- इजरायली हमलों में लेबनान के 200 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है
- ईरान ने लेबनान को युद्धविराम का अभिन्न हिस्सा माना है और इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है
- इजरायल ने युद्धविराम में लेबनान को शामिल करने से इनकार किया है और अपने हमले जारी रखने का निर्णय लिया है
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ से ईरान युद्ध विराम में लेबनान को शामिल किए जाने की पुष्टि करने को कहा है. उन्होंने यह अनुरोध इजरायली हमलों में लेबनान के 200 से अधिक लोगों की मौत के एक दिन बाद किया है. सलाम के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि पीएम ने शहबाज शरीफ को फोन किया और इस्लामाबाद द्वारा युद्धविराम सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना करते हुए उनसे यह पुष्टि करने को कहा कि युद्धविराम में लेबनान को शामिल किया गया है ताकि कल हुए इजरायली हमलों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके.
ईरान सीजफायर के बाद हमलों से नाराज
इजरायल और अमेरिका ने कहा है कि युद्धविराम में लेबनान शामिल नहीं है, और इजरायल ने अपने हमले जारी रखने की घोषणा की है. ईरान के संसदीय अध्यक्ष ने आज सुबह चेतावनी दी कि तेहरान लेबनान को "युद्धविराम का अभिन्न अंग" मानता है और "कड़ी प्रतिक्रिया" की धमकी दी. यह चेतावनी लेबनान को युद्धविराम में शामिल करने के लिए बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबावों के साथ मेल खाती है.
ईरान के राष्ट्रपति ने दी चेतावनी
वहीं ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा है कि ईरान अपने लेबनानी भाई-बहनों को कभी नहीं छोड़ेगा. लेबनान में इज़रायल का फिर से घुसपैठ करना, शुरुआती संघर्ष-विराम समझौते का खुला उल्लंघन है. यह धोखेबाज़ी और संभावित समझौतों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी का एक खतरनाक संकेत है. इन हरकतों का जारी रहना बातचीत को बेमानी बना देगा. हम ये एक बार फिर बता देना चाहते हैं कि अभी भी हमारी उंगलियां ट्रिगर पर ही हैं.
30 साल बाद हुआ सबसे बड़ा हमला
लेबनान में इजरायल ने सबसे बड़ा हमला बोला है. ईरान-अमेरिका संघर्षविराम के 24 घंटों के भीतर इस हमले में 254 लोग मारे गए हैं और 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. यह इजरायल का लेबनान में 30 साल का सबसे भीषण हमला है. इजरायल का दावा है कि वो लेबनान में ईरान समर्थित लड़ाकों के ठिकानों को निशाना बना रहा है.
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