- मोजतबा खमेनेई ने अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब बिना भौगोलिक सीमा के देने का निर्देश दिया
- खमेनेई ने सैन्य खुफिया, स्वदेशी रक्षा प्रणाली और आध्यात्मिक शक्ति को मजबूत करने पर विशेष बल दिया
- उन्होंने जनता के समर्थन को क्षेत्रीय अखंडता और इस्लामी व्यवस्था की रक्षा में मुख्य स्तंभ बताया
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई ने शनिवार को शीर्ष सैन्य कमांडरों से मुलाकात की और उन्हें निर्देश दिया कि अमेरिका या इजरायल के किसी भी हमले का जवाब "भौगोलिक रूप से बिना किसी सीमा के" दिया जाए. तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, नेता ने कहा, "किसी भी स्तर या प्रकार के खतरे का जवाब तुरंत, प्रभावशाली ढंग से और भौगोलिक रूप से बिना किसी सीमा के दिया जाना चाहिए."
जिहाद की बात की
कमांडर-इन-चीफ ने सैन्य खुफिया ढांचे को मजबूत करने, "सिद्धांत" (डॉक्ट्रिन) और "रणनीति" (टैक्टिक्स) के क्षेत्रों में स्वदेशी रक्षा प्रणाली को और गहरा करने, आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से अत्याधुनिक रक्षा और सुरक्षा क्षमताएं विकसित करने, तथा आध्यात्मिक शक्ति और जिहाद की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया. इसके साथ ही, उन्होंने सशस्त्र बलों की आजीविका संबंधी जरूरतों को पूरा करने और उन्हें हर संभव समर्थन देने के लिए निरंतर प्रयास करने की बात कही. नेता के निर्देशों के एक अन्य हिस्से में यह कहा गया कि 'टारगेट बैंक' (लक्ष्यों की सूची) को इस तरह अपडेट किया जाना चाहिए कि अमेरिकी-ज़ायोनी दुश्मन की सभी प्रकार की भौतिक और गैर-भौतिक संपत्तियां सशस्त्र बलों की पहुंच में आ जाएं.
नेता ने सशस्त्र बलों के लिए राष्ट्रीय समर्थन को, शत्रुतापूर्ण विदेशियों और उनके स्थानीय भाड़े के सैनिकों के खिलाफ प्रतिरोध के मुख्य स्तंभों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि पिछले आठ महीनों से देश की जनता का सड़कों और चौराहों पर डटे रहना, आठ साल तक चले 'पवित्र रक्षा' संघर्ष का ही विस्तार है. इस जन-समर्थन ने, सेना, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और बासिज बलों की दृढ़ता के साथ मिलकर, ईरान की क्षेत्रीय अखंडता और इस्लामी व्यवस्था की रक्षा की है और आगे भी करता रहेगा.
अयातुल्ला सैयद मोजतबा हुसैनी खमेनेई ने विभिन्न देशों में 'प्रतिरोध मोर्चे' की सूझबूझ भरी दृढ़ता की सराहना की. उन्होंने कहा कि अलग-अलग मोर्चों पर एकजुटता एक निर्णायक कारक है, जिसका पश्चिमी एशिया में नई राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था को आकार देने में रणनीतिक प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह नई व्यवस्था इस्लामी राष्ट्रों और सरकारों के बीच एकता का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे एक नई इस्लामी सभ्यता के निर्माण की नींव पड़ेगी.
मीटिंग में ये लोग मौजूद रहे
ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही, ईरानी सेना के कमांडर मेजर जनरल अमीर हातामी, और इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी ने कमांडर-इन-चीफ से मुलाकात की. उन्होंने फारस की खाड़ी के तट, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान सागर के परिचालन क्षेत्रों, तथा देश की उत्तर-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी सीमाओं पर तैनात सुरक्षा बलों की तैयारियों के बारे में रिपोर्ट पेश की. उन्होंने नेता को यह भी जानकारी दी कि विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद, निगरानी उपकरणों, सहायक हथियारों और युद्धक हथियारों के उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई है.
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