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अमेरिका और ईरान समझौता करेंगे तो इजरायल क्या करेगा, क्या हैं आशंकाएं

डॉ नीरज कुमार
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    जून 15, 2026 18:19 pm IST
    • Published On जून 15, 2026 18:19 pm IST
    • Last Updated On जून 15, 2026 18:19 pm IST
अमेरिका और ईरान समझौता करेंगे तो इजरायल क्या करेगा, क्या हैं आशंकाएं

अमेरिका और ईरान ने कहा है कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) को फिर से खोलने के लिए एक अंतरिम समझौते पर पहुंच गए हैं. इससे उस युद्ध पर रोक लग गई है जिसमें हजारों लोग मारे गए थे. इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर 60 दिनों की बातचीत का रास्ता साफ हो गया है.

दोनों देशों के अधिकारी इस समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर करने के लिए 19 जून को स्विट्जरलैंड में मिलेंगे. इस फैसले से संकेत मिलता है कि समझौते के कुछ पहलू अभी भी अनसुलझे हो सकते हैं. दरअसल अभी तक किसी भी पक्ष ने समझौते का कोई लिखित पाठ जारी नहीं किया है. इससे बातचीत के अगले चरण के लिए सबसे बड़े विवादित मुद्दे अभी बाकी रह गए हैं. लेकिन ट्रंप ने शनिवार को वादा किया था कि रविवार को (अपने 80वें जन्मदिन) एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. उन्होंने इसे आगे बढ़ाने के लिए काफी दबाव डाला था. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा,"यह महान समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगा." उन्होंने कहा कि देरी सुरंगें (माइन्स) हटाने के उद्देश्य से थी और जैसे ही समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, यह जलडमरूमध्य खोल दिया जाएगा. यह समझौता युद्धविराम को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ाएगा.

होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलेगा और परमाणु वार्ता शुरू होगी. यह वैश्विक ऊर्जा संकट को कम करने की दिशा में पहला कदम है, जो युद्ध को खत्म करने की नींव रख सकता है. यह समझौता ज्ञापन (MoU) क्षेत्रीय मध्यस्थों द्वारा एक सप्ताह की आपाधापी भरी राजनयिक गतिविधियों के बाद आया है. यह मध्यस्थता उन झड़पों के बीच हुई, जिन्होंने दोनों प्रतिद्वंद्वियों को फिर से पूर्ण पैमाने पर संघर्ष में झोंकने की धमकी दी थी.

अमेरिका-ईरान समझौते में विरोधाभास क्या है

ट्रंप इस समझौते का जश्न मना रहे थे, लेकिन उन्होंने रविवार को 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि अगर ईरान के साथ परमाणु समझौते पर कोई अंतिम बात नहीं बनती है, तो वह तेहरान पर सैन्य हमले फिर से शुरू कर सकते हैं. उनकी इस घोषणा के कुछ ही मिनटों बाद दोनों पक्ष इस समझौते को अलग-अलग रूप में पेश कर रहे थे. इससे संकेत मिलता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े बकाया मुद्दों पर आम सहमति बनाना कितना कठिन रहा होगा. ईरान ने कहा कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को ईरान और ओमान द्वारा नियंत्रित किया जाएगा. इससे पता चलता है कि ईरान इस जलमार्ग पर कुछ नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश करेगा. ईरान ने कहा है कि 60 दिनों की बातचीत के दौरान वह सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों और अपने खिलाफ लाए गए प्रस्तावों को हटाने की मांग करेगा. ऐसे किसी भी कदम के लिए ट्रंप को अमेरिकी कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी, जिसने सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए थे. इससे अमेरिका में ईरान विरोधी नेताओं (हॉक्स) के बीच भारी आक्रोश पैदा होने की संभावना है. उन्हें इस बात की चिंता है कि ट्रंप अमेरिका का दबदबा छोड़ देंगे. यह भी स्पष्ट नहीं है कि ईरान को क्या वित्तीय प्रोत्साहन मिलेंगे.

पत्रकारों से बात करने वाले एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने शुक्रवार को कहा था कि दोनों पक्ष एक ऐसे समझौते के करीब पहुंच रहे हैं, जहां ईरान को हर बार अमेरिकी मांगों को पूरा करने पर आर्थिक पुरस्कार मिलेगा. इसमें एक तत्व यह भी हो सकता है कि ईरान को उस अमेरिकी और इजरायली बमबारी अभियान से उबरने में मदद मिले जिसने देश भर में हजारों ठिकानों को निशाना बनाया था. अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर गहरा अविश्वास बनाए हुए हैं. किसी व्यापक समझौते तक पहुंचने की उनकी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. इसमें एक बात अभी भी स्पष्ट नहीं है, वह है इजरायल का रुख. जहां इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने लेबनान पर नए हमलों के साथ आखिरी मिनट में समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीदों को खतरे में डाल दिया था. ट्रंप को देश के भीतर ईरान विरोधी गुटों से गंभीर प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है, जो चिंतित हैं कि वह केवल उन मुद्दों को टाल रहे हैं जैसे ईरान की परमाणु क्षमता और उसका बैलिस्टिक-मिसाइल कार्यक्रम, जो उनके युद्ध शुरू करने के मुख्य कारण थे. लेकिन ईरान ने विदेशी बैंक खातों में जमा अरबों डॉलर की राशि तक पहुंच और प्रतिबंधों से दीर्घकालिक राहत की भी मांग की है. ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली सहित कई यूरोपीय देशों ने रविवार को कहा कि यदि समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो वे प्रासंगिक प्रतिबंधों को हटाने के लिए तैयार हैं.

