- ईरान को युद्ध की तबाही से पूरी तरह उबरने और दोबारा खड़ा होने में 10 से 15 साल का समय लगेगा.
- रिकंस्ट्रक्शन के लिए तैयार अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक ड्राफ्ट के अनुसार करीब 300 अरब डॉलर खर्च होंगे.
- विदेशी हवाई हमलों में ईरान की मुख्य तेल रिफाइनरियां, बिजलीघर और बुनियादी नागरिक सुविधाएं तबाह हो गईं.
US Iran War Cost: 107 दिनों तक चले भयंकर महायुद्ध के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता (US Iran Deal) होने जा रहा है. युद्ध की आग तो अब शांत हो गई है, लेकिन ईरान पूरी तरह तबाह हो चुका है. अब इस देश को मलबे से निकालकर दोबारा खड़ा करने की एक बहुत बड़ी चुनौती दुनिया के सामने है.
ईरान में क्या-क्या तबाह हुआ है?
ईरानी सरकार की प्रवक्ता फातेमा मोहाजेरानी (Fatemeh Mohajerani) ने रूसी समाचार एजेंसी RIA नोवोस्ती को दिए इंटरव्यू में बताया है कि इस युद्ध में उनके देश का बुनियादी ढांचा (Infrastructure) पूरी तरह नष्ट हो गया है. इस हवाई बमबारी में ईरान की कमाई का मुख्य जरिया माने जाने वाले तेल और गैस रिफाइनरी पूरी तरह जलकर खाक हो गए हैं.
इसके अलावा देश के मुख्य पुल, समुद्री बंदरगाह और रेलवे नेटवर्क भी सीधे हमलों का शिकार हुए हैं. लोगों तक सुविधा पहुंचाने वाले बिजली और पानी साफ करने वाले बड़े प्लांट भी अब सिर्फ मलबे का ढेर बनकर रह गए हैं. इस युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ा है. भारी संख्या में अस्पताल, स्कूल, यूनिवर्सिटी और आम नागरिकों के घर पूरी तरह से जमींदोज हो गए हैं.
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'ईरान को दोबारा खड़ा होने में लगेंगे 15 साल'
इस भयंकर तबाही के बाद ईरान को दोबारा पैरों पर खड़ा करना बिल्कुल भी आसान नहीं होगा. वॉल स्ट्रीट जर्नल के एनालिस्ट का मानना है कि देश को युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस लाने में कम से कम 10 से 15 साल का लंबा वक्त लगेगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि 17 हजार से ज्यादा ठिकानों पर बमबारी हुई है जिसका मलबा साफ करना ही एक बड़ा काम है. इसके साथ ही ईरान पर लगे कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और विदेशी निवेश की भारी कमी ने इस काम को और भी ज्यादा मुश्किल बना दिया है.
रिकंस्ट्रक्शन पर आएगा 25 लाख करोड़ रुपये का खर्च
ईरानी सरकार के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से लेकर अब तक उन्हें करीब 270 अरब डॉलर यानी लगभग 22.5 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो चुका है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हो रहे शांति समझौते में एक 'पुनर्निर्माण और निवेश फंड' भी बनाया गया है. इस अंतरराष्ट्रीय फंड के तहत ईरान को दोबारा बसाने के लिए 300 अरब डॉलर (यानी करीब 25.05 लाख करोड़ रुपये) का खाका तैयार किया गया है, ताकि वहां के लोग फिर से अपनी जिंदगी शुरू कर सकें और अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सके.
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अमेरिका का क्या है हाल? हथियारों की कमी से इनकार
एक तरफ ईरान में भारी तबाही हुई है, तो दूसरी तरफ अमेरिका में भी हथियारों की कमी को लेकर चर्चा गर्म है. हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि हथियारों की कमी की बात सिर्फ मीडिया की बनाई हुई एक कहानी है. अमेरिका के पास हथियारों का शानदार स्टॉक है और वे अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी से इनका निर्माण कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि बाइडन प्रशासन ने यूक्रेन को भारी मात्रा में हथियार दिए थे, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने समय रहते हमारे हथियारों के स्टॉक को रीयल-टाइम में दोबारा पूरी तरह भर दिया है.
जंग से अमेरिका को कितना नुकसान हुआ?
पेंटागन के अनुसार, अमेरिका को इस युद्ध में लगभग 29 अरब डॉलर का खर्च आया है. यह शांति समझौता लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को रोक देगा और दुनिया के लिए बेहद अहम माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' व्यापारिक मार्ग को फिर से खोल देगा. अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इतनी भयंकर तबाही और मलबे के इस ढेर से खुद को कैसे बाहर निकालता है और इसमें अमेरिका उसकी कितनी मदद करता है.
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