- दिल्ली में आयोजित 12वें BRICS संसदीय फोरम में ईरान के सांसद डॉ. हद्दादी ने मीनाब के बच्चों को श्रद्धांजलि दी
- डॉ. हद्दादी ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन और निर्दोष नागरिकों की मौत पर वैश्विक एकजुटता पर जोर दिया
- NDTV वर्ल्ड समिट में भी ईरानी राजनयिक ने मीनाब हमले में बच्चों की मौत का मुद्दा उठाया था
दिल्ली में आयोजित हो रहे दो दिवसीय 12वें BRICS संसदीय फोरम ने सबका ध्यान खींच लिया है. समिट में आए ईरान के सांसद और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के प्रतिनिधि डॉ. हद्दादी ने अपने संबोधन के दौरान मीनाब के मारे गए बच्चों की याद में मंच पर एक स्कूल बैग रखकर श्रद्धांजलि दी. उनका यह भावनात्मक और प्रतीकात्मक कदम फोरम के सबसे चर्चित क्षणों में शामिल रहा.
12वें BRICS संसदीय फोरम में ईरान के सांसद और प्रतिनिधि डॉ. हद्दादी ने अपने संबोधन के दौरान मंच पर एक स्कूल बैग रखकर मीनाब के बच्चों को श्रद्धांजलि दी. इस भावुक और प्रतीकात्मक कदम के जरिए उन्होंने उन मासूम बच्चों की याद को दुनिया के सामने रखा, जिनकी मौत को लेकर ईरान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाता रहा है.
अपने भाषण में डॉ. हद्दादी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के उल्लंघन और निर्दोष नागरिकों की मौत के मामलों में वैश्विक समुदाय को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने मानवता के खिलाफ अपराधों पर "स्पष्ट और दृढ़ रुख" अपनाने की अपील की.
विमान में दिखाई गई थी बच्चों की तस्वीरें, खून से सने स्कूल बैग
मीनाब त्रासदी को लेकर ईरान पहले भी प्रतीकात्मक तरीके से दुनिया का ध्यान आकर्षित करता रहा है. पाकिस्तान जा रहे ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने एक उड़ान के दौरान पत्रकारों और यात्रियों को मीनाब के बच्चों की तस्वीरें, खून से सने स्कूल बैग और बच्चों के जूते दिखाए थे.

ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि इन वस्तुओं का उद्देश्य दुनिया को यह याद दिलाना था कि संघर्षों और सैन्य हमलों की सबसे बड़ी कीमत निर्दोष बच्चे चुकाते हैं. उड़ान में मौजूद प्रतिनिधियों ने कथित पीड़ित बच्चों की तस्वीरें अपने साथ रखी थीं और उनके बारे में जानकारी साझा की थी.
NDTV World Summit में डॉ. इलाही ने उठाया था मुद्दा
मीनाब की घटना का मुद्दा हाल ही में NDTV World Summit में भी उठा था. ईरानी राजनयिक डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अपने संबोधन में कहा था कि मीनाब के प्राथमिक विद्यालय पर हुए हमले में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे.
डॉ. इलाही ने दावा किया था कि इस घटना के लिए जिम्मेदार अमेरिका ने कभी औपचारिक रूप से माफी नहीं मांगी. उन्होंने कहा था कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया, उनका दर्द आज भी जीवित है और वे अब भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र में भी उठा चुके हैं ईरानी राष्ट्रपति
मीनाब का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र महासभा तक भी पहुंच चुका है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा था कि "ईरानी लोग स्वयं आतंकवाद के शिकार रहे हैं."

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मीनाब प्राथमिक विद्यालय के पीड़ितों की तस्वीरें दिखाईं और अमेरिका पर युद्ध शुरू करने तथा विश्वविद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों को निशाना बनाने का आरोप लगाया. पेज़ेश्कियन ने कहा था कि ईरान ने कभी युद्ध शुरू नहीं किया और हमेशा बातचीत का रास्ता अपनाया है. उन्होंने कहा, "ईरान कभी आक्रामक नहीं रहा, उसने कभी युद्ध शुरू नहीं किया और हमेशा बातचीत की मेज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है."
BRICS मंच से वैश्विक समुदाय को संदेश
BRICS संसदीय फोरम में डॉ. हद्दादी द्वारा मंच पर रखा गया स्कूल बैग केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और मानवीय संदेश भी था. उनके अनुसार, बच्चों और अन्य नागरिकों की मौत को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जवाबदेही तय करने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.

मीनाब के बच्चों का मुद्दा उठाकर ईरान ने एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश की कि युद्ध और संघर्षों के मानवीय प्रभाव को वैश्विक विमर्श के केंद्र में रखा जाना चाहिए.
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