इस समझौते का क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा 

यह समझौता पूरे क्षेत्र में शत्रुता को रोकने का आह्वान करता है, इसमें इजरायल और हिज्बुल्लाह (ईरान समर्थित लेबनानी चरमपंथी आंदोलन) के बीच का संघर्ष भी शामिल है. वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, " मूल रूप से, हमें पूरा भरोसा है कि इजरायली, खाड़ी के साझेदार, अमेरिकी और ईरानी, सभी इसके पीछे खड़े होने जा रहे हैं. हम इसे लागू करने योग्य और टिकाऊ बना सकते हैं." लेकिन उन्होंने कहा कि यह भी ईरान की कार्रवाइयों पर निर्भर है. वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा,'' इसका मतलब यह नहीं है कि वे आत्मरक्षा का अधिकार छोड़ देंगे, और यदि ईरानियों ने अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान नहीं किया, तो मैं इजरायल से यह उम्मीद नहीं करुंगा कि वह जवाब न दे.'' 

इजरायल इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर रहा है, भले ही प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इसके लागू होने से पहले ट्रंप से बार-बार बात की है. रविवार को बेरूत के दक्षिणी उपनगरों, जो कि हिज्बुल्लाह का गढ़ हैं पर एक नए इजरायली हमले ने इस समझौते को पटरी से उतारने की आशंकाओं को उजागर कर दिया है. मध्य पूर्व और यूरोप के नेताओं ने इस समझौते की सराहना की है. कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जासिम अल थानी ने पाकिस्तान के साथ मिलकर इस समझौते में मध्यस्थता की थी. उन्होंने इस घोषणा को बड़ी सफलता बताया है. उन्होंने पाकिस्तान को धन्यवाद दिया और आगे 'सकारात्मक और रचनात्मक' वार्ताओं का आग्रह किया. ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के यूरोपीय नेताओं ने भी इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे जल्द से जल्द लागू करने का आह्वान किया. उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलने की मांग की और लेबनान की संप्रभुता तथा स्थिरता के लिए अपना समर्थन दोहराया. फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो में बोलते हुए (जब G7 नेता एवियन में मिलने की तैयारी कर रहे हैं) कहा कि बातचीत होर्मुज को दीर्घकालिक रूप से फिर से खोलने और इस समझौते द्वारा बनाए गए व्यापक राजनयिक अवसर पर केंद्रित होगी. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस समझौते को एक "महत्वपूर्ण कदम" बताया, और उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दल इस गति को बनाए रखेंगे और "संघर्ष के अंतिम समाधान की ओर अपने प्रयासों को दोगुना करेंगे."

समझौते से ईरान को क्या हासिल होगा

इस समझौते के तहत ईरान इस बात की पुष्टि करेगा कि वह परमाणु हथियार हासिल या विकसित नहीं करेगा. इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने बताया कि दोनों पक्ष ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार के निपटान के लिए एक तंत्र पर सहमत होने के लिए परमाणु वार्ता करेंगे.उस व्यक्ति ने कहा कि न्यूनतम प्रतिबद्धता यह है कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में सभी समृद्ध यूरेनियम को उसी स्थान पर डाउन-ब्लेंड (इसकी क्षमता कम) किया जाए. यह यूरेनियम ज्यादातर निचले स्तर पर समृद्ध है, लेकिन 440 किलोग्राम का एक भंडार हथियारों के निर्माण के स्तर के करीब है. अमेरिका ईरान को 60 दिनों के युद्धविराम विस्तार के दौरान तेल बेचने के लिए छूट देगा. लेकिन प्रतिबंधों में राहत, जिसमें विदेशों में जमा ईरान की संपत्तियों को अनफ्रीज करना शामिल है, चरणबद्ध होगी और परमाणु वार्ता व अंतिम समझौते की प्रगति पर निर्भर करेगी. 

(डिस्क्लेमर: डॉ नीरज कुमार बिहार के वैशाली स्थित डॉक्टर सीवी रमन विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान पढ़ाते हैं. लेख में व्यक्त किए गए विचार उनके निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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