पश्चिम एशिया (Middle East) में पिछले चार महीनों से चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते (US-Iran Peace Deal) पर सहमति बन गई है. इसका सीधा असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला. वैश्विक बाजारों में आई तेजी के दम पर भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 भारी बढ़त के साथ खुले. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समझौते और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के दोबारा खुलने से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें काफी नीचे आएंगी. एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि ये भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए लॉन्ग-टर्म में संजीवनी का काम करेगा.
एसोचैम (ASSOCHAM) के प्रेसिडेंट निर्मल के मिंडा ने NDTV को बताया कि ये शांति समझौता, पूरी दुनिया के हित के लिए अमेरिका और ईरान के बीच एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण ब्रेकथ्रू है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के फिर से पटरी पर लौटने और अनुमानित GDP ग्रोथ रेट को हासिल करने की उम्मीद है. उन्होंने कहा, 'भारत, जिसने पश्चिम एशिया युद्ध के प्रभावों को काफी हद तक कम (मैनेज) किया है, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अपनी ट्रेंड ग्रोथ रेट हासिल करने के लिए मजबूती से वापसी कर सकता है.
किन सेक्टर्स में आ सकती है तेजी?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, शेयर बाजार में एनर्जी, एविएशन, इंफ्रा, रियल एस्टेट समेत कई सेक्टर्स को फायदा मिलता दिख सकता है. जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जश पंचमिया का कहना है कि ये समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि इससे महंगाई का दबाव कम होने और मार्केट सेंटीमेंट में सुधार होने की उम्मीद है. देश को एनर्जी और कमोडिटी की कीमतों में स्थिरता से सीधा फायदा होगा. ये आर्थिक विकास को गति दे सकता है और उपभोक्ता विश्वास मजबूत कर सकता है.
उन्होंने कहा, 'हाउसिंग (Real Estate) सेक्टर में भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है, जहां बेहतर अफोर्डेबिलिटी और अधिक स्थिर आर्थिक माहौल घर खरीदारों और निवेशकों दोनों को प्रोत्साहित करेगा. हमें उम्मीद है कि इस घटनाक्रम से संभावित घर खरीदारों, विशेषकर जो अभी फैसला नहीं ले पा रहे थे (फेंस-सिटर्स), का भरोसा बढ़ेगा, जिससे वे आने वाले महीनों में अधिक निश्चितता और दृढ़ विश्वास के साथ खरीदारी का निर्णय ले सकेंगे.
सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) और एविएशन सेक्टर
शांति समझौते की खबर आते ही कच्चे तेल की कीमतें 5% से ज्यादा गिर गईं. क्रूड ऑयल सस्ता होने का सबसे सीधा फायदा देश की सरकारी तेल कंपनियों HPCL, BPCL और IOC को मिलेगा. कच्चे तेल के दाम घटने से इनका इनपुट कॉस्ट (लागत) कम होगा और रिफाइनिंग मार्जिन सुधरेगा. सोमवार को ऐसा दिखा भी. एक समय तो HPCL का शेयर करीब 3.84% उछलकर 403 के पार पहुंच गया, जबकि IOC और BPCL में भी 3% तक की तेजी रही.
इसके अलावा, कच्चे तेल के टूटने से हवाई ईंधन (ATF) सस्ता होगा. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण एयरलाइंस कंपनियों के रूट प्रभावित हुए थे और लागत बढ़ गई थी. इस समझौते से IndiGo (इंटरग्लोब एविएशन) जैसी कंपनियों को बड़ी राहत मिली है और इसका शेयर भी 4% तक चढ़ गया.
इंफ्रास्ट्रक्चर की दिग्गज कंपनियों को फायदा
देश की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का करीब 37% ऑर्डर बुक मिडिल ईस्ट से आता है. युद्ध के कारण कंपनी को पिछले कुछ महीनों में काफी अनिश्चितता का सामना करना पड़ा था. शांति की खबर से सोमवार को एलएंडटी के शेयर 3.33% चढ़ गए. इसी तरह, केईसी इंटरनेशनल (KEC International), जिसका 20% ऑर्डर बुक इसी क्षेत्र से जुड़ा है, का शेयर भी 3% से ज्यादा उछल गया. कंपनी को उम्मीद है कि तनाव खत्म होने से वित्त वर्ष 2027 में उनकी रेवेन्यू ग्रोथ 10-15% रहेगी.
पेंट, टायर, पोर्ट्स, चावल एक्सपोर्ट्स
पेंट और टायर बनाने वाली कंपनियों (जैसे एशियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स) के लिए कच्चा तेल और उसके डेरिवेटिव्स मुख्य कच्चे माल (रॉ मटेरियल) होते हैं. क्रूड ऑयल सस्ता होने से इन कंपनियों की इनपुट कॉस्ट घटेगी, जिससे इनके प्रॉफिट मार्जिन में जोरदार सुधार देखने को मिलेगा.
अदाणी पोर्ट्स (Adani Ports) का शेयर भी मजबूत रुख के साथ 1,825 पर ट्रेड करते दिखे. कंपनी के पास इजरायल में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'हाइफा पोर्ट' (Port of Haifa) का संचालन है, जिससे क्षेत्रीय व्यापार बढ़ने पर कंपनी को बड़ा फायदा हो सकता है.
वहीं, खाड़ी देशों को बासमती चावल निर्यात करने वाली कंपनियों में भी असर दिखा. इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के मुताबिक, भारत ने अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच ईरान को 4,049 करोड़ और सऊदी अरब को 5,217 करोड़ का बासमती चावल एक्सपोर्ट किया था. इस समझौते के बाद 'इंडिया गेट' ब्रांड बनाने वाली कंपनी KRBL का शेयर 2.41% उछलकर 375.60 पर पहुंच गया.
एसोचैम (ASSOCHAM) के प्रेसिडेंट निर्मल के मिंडा ने केंद्र सरकार और RBI के प्रभावी नीतिगत कदमों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई है कि भारत वित्त वर्ष 2026-27 में 7% की विकास दर (ग्रोथ रेट) दर्ज कर सकता है.
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