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लेबनान को दो हिस्सों में बांटने की तैयारी, इजरायल ने शुरू किया बड़ा सैन्य अभियान, लिटानी नदी तक बनाएगा बफर जोन

इजरायल ने दक्षिण लेबनान में लिटानी नदी तक 'बफर जोन' बनाने के लिए बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है. इस कदम से लेबनान के विभाजन और 10 लाख से अधिक लोगों के विस्थापन ने क्षेत्र में भारी मानवीय संकट खड़ा कर दिया है.

लेबनान को दो हिस्सों में बांटने की तैयारी, इजरायल ने शुरू किया बड़ा सैन्य अभियान, लिटानी नदी तक बनाएगा बफर जोन
  • इजरायली सेना ने लेबनान की सीमा से लिटानी नदी तक एक बफर जोन बनाकर हिजबुल्लाह को सीमा से दूर रखना चाहा है
  • इजरायल का दावा है कि यह कदम UNSC के 2006 के प्रस्ताव 1701 के तहत शांति बनाए रखने के लिए है
  • लेबनानी नागरिकों को डर है कि इजरायल का यह बफर जोन एक सैन्य कब्जे जैसा है
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मिडिल ईस्ट में महीनेभर से चल रही जंग बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच शुरू हुए इस युद्ध ने कई खाड़ी देशों को भी अपनी जद में ले लिया है. इजरायल ईरान के अलावा दक्षिण लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ आक्रामक सैन्य आक्रामक चला रहा है. इजरायल के हमलों का असर सीधे तौर पर लेबनान और वहां के लोगों पर पड़ रहा है. हाल ही में इजरायली रक्षा मंत्री ने ऐलान किया था कि इजरायल की सेना लेबनान में लिटानी नदी तक का कंट्रोल लेगी. इजरायल इस नदी तक बफर जोन बनाएगा. इस तरह इजरायल लेबनान को दो हिस्सों में बांटने की तैयारी कर रहा है. आखिर इजरायल का प्लान क्या है? इसके क्या परिणाम होंगे? आइए समझते हैं.

इजरायल ने किया बफर जोन का ऐलान

इजरायली सेना (IDF) ने कहा है कि वो फिलहाल हिजबुल्लाह के रॉकेट और मिसाइल हमलों को रोक रहे हैं. इजरायल लेबनान की सीमा से लेकर लिटानी नदी तक के इलाके को अपने कंट्रोल में लेकर एक बफर जोन यानी सुरक्षित क्षेत्र बनाना चाहता है. लिटानी नदी इजरायल-लेबनान सीमा से लगभग 30 किलोमीटर उत्तर में है. इस बफर जोन के जरिए इजरायल हिजबुल्लाह के लड़ाकों को अपनी सीमा से दूर रखना चाहता है. ताकि उत्तरी इजरायल से विस्थापित हुए करीब 60 हजार इजरायली नागरिक सुरक्षित अपने घरों को लौट सकें. इजरायल इसके लिए कूटनीतिक तौर पर तर्क दे रहा है कि वह UNSC के 2006 के प्रस्ताव 1701 को लागू करने की कोशिश कर रहा है, जो लिटानी नदी और इजरायल-लेबनान बॉर्डर पर शांति से जुड़ा है.

लेबनान के लोगों को इतिहास दोहराए जाने का खौफ

इधर इजरायल के हमलों से लेबनानी नागरिकों के मन में पुराने जख्म ताजा हो गए हैं. लेबनानी लोगों को लग रहा है कि इजरायल सुरक्षा के नाम पर जो बफर जोन बना रहा है, वो असल में एक सैन्य कब्जा है. इससे पहले 1982 के युद्ध के बाद इजरायली सेना ने पीएलओ और बाद में हिजबुल्लाह को रोकने के लिए दक्षिण लेबनान में एक बफर जोन बनाया था. इजरायली सेना वहां करीब 18 सालों तक मौजूद रही और मई 2000 में जाकर वहां से पूरी तरह वापस लौटी थी.

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भारी तबाही और पलायन

इजरायल और लेबनान के इस सैन्य टकराव के खतरनाक नतीजे आम लोगों को भुगतने पड़ रहे हैं. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इजरायली हवाई हमलों और गोलाबारी में अब तक 1100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. इसके अलावा इजरायली सेना ने दक्षिण लेबनान के दर्जनों गांवों और कस्बों को खाली करने के आदेश जारी किए. नतीजतन 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़ने को मजबूर हुए हैं.

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