New Rule Change 1st April: 1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत हो रही है. नए साल से केंद्र और राज्य सरकारें बड़े बदलाव करती हैं.उत्तर प्रदेश में नोएडा, गाजियाबाद जैसे बड़े शहरों और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्रों में भी प्रॉपर्टी रजिस्ट्री महंगी हो रही है. जबकि, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों की बढ़ी एंट्री फीस भी लागू हो जाएगी, जिससे पर्यटन महंगा हो जाएगा.उत्तराखंड में भी होटल, होमस्टे से जुड़ा सिंगल विंडो सिस्टम लागू हो जाएगा.
उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्री महंगी
यूपी के कई जिलों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ में नए सर्कल रेट के आधार पर संपत्तियों की रजिस्ट्री शुरू होगी. परिवहन विभाग ने व्यावसायिक वाहनों के लिए नेशनल परमिट की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है. अब होम डिस्ट्रिक्ट के बाहर भी परमिट रिन्यूअल आसान होगा. नगर निगमों ने सेल्फ-असेसमेंट न करने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान 1 अप्रैल से कड़ा कर दिया है.
उत्तराखंड में सर्कल रेट बढ़ा
उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों में सर्कल रेट में 9% से 22% तक की बढ़ोतरी की गई है. इससे अब जमीन की रजिस्ट्री कराना पहले से महंगा होगा. देहरादून और मसूरी में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के व्यावसायिक वाहनों पर ग्रीन सेस की नई दरें लागू हो रही हैं. इससे घूमना-फिरना महंगा हो सकता है. उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होने जा रहा है जहाँ संपत्ति की खरीद-बिक्री के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था 1 अप्रैल से प्रभावी होगी. अब जमीन या मकान की रजिस्ट्री के लिए तहसील के चक्कर काटने और लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं होगी. उत्तराखंड में होमस्टे और होटल खोलना अब आसान होगा. नए वित्तीय वर्ष से राज्य में होमस्टे रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सिंगल विंडो कर दिया गया है. संवेदनशील इलाकों में जाने वाले वाहनों पर इको टैक्स की दरें बढ़ाई गई हैं.
हिमाचल प्रदेश में घूमना-फिरना महंगा
हिमाचल सरकार ने अपनी नई टोल पॉलिसी 2026-27 के तहत 1 अप्रैल 2026 से बाहर से आने वाले वाहनों पर एंट्री टैक्स (TOLL) में भारी इजाफा किया है. निजी कार या अन्य वाहन से दूसरे राज्यों से आने वाली कारों पर एंट्री टैक्स 70 से बढ़ाकर 170 रुपये प्रति दिन कर दिया गया है.कमर्शियल बसों में 32 सीटों वाली बसों का शुल्क ₹320 से बढ़ाकर ₹600 कर दिया गया है.भारी वाहन (ट्रक/जेसीबी)और कंस्ट्रक्शन मशीनरी पर शुल्क 720 से बढ़ाकर 900 कर दिया गया है.शिमला और मनाली जैसे पर्यटन शहरों में एंट्री के लिए लगने वाले ग्रीन सेस की दरें बढ़ी हैं. नगर निगम शिमला और धर्मशाला में कमर्शियल संपत्तियों के टैक्स असेसमेंट के लिए नई यूनिट एरिया प्रणाली लागू हो रही है.
दिल्ली में प्रॉपर्टी टैक्स में बदलाव
दिल्ली नगर निगम (MCD) और NDMC क्षेत्रों में संपत्ति कर (Property Tax) में बदलाव हो रहा है. नगर निगम ने यूनिट एरिया मेथड (UAM) अपनाने का फैसला किया है. इससे पुरानी और खुद के रहने वाली संपत्तियों (Self-occupied properties) पर टैक्स का बोझ 30 से 50% तक कम हो सकता है. अब एक ही प्रॉपर्टी के अलग-अलग हिस्सों (जैसे दुकान और गोदाम) का असेसमेंट अलग-अलग किया जा सकेगा.एमसीडी ने भवन निर्माण योजना (Building Plan) की मंजूरी के लिए पूरी प्रक्रिया को 100% डिजिटल कर दिया है, जिससे अब फिजिकल ऑफिस जाने की जरूरत नहीं होगी.
हरियाणा में डिजिटल प्रॉपर्टी आईडी
हरियाणा सरकार ने 31 मार्च 2025 तक के बकाया प्रॉपर्टी टैक्स पर 100% ब्याज माफी (Interest Waiver) की घोषणा की है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी. किसी भी प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री के लिए ऑनलाइन पोर्टल से 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' लेना अनिवार्य होगा, वरना रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी.
पंजाब-उत्तराखंड में भी बदलाव
पंजाब सरकार ने यूनिफाइड बिल्डिंग रूल्स 2025 को लागू किया है. अब ग्रुप हाउसिंग और कॉमर्शियल बिल्डिंग्स के लिए परमिट लेना पहले से सस्ता लेकिन नियमों में सख्त होगा. यहां संपत्तियों के हस्तांतरण (Transfer) पर लगने वाले सेस (Cess) में कुछ बदलाव किए गए हैं। साथ ही, होमस्टे रजिस्ट्रेशन के लिए नई सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था शुरू हुई है।
चंडीगढ़ में प्रापर्टी महंगी
चंडीगढ़ में घर या जमीन खरीदना अब काफी महंगा हो जाएगा. प्रशासन ने कलेक्टर रेट में 10 से 33% तक की वृद्धि हुई है. रेजीडेंशियल आवासीय सेक्टर में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 33 फीसदी तक हुई है. हाउसिंग बोर्ड फ्लैट के रेट करीब 25% तक बढ़े हैं. सोसायटी फ्लैट के रेट में 15% तक का इजाफा हुआ है. कमर्शियल सेक्टर-17 जैसे प्रीमियम इलाकों में बूथ और SCO की दरें अब ₹5.92 लाख प्रति वर्ग गज तक पहुँच गई हैं.चंडीगढ़ नगर निगम ने पानी की खपत (Water Charges) पर 5% का अतिरिक्त शुल्क 1 अप्रैल से लागू कर दिया है. सीवरेज सेस (Sewerage Cess): हालांकि सेस की दर 20% पर बरकरार है, लेकिन पानी का बिल बढ़ने के कारण प्रभावी रूप से सीवरेज सेस की राशि भी बढ़ जाएगी.
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