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ईरान युद्ध रुकते ही भारत के पेट्रोलियम मंत्री कतर क्यों गए? समझिए ये दौरा क्यों है बेहद महत्वपूर्ण

ईरान युद्ध के बाद से दुनिया भर में पेट्रोल और गैस की किल्लत देखी गई. भारत में भी गैस की कालाबाजारी की खबरें आईं. अब जब ईरान और अमेरिका में 15 दिनों का सीजफायर हुआ है, तो भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी कतर पहुंच गए हैं.

ईरान युद्ध रुकते ही भारत के पेट्रोलियम मंत्री कतर क्यों गए? समझिए ये दौरा क्यों है बेहद महत्वपूर्ण
हरदीप पुरी के कतर दौरे से देश में आगे गैस आयात कैसे होगा, इस पर फोकस रहेगा.
  • भारत अपनी प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा कतर से आयात करता है, जो एलएनजी और एलपीजी का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है
  • ईरान युद्ध के कारण कतर के एलएनजी उत्पादन में भारी नुकसान हुआ है, जिससे वैश्विक गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है
  • कतर की एलएनजी उत्पादन क्षमता में हुए नुकसान की मरम्मत में कई वर्ष लग सकते हैं, जिससे भारत की आपूर्ति चिंतित है
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भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी कतर दौरे पर हैं. ये दौरा देश के साथ आम लोगों के भी सीधे फायदे और घाटे से भी जुड़ा हुआ है. इसको समझने के लिए ये जान लीजिए कि भारत में तीन तरह के गैस का इस्तेमाल होता है. पहली है LPG (Liquefied Petroleum Gas). यह गैस लिक्विड फॉर्म में स्टोर की जाती है. ये सिलेंडर के रूप में गांव-गांव तक हर घर में उपयोग होता है. दूसरी है PNG (Piped Natural Gas). यह गैस पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचाई जाती है. बड़े शहरों में अब पाइप के जरिए सीधे कुक‍िंग गैस आती है. इसका भी उयोग खाना बनाने में किया जाता है. तीसरी है CNG (Compressed Natural Gas).यह गैस हाई प्रेशर में कंप्रेस की जाती है. इसका प्रयोग वाहनों में ईंधन के रूप में किया जाता है. सीएनजी से कार, ऑटो, बस तक चलते हैं. ये गैस सीएनजी स्टेशन पर मिलते हैं. वहीं चौथी गैस है LNG (Liquefied Natural Gas). यह प्राकृतिक गैस का लिक्विड रूप होता है. इस गैस को बहुत कम तापमान पर स्टोर किया जाता है. करीबन -162°C पर इसे स्‍टोर रखना होता है. इसका उपयोग इंडस्ट्रीज, बड़े ट्रांसपोर्ट सिस्टम, इंटरनेशनल गैस ट्रांसपोर्ट आदि में किया जाता है.

ये सभी गैस कहां से आती हैं 

भारत LNG कतर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, रूस, नाइजीरिया से आयात करता है. LPG सऊदी अरब, यूएई, कतर, अमेरिका से आयात करता है. PNG का बड़ा हिस्सा आयातित LNG को री-गैसिफाई करके और घरेलू उत्पादन (महाराष्ट्र, गुजरात के तट) से आता है. वहीं भारत अपनी सीएनजी (CNG) की जरूरत का लगभग 50% से 55% हिस्सा कतर, अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई (UAE), ओमान और अंगोला जैसे देशों से तरल प्राकृतिक गैस (LNG) के रूप में आयात करता है. घरेलू स्तर पर, ONGC और रिलायंस इंडस्ट्रीज बॉम्बे हाई और कृष्णा-गोदावरी बेसिन जैसे क्षेत्रों से प्राकृतिक गैस का उत्पादन करती हैं.

