- तुर्किये से नवप्रीत सिंह को डिपोर्ट कर भारत लाया गया, जो कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का मुख्य हैंडलर था
- नवप्रीत सिंह ने विदेश से भारत में अपने सहयोगियों को ड्रग तस्करी के निर्देश दिए और फर्जी पहचान बनाई थी
- दिल्ली पुलिस ने 2021 में घिटोरनी से शुरू हुई जांच में 355 किलो से अधिक हेरोइन बरामद की थी
तुर्किये से कथित अंतरराष्ट्रीय नार्को-ट्रैफिकिंग नेटवर्क से जुड़े नवप्रीत सिंह उर्फ नव को भारत लाया गया है. दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की जांच में नवप्रीत सिंह को 2021 में सामने आए एक बड़े ड्रग सिंडिकेट का कथित मुख्य हैंडलर बताया गया है. पुलिस के मुताबिक, वह विदेश में बैठकर भारत में मौजूद अपने नेटवर्क को निर्देश देता था.
नवप्रीत सिंह को तुर्किये से डिपोर्ट कर भारत लाया गया और उसके बाद संबंधित ड्रग मामलों में कानूनी कार्रवाई की गई. आरोप है कि वह विदेश में फर्जी पहचान के सहारे रह रहा था. जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसने ‘नवाब विर्क' नाम की पहचान का इस्तेमाल कर तुर्किये में नागरिकता हासिल की थी.
2021 में घिटोरनी से शुरू हुई थी जांच
इस पूरे मामले की जांच की शुरुआत साल 2021 में दिल्ली के घिटोरनी इलाके से हुई थी. दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने करीब 1 किलो हेरोइन के साथ रिजवान अहमद उर्फ रिजवान कश्मीरी को गिरफ्तार किया था. जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को पता चला कि रिजवान कथित तौर पर अफगानिस्तान में मौजूद एक आरोपी के निर्देश पर काम कर रहा था. इसके बाद जांच की कड़ी फरीदाबाद तक पहुंची, जहां पुलिस ने गुरप्रीत सिंह और गुरजोत सिंह को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे और उनके ठिकानों से बड़ी मात्रा में हेरोइन बरामद हुई. इस पूरे केस में बरामदगी का आंकड़ा 355 किलो से ज्यादा हेरोइन का बताया गया है, जिसकी कीमत पुलिस के मुताबिक एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा थी.

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कपूरथला जेल में हुई थी मुलाकात
जांच के दौरान एक अहम कड़ी सामने आई. पुलिस के मुताबिक, गुरप्रीत सिंह की मुलाकात नवप्रीत सिंह उर्फ नव से कपूरथला जेल में हुई थी. दोनों अलग-अलग एनडीपीएस मामलों में जेल में बंद थे. पुलिस का आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा और आगे चलकर नवप्रीत विदेश में बैठकर ड्रग नेटवर्क को निर्देश देने लगा.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, नवप्रीत सिंह विदेश में रहने के बावजूद भारत में मौजूद अपने सहयोगियों के लगातार संपर्क में था. आरोप है कि वह ड्रग कंसाइनमेंट की सप्लाई और उसकी आवाजाही से जुड़े निर्देश देता था. जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क में अफगानिस्तान से भारत तक ड्रग्स पहुंचाने की कड़ी भी शामिल थी. एजेंसियां हेरोइन के अलावा मेथामफेटामाइन की तस्करी से जुड़े एंगल की भी जांच कर रही थीं.
प्रभदीप सिंह उर्फ हैरी भी नेटवर्क की अहम कड़ी
इसी केस में प्रभदीप सिंह उर्फ हैरी का नाम भी सामने आया. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रभदीप भारत में नवप्रीत के लिए ड्रग नेटवर्क को संभालता था. पुलिस का दावा है कि प्रभदीप का काम नवप्रीत के निर्देश भारत में मौजूद आरोपियों तक पहुंचाना और नार्को कंसाइनमेंट की आवाजाही पर नजर रखना था. वह नवप्रीत के दूसरे सहयोगियों के भी लगातार संपर्क में था. पुलिस के मुताबिक, प्रभदीप 2023 में भारत से फरार हो गया था. बाद में उसे अजरबैजान के बाकू से प्रत्यर्पण के जरिए भारत लाया गया. 13 मई 2026 को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की तीन सदस्यीय टीम ने सीबीआई के साथ समन्वय कर उसे भारत वापस लाया था.
अफगान नागरिक का नाम भी आया सामने
इस मामले की जांच में एक अफगान नागरिक हजरत अली का नाम भी सामने आया. पुलिस के मुताबिक, उसके पास से करीब 2 किलो हेरोइन और लगभग 100 किलो केमिकल बरामद किया गया था. जांच एजेंसियों के लिए यह बरामदगी इसलिए अहम थी क्योंकि इससे कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग सप्लाई नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिली. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. अब नवप्रीत सिंह के भारत आने के बाद जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं.
ड्राई फ्रूट कारोबार की आड़ में तस्करी का आरोप
अब तक की जांच में यह सामने आया है कि नवप्रीत ड्राई फ्रूट्स के कारोबार के जरिए अफगानिस्तान और पाकिस्तान से ड्रग्स लाकर भारत में उसकी सप्लाई करता था. इतना ही नहीं, नशे के कारोबार से कमाए गए पैसे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किए जाने के सबूत भी एजेंसियों को मिले हैं. इस पहलू की भी गहन जांच की जा रही है.
जांच एजेंसियों को नवप्रीत के पास से कई देशों की विदेशी मुद्राएं मिली हैं, जिनमें पाकिस्तान की मुद्रा भी शामिल बताई गई है. इतना ही नहीं, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कई संदिग्ध नंबर भी उसके पास से मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है. पूछताछ में विदेश में बैठे उसके कथित सहयोगियों, भारत में मौजूद नेटवर्क, ड्रग कंसाइनमेंट और इस पूरे सिंडिकेट की फंडिंग से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है.
फर्जी पहचान और विदेशी ठिकानों की जांच
नवप्रीत सिंह के मामले में जांच एजेंसियों के सामने सबसे अहम चुनौती उसकी पहचान और विदेश में उसके ठिकाने का पता लगाना थी. सरकारी जानकारी के मुताबिक, एजेंसियों ने उसकी कथित फर्जी पहचान का पता लगाया और उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए तुर्किये के साथ समन्वय किया. इस कार्रवाई को सिर्फ ड्रग तस्करी के मामले के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. जांच एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क और उसके भारत में मौजूद संपर्कों के बीच संबंधों की भी जांच कर रही हैं.
भारत में एजेंसियां लंबे समय से ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही हैं, जिनमें विदेशों से ड्रग्स की सप्लाई, भारत में स्थानीय नेटवर्क और हवाला या दूसरे अवैध वित्तीय माध्यमों के इस्तेमाल के आरोप सामने आते रहे हैं. नवप्रीत सिंह से पूछताछ के बाद यह साफ होने की उम्मीद है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था, इसके पीछे कौन-कौन लोग थे और भारत में ड्रग्स की सप्लाई के लिए किन रास्तों और संपर्कों का इस्तेमाल किया जाता था.
नार्को-कार्टेल के खिलाफ कार्रवाई तेज
केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नार्को-कार्टेल के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की बात कही है. गृह मंत्री अमित शाह ने दिसंबर 2029 तक नार्को-कार्टेल को खत्म करने का लक्ष्य बताया है. नवप्रीत सिंह को तुर्किये से भारत लाया जाना इसी तरह की अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
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