें हैं. 9वीं क्लास की छात्रा साहिरा दाऊद कहती है- अपना घर तबाह होने के बाद ऐसे हालात में रहना बहुत मुश्किल है. उसे नहीं पता कि उसका स्कूल अभी भी ठीक-ठाक है या 2023 में उसके पिछले स्कूल की तरह वह भी तबाह हो चुका है.

9वीं की छात्रा बोलीं- यहां कपड़े बदलने की भी जगह नहीं

साहिरा ने कहा, "मेरा नाम साहिरा है. मैं खैम से विस्थापित हुई हूं. यहां न तो बाथरूम हैं और न ही कपड़े बदलने की कोई जगह. हवा और बारिश से अक्सर हमारे टेंट उड़ जाते हैं. हम ठीक से खा-पी भी नहीं पाते. नहाने के लिए भी कोई जगह नहीं है. हम नमाज भी नहीं पढ़ पाते, क्योंकि हमारे पास पहनने के लिए ठीक-ठाक कपड़े ही नहीं हैं." साहिरा उम्मीद करती है कि वह जल्द से जल्द अपने घर लौट पाएगी, क्योंकि कैंप के हालात बहुत ही दयनीय हैं.

पहले हम खुशहाल जिंदगी जीते थे, लेकिन अब...

साहिरा ने आगे कहा, “हम पहले एक अच्छी और खुशहाल जिंदगी जीते थे. लेकिन विस्थापन के बाद, अब सिर्फ तकलीफें और मुश्किलें ही हैं. मेरे स्कूल पर भी बमबारी हुई है.” बेक्का घाटी में बच्चे खुश नजर आते हैं कि दक्षिण लेबनान में उनके घरों पर हमले के बाद, उन्हें एक स्कूल की इमारत के अंदर पनाह मिल गई है.

रिफ्यूजी कैंप में रह रहा लेबनानी बच्चा.

रिफ्यूजी कैंप में रह रहा लेबनानी बच्चा.

पत्नी और तीन बच्चों के साथ कैंप में रह रहे जाहिर रायल

लेबनान-इजरायल सीमा पर स्थित खैम गांव जब इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच एक भयंकर युद्ध का मैदान बन गया, तो जाहिर रायल अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ घर छोड़कर यहां भाग आए. अब एक छोटे से कमरे में रहते हुए उसे यह नहीं पता कि वह और उसका परिवार कभी वापस लौट पाएगा. 

इजरायल ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह लिटानी नदी के दक्षिण का इलाका और खैम गांव पर कब्जा कर लेगा, घरों को गिरा देगा और उस पूरे इलाके को एक सुरक्षा बफर जोन में बदल देगा.

15 साल के जवाद ने कहा- मुझे नहीं पता मेरा स्कूल बचा है या खत्म हो गया

15 साल के जवाद बताते हैं कि 2023-2024 के पिछले युद्ध के दौरान खैम में उनके स्कूल पर बमबारी हुई थी. उन्हें अब पक्का नहीं पता कि जिस नए स्कूल में उन्होंने दाखिला लिया था, वह इजरायल के ताजा हमले के बाद अब भी बचा है या नहीं. जवाद ने कहा, "मेरे पुराने स्कूल पर बमबारी हुई थी. मुझे कोई अंदाजा नहीं है कि मेरा अभी का स्कूल बचा है या उस पर भी बमबारी हो चुकी है."

सरकार का दावा- बेघरों की कर रहे मदद

लेबनान में बेघर हुए लाखों लोगों तक सचमुच कोई मदद नहीं पहुंच रही है, या फिर बहुत ही कम मदद मिल रही है. हालांकि हिजबुल्लाह के एक बड़े नेता ने कैंप का दौरा किया और दावा किया कि लेबनान की सरकार और हिजबुल्लाह मिलकर बेघर लोगों की मदद कर रहे हैं, लेकिन जाहिर का कहना है कि उन तक ऐसी कोई मदद नहीं पहुंची है.

Latest and Breaking News on NDTV

रिफ्यूजी कैंप के लोग बोले- नहीं मिली कोई मदद

हिज़्बुल्लाह के नेता और सांसद रामी अबू हमदान ने कहा, "सबसे पहले तो सरकार शरणार्थियों की मदद कर रही है. हम भी, हिजबुल्लाह और इस्लामी प्रतिरोध के तौर पर उन सभी का ख्याल रख रहे हैं. कुछ NGO भी मदद कर रहे हैं. और सबसे बढ़कर, आम लोग मदद कर रहे हैं," 
लेकिन रिफ्यूजी कैंप में रह रहे जाहिर ने कहा, "नहीं, हिजबुल्लाह या सरकार की तरफ से मदद लेकर हमारे पास कोई नहीं पहुंचा है." 

पूरे लेबनान से 12 लाख से ज्यादा लोग हो चुके बेघर

पूरे लेबनान में, 12 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों और अपनी जन्मभूमि से बेघर हो गए हैं. इस युद्ध ने उन्हें पिछले 15 महीनों में दूसरी बार विस्थापित किया है. इजरायल दक्षिणी लेबनान पर कब्जा करने को आमादा दिख रहा है. ऐसे में लाखों लोग बेदखली और एक अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें - ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट: लेबनान में इजरायल का एक्शन तेज, बेरूत में फिर मिसाइल हमले, चारों तरफ अफरा-तफरी

यह भी पढ़ें - भारत डाले दबाव तो लेबनान के खिलाफ युद्ध रोक सकता है इजरायल, हिजबुल्‍लाह नेता ने NDTV से कहा

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com