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अब बदल जाएगा Instagram-Facebook का खेल ! 1.5 लाख करोड़ रुपये जुर्माना देकर भी नहीं छूटा जुकरबर्ग का पीछा

बच्चों में सोशल मीडिया की लत बढ़ाने के आरोपों पर Meta ने करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक समझौते को स्वीकार किया है. अब Instagram और Facebook पर स्क्रीन टाइम, नोटिफिकेशन, लाइक काउंट और पैरेंटल कंट्रोल से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू होंगे.

अब बदल जाएगा Instagram-Facebook का खेल ! 1.5 लाख करोड़ रुपये जुर्माना देकर भी नहीं छूटा जुकरबर्ग का पीछा

करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये यानी 18 अरब डॉलर का भुगतान, करोड़ों बच्चों से जुड़े आरोप और Facebook-Instagram के कई मशहूर फीचर्स पर लगाम. अमेरिकी राज्यों के साथ Meta का हुआ यह ऐतिहासिक समझौता सिर्फ एक जुर्माने की कहानी नहीं है, बल्कि पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी बड़ी सोशल मीडिया कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म के डिजाइन में बदलाव के लिए मजबूर किया गया है. अमेरिकी राज्यों का आरोप था कि Meta ने Instagram और Facebook में ऐसे फीचर्स और एल्गोरिदम तैयार किए, जो बच्चों और किशोरों को बार-बार ऐप खोलने और घंटों तक स्क्रीन से चिपके रहने के लिए प्रेरित करते थे. दावा किया गया कि इससे बच्चों की मानसिक सेहत, नींद और व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ रहा था. अब Meta को न सिर्फ ये भारी-भरकम रकम चुकानी होगी, बल्कि स्क्रीन टाइम से लेकर नोटिफिकेशन और 'लाइक' काउंट जैसे फीचर्स तक में बड़े बदलाव करने होंगे.

कैलिफोर्निया के ओकलैंड में Meta के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान बैनर लिए एक कार्यकर्ता. इस बैनर में उन बच्चों के नाम हैं जिनकी मौत सोशल मीडिया की वजह से हुई है.

कैलिफोर्निया के ओकलैंड में Meta के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान बैनर लिए एक कार्यकर्ता. इस बैनर में उन बच्चों के नाम हैं जिनकी मौत सोशल मीडिया की वजह से हुई है.
Photo Credit: AP

Instagram-Facebook में क्या बदल जाएगा?

इस समझौते का सबसे बड़ा असर सीधे Instagram और Facebook चलाने वाले किशोरों पर दिखाई देगा. Meta को अपने प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे बदलाव करने होंगे, जिनका मकसद बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना और उन्हें नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से दूर रखना है. समझौते के तहत 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए रोजाना 2 घंटे की डिफॉल्ट समय सीमा होगी. अगर कोई किशोर इससे ज्यादा समय तक ऐप इस्तेमाल करना चाहता है तो उसके लिए माता-पिता की मंजूरी जरूरी होगी. इतना ही नहीं, स्कूल के दौरान आने वाले पुश नोटिफिकेशन भी बंद कर दिए जाएंगे ताकि पढ़ाई के समय बच्चों का ध्यान बार-बार मोबाइल की ओर न जाए.Meta को उम्र सत्यापन की प्रक्रिया भी सख्त करनी होगी ताकि कम उम्र के बच्चे अपनी उम्र छिपाकर ऐसे कंटेंट तक न पहुंच सकें, जो उनके लिए उपयुक्त नहीं है. इसके अलावा 'लाइक' काउंट और दूसरे ऐसे फीचर्स पर भी लगाम लगाई जाएगी जो बच्चों और किशोरों में तुलना, दबाव या मान्यता पाने की होड़ को बढ़ाते हैं. बुलिंग, ईटिंग डिसऑर्डर और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संवेदनशील कंटेंट पर भी ज्यादा निगरानी रखनी होगी. साथ ही माता-पिता को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए और मजबूत पैरेंटल कंट्रोल टूल्स उपलब्ध कराए जाएंगे.

बच्चों पर सोशल मीडिया के असर से जुड़े मामले में गवाही देने अदालत पहुंचे Instagram के प्रमुख एडम मोसेरी.

बच्चों पर सोशल मीडिया के असर से जुड़े मामले में गवाही देने अदालत पहुंचे Instagram के प्रमुख एडम मोसेरी.
Photo Credit: AP

10 साल तक चलेगा भुगतान

Meta को यह पूरी रकम एक साथ नहीं, बल्कि अगले 10 वर्षों में किस्तों के रूप में चुकानी होगी. कुल भुगतान 18 अरब डॉलर यानी करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कैलिफोर्निया को मिलेगा, जिसे कम से कम 12,500 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा कई अन्य राज्यों को भी हजारों करोड़ रुपये मिलेंगे. यह पैसा सिर्फ सरकारी खजाने में नहीं जाएगा, बल्कि बच्चों और किशोरों के लिए मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाने, डिजिटल साक्षरता बढ़ाने, स्कूल के बाद की गतिविधियों और समर कैंप जैसी योजनाओं पर खर्च किया जाएगा. अमेरिकी राज्यों का मानना है कि अगर बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले संभावित नुकसान से बचाना है तो जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य पर निवेश बढ़ाना जरूरी है.

TikTok और YouTube पर भी बढ़ेगा दबाव

यह समझौता सिर्फ Meta तक सीमित नहीं रह सकता. दरअसल Meta चाहती है कि TikTok और YouTube जैसी दूसरी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां भी बच्चों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे ही नियम अपनाएं. कंपनी का तर्क है कि अगर केवल Instagram और Facebook पर सख्त नियम लागू होंगे और दूसरे प्लेटफॉर्म पुराने तरीके से चलते रहेंगे तो बच्चों की सुरक्षा का मकसद पूरी तरह हासिल नहीं हो पाएगा.यही वजह है कि समझौते में ऐसे प्रावधान भी रखे गए हैं जो बाकी कंपनियों को समान सुरक्षा मानक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो आने वाले समय में पूरी सोशल मीडिया इंडस्ट्री को बच्चों और किशोरों के लिए अपने प्लेटफॉर्म के नियम बदलने पड़ सकते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो Meta का यह समझौता आने वाले वर्षों में ग्लोबल लेवल पर सोशल मीडिया नियमों की नई दिशा तय कर सकता है.
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असली सवाल अभी बाकी

Meta ने समझौता तो कर लिया है, लेकिन कई बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल समय सीमा लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी. उनके मुताबिक असली चुनौती यह देखना है कि सोशल मीडिया कंपनियां बच्चों का ध्यान खींचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एल्गोरिदम और डिजाइन में कितना बदलाव करती हैं.

दुनिया के लिए क्यों अहम है यह मामला?

यह मामला सिर्फ Meta तक सीमित नहीं है. यदि अदालत इस समझौते को मंजूरी देती है तो यह दुनिया भर की सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक मिसाल बन सकता है. पहली बार किसी टेक दिग्गज को बच्चों की मानसिक सेहत से जुड़े आरोपों के बाद इतनी बड़ी रकम चुकाने और अपने प्लेटफॉर्म में व्यापक बदलाव करने पड़े हैं. सोशल मीडिया की दुनिया में यह बदलाव आने वाले वर्षों की दिशा तय कर सकता है.
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