- टैंकर दिशा गुजरात के दाहेज पोर्ट पर पहुंचेगा.
- ये जहाज पिछले तीन महीने से फारस की खाड़ी में फंसा हुआ था.
- ये 62,370 मीट्रिक टन LNG लेकर आ रहा है.
भारत आ रहे LNG कैरियर 'दिशा' होर्मुज के विवादित इलाके को पार कर गया है. माल्टा के झंडे वाला टैंकर 'दिशा' इस रास्ते के ऑफिशियली फिर से खुलने से पहले ही पार कर गया. अमेरिका और ईरान के सीजफायर डील के ऐलान के बाद दिशा स्ट्रेट को पार करने वाला पहला बड़ा टैंकर है और यह गुजरात के दाहेज पोर्ट आ रहा है. इसके 18 जून को पहुंचने की उम्मीद है.
#WATCH | Delhi: Director in the Shipping Division of the Ministry of Ports, Shipping and Waterways (MoPSW), Opesh Kumar Sharma says, "LNG carrier Disha, managed by Shipping Corporation of India-led consortium, has safely transited the Strait of Hormuz, and she's carrying 62,370… pic.twitter.com/wccwfTpxnv
— ANI (@ANI) June 15, 2026
मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वॉटरवेज (MoPSW) के शिपिंग डिवीजन में डायरेक्टर ओपेश कुमार शर्मा ने इस टैंकर से जुड़ी जानकारी साझा की है. उन्होंने कहा, "शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के ग्रुप की ओर से मैनेज किया जाने वाला LNG कैरियर दिशा, होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रूप से गुजर गया है और वह 62,370 मीट्रिक टन LNG कार्गो ले जा रहा है. यह जहाज शायद 18 तारीख को दाहेज में एंट्री करेगा. मिनिस्ट्री ने डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग के जरिए, अब तक 3,587 से ज्यादा भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने में मदद की है. पिछले 96 घंटों में 50 नाविक वापस लाए गए हैं."

AIS ट्रांसमिशन का इस्तेमाल कर आगे बढ़ रहा टैंकर
खास बात यह है कि टैंकर ने अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) को चालू रखते हुए होर्मुज पार किया. इस सिस्टम से जहाज की जगह, दिशा, स्पीड और मंजिल के बारे में जानकारी मिलती है. जहाज ने भारत सरकार से अपना जुड़ाव बताने के लिए अपने AIS ट्रांसमिशन का इस्तेमाल किया है.
टैंकर दिशा ने होर्मुज स्ट्रेट में युद्ध से पहले जो रास्ता इस्तेमाल किया जाता था वहीं किया है. युद्ध के दौरान कमर्शियल जहाजों के आने-जाने के लिए ईरान और अमेरिका की ओर से बनाए गए शिपिंग लेन से बचते हुए दिशा ने पुराना रास्ता लिया. इसके रास्ते से टैंकर दिशा की आमद से पता चलता है कि इस सफर को ईरानी सेना की मंजूरी मिली होगी.
ब्लूमबर्ग न्यूज के मुताबिक, इस जहाज की पूरी लंबाई 277 मीटर और चौड़ाई 44 मीटर है और यह तीन महीने से ज़्यादा समय से फारस की खाड़ी में फंसा हुआ था.
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