- ईरान-इजरायल युद्ध के कारण ईरान में काली बारिश और सन्नाटे के बीच लोग अपने घरों में कैद हैं और भयभीत हैं
- मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं में भारी खराबी के कारण ईरानी नागरिक अपने परिवार से संपर्क करने में असमर्थ हैं
- अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग पर प्रतिबंध के चलते कुछ मिनटों की कॉल की कीमत लगभग तीन हजार रुपये तक पहुंच गई है
ईरान-इजरायल युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. यह युद्ध अब महज बम-धमाकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जंग ने इंसानी रिश्तों और संवाद की डोर भी काट दी है. ईरान में एक तरफ 'काली बारिश' का खौफ बरस रहा है, गलियों में सन्नाटा है और लोगों के कानों में सिर्फ धमाकों की आवाजें गूंज रही हैं. ऐसे में लोग अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं. हालात इतने खराब हैं कि ईरान में मोबाइल नेटवर्क सेवाएं भी काफी हद तक खराब हैं. इंटरनेट और इंटरनेशनल कॉल पर लगे कड़े प्रतिबंधों ने लोगों को अपनों से मीलों दूर कर दिया है. आलम यह है कि ईरान की सरहदों के भीतर आज एक 'हेलो' की कीमत किसी की पूरी दिहाड़ी से भी ज्यादा हो चुकी है. ईरान में चंद मिनटों की कॉल के लिए 3000 रुपये तक की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है.
एक कॉल की कीमत 3000 रुपये तक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेश में रह रहे ईरानी नागरिक अपने परिवार से बात करने के लिए छटपटा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग पर बैन है, नेटवर्क काम नहीं कर रहा. महज कुछ मिनट की बात के लिए लोगों को 28 पाउंड यानी करीब 3000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं. वहीं इंटरनेट की दाम भी आसमान छू रहे हैं. तमाम प्रतिबंधों के बीच ईरान में 1GB इंटरनेट करीब 20 डॉलर यानी 1600 रुपये तक में मिल पा रहा है. लोग VPN का सहारा ले रहे हैं, लेकिन इसकी भी कीमत काफी बढ़ गई है. कमजोर कनेक्शन और बार-बार टूटते नेटवर्क के कारण, लोग डेटा तो खरीद लेते हैं, लेकिन अपनों की एक धुंधली सी तस्वीर देखने से पहले ही वह खत्म हो जाता है.
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सरहदों पर 'जुगाड़' का नेटवर्क
ईरान और तुर्किये की सीमाओं पर इन दिनों एक अजीब सा जुगाड़ू टेलीफोन एक्सचेंज चल रहा है. यहां कोई टावर नहीं, बल्कि एक शख्स के हाथों में थमे दो मोबाइल फोन ही हजारों परिवारों के बीच बातचीत का सहारा बने हुए हैं. एक फोन ईरान के नेटवर्क से जुड़ा है, तो दूसरा तुर्किये के. जहां विदेश में बैठा बेटा तुर्किये वाले नंबर पर व्हाट्सएप कॉल करता है और सीमा पर खड़ा वह शख्स उसे ईरानी नंबर से जोड़ देता है. हालांकि, इस डिजिटल जुगाड़ की कीमत और अनिश्चितता इतनी ज्यादा है कि कुछ मिनटों की बात के लिए 3000 रुपये तक खर्च हो जाते हैं.
युद्ध का 21वां दिन, शांति की नहीं दिख रही उम्मीद
ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी इस भीषण जंग को आज 21 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन शांति की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही. पिछले तीन हफ्तों से आसमान से बरसते मिसाइलों और ड्रोन्स ने तेहरान से लेकर इस्फहान तक की जमीन को छलनी कर दिया है. इन 21 दिनों में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में मासूम बच्चे और महिलाएं शामिल हैं. तेल डिपो और बिजली घरों पर हुए लगातार हमलों ने पूरे देश को अंधेरे और 'काली बारिश' (प्रदूषण) के साये में धकेल दिया है.
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