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This Article is From Mar 18, 2011

लीबिया के खिलाफ 'कार्रवाई' पर विश्व समुदाय गंभीर

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा लीबिया को उड़ान वर्जित क्षेत्र घोषित करने के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने देश के शासक मुअम्मार गद्दाफी के खिलाफ शुक्रवार को सैन्य कार्रवाई सहित सभी उपायों पर चर्चा करना शुरू किया। लीबिया को उड़ान वर्जित क्षेत्र घोषित करने के लिए यूएनएससी के प्रस्ताव पर गुरुवार को मतदान हुआ। इस मतदान में भारत और परिषद के चार अन्य सदस्यों ने हिस्सा नहीं लिया। समाचार पत्र 'वॉल स्ट्रीट जनरल' (डब्ल्यूएसजे) के मुताबिक अमेरिकी और यूरोप के अधिकारियों ने कहा है कि कर्नल गद्दाफी की सेना के खिलाफ 'कुछ ही घंटों के भीतर' हमले करने की सम्भावना है। डब्ल्यूएसजे ने अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया कि पेंटागन लीबिया पर जमीनी और हवाई हमले करने के लिए पहले ही सैन्य विकल्पों के साथ तैयार है। उसे बस हमले करने के लिए ह्वाइट हाउस की प्रतीक्षा है। समाचार चैनल 'सीएनएन' ने फ्रांस सरकार के प्रवक्ता फ्रैंकोइस बैरोइन के हवाले से बताया कि लीबिया के खिलाफ सैन्य हमला 'शीघ्र' होगा और हमले में फ्रांस निश्चित रूप से शामिल होगा। समाचार पत्र 'ग्लोब एंड मेल' के मुताबिक कनाडा लीबिया पर उड़ान वर्जित क्षेत्र के प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए छह लड़ाकू विमान भेज रहा है। समाचार पत्र के मुताबिक ओटावा विमानों की सहायता के लिए 120 से 200 के बीच सैन्य कर्मियों को भी भेजेगा। समाचार पत्र 'वाशिंगटन पोस्ट' के अनुसार लीबिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का फैसला संयुक्त राष्ट्र के अधिकृत निर्देश के बाद किया गया है जिसमें लीबिया में नागरिकों की सुरक्षा के लिए गद्दाफी की सेना के खिलाफ 'सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है।' गुरुवार को 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में गद्दाफी की सेना के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रस्ताव शून्य के मुकाबले 10 मतों से पारित हुआ। चीन, ब्राजील, भारत, जर्मनी और रूस ने इस प्रस्ताव पर हुए मतदान में हिस्सा नहीं लिया। वहीं बोस्निया, कोलम्बिया, फ्रांस, गैबॉन, लेबनान, नाइजीरिया, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और अमेरिका ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। लीबिया के उप विदेश मंत्री खालिद कईम ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में चीन, रूस, भारत, ब्राजील और जर्मनी के हिस्सा न लेने पर हम उनके शुक्रगुजार हैं। यह लीबिया के लिए आश्चर्यजनक बात है।" कईम ने कहा कि लीबिया की सरकार 'संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देगी और लीबिया नागरिकों को सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी इच्छा को साबित करेगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप राजदूत मनजीव सिंह पुरी ने कहा कि लीबिया के वास्तविक हालात के बारे में किसी विश्वसनीय सूचना के बगैर मतदान कराया गया।

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