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भारत के लिए कतर क्यों महत्वपूर्ण

अब तक आप समझ गए होंगे कि एलएनजी कितना महत्वपूर्ण हैं. पीएनजी और सीएनजी भी एलएनजी के जरिए ही मिलता है. भारत अपनी जरुरत का 40% LNG स्टॉक कतर से आयात करता है. कतर सरकार द्वारा वहां की बड़ी नेचुरल गैस प्रोडक्शन प्लांट्स को बंद करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रूट बाधित होने की वजह से भारत को LNG की सप्लाई बुरी तरह से बाधित हुई है. भारत अपनी कुल LPG (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) खपत का लगभग 60% आयात करता है. इस आयात में भी कतर भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. भारत के कुल LPG आयात का लगभग 29% से 34% (या कुछ रिपोर्टों के अनुसार लगभग 20-45% तक) हिस्सा कतर से ही आता है.

ईरान युद्ध में कतर के नुकसान से चिंता

ईरान युद्ध के बाद से दुनिया भर में पेट्रोल और गैस की किल्लत देखी गई. भारत में भी गैस की किल्लत की अटकलों के बीच कालाबाजारी की खबरें आईं. अब जब ईरान और अमेरिका में 15 दिनों का सीजफायर हुआ है, तो भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के कतर दौर के अहमियत आसानी से समझी जा सकती है. हरदीप सिंह पुरी आज और कल कतर में हैं. ईरान युद्ध के कारण, सरकारी स्वामित्व वाली कतर एनर्जी ने पिछले महीने पांच साल तक के दीर्घकालिक एलएनजी आपूर्ति अनुबंधों पर अप्रत्याशित घटना (फोर्स मेज्योर) की घोषणा की थी, जिससे इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों को होने वाली आपूर्ति प्रभावित हुई थी. हालांकि, भारत का विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया गया है.

कतर का गैस प्रोडक्शन ही हो गया तबाह

कतर एनर्जी के सीईओ साद अल-काबी के अनुसार, फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से कतर पर ईरान के हमलों ने बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है, जो देश की एलएनजी निर्यात क्षमता का लगभग 17 प्रतिशत है. कतर की 14 एलएनजी ट्रेनों में से दो और इसकी दो गैस-टू-लिक्विड (जीटीएल) सुविधाओं में से एक पर हुए हमलों के कारण अनुमानित 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष एलएनजी उत्पादन ठप हो गया है. उन्होंने कहा कि मरम्मत में तीन से पांच साल लग सकते हैं. अनुमान है कि इस व्यवधान से कतर को लगभग 20 अरब डॉलर का वार्षिक राजस्व नुकसान होगा और इसने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, खासकर यूरोप और एशिया के प्रमुख आयातकों के बीच. भारत भी इनमें से एक है.

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भारत अब कतर से क्या चाहता है

इस बीच, भारतीय कंपनियों ने औद्योगिक उद्देश्यों के लिए मुख्य रूप से उपयोग होने वाली एलएनजी की आपूर्ति के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख किया है. भारत ने 2025 में लगभग 25.5 मिलियन टन एलएनजी का आयात किया और सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश के प्राथमिक ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत तक बढ़ाना है. पुरी का यह दौरा भारत के लिए एक नाजुक समय में हो रहा है. भारत के पेट्रोलियम मंत्री कतर से एलएनजी और एलपीजी पर ठोस आश्वासन चाहेंगे. साथ ही ये भी समझने की कोशिश करेंगे कि कतर को जो ईरान युद्ध में नुकसान हुआ है, उसके बाद वो कितना एलएनजी-एलपीजी भारत को सप्लाई कर पाएगा. इसके साथ ही वो ये भी जानना चाहेंगे कि अगर ईरान युद्ध जारी रहता है तो कतर कैसे भारत तक सप्लाई पहुंचाएगा. इस दौरे में भारत की पूरी कोशिश होगी कि कतर से ठोस आश्वासन मिले, जिससे भारत को एलएनजी और एलपीजी मिलने में कोई बाधा नहीं रहे. 

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