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ईरान का पूर्व राष्ट्रपति ही बना मोसाद का सीक्रेट एजेंट, तख्तापलट की थी तैयारी; अमेरिकी अखबार का बड़ा दावा

ईरान के पूर्व राष्ट्रपति ने इजरायल के साथ मिलकर तख्तापलट की प्लानिंग की. खुफिया एजेंसी मोसाद ने उनसे कई बार मिलने की योजना बनाई जो कि सफल भी हुई. पूर्व ईरानी राष्ट्रपति ने बॉडीगार्ड को चकमा देकर मीटिंग भी की.

ईरान का पूर्व राष्ट्रपति ही बना मोसाद का सीक्रेट एजेंट, तख्तापलट की थी तैयारी; अमेरिकी अखबार का बड़ा दावा
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद सोमवार को उनके जनाजे में अहमदीनेजाद को महीनों बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से देखा गया.
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इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान में तख्तापलट के लिए ऐसा जाल बुना जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है.  अमेरिकी अखबार 'द न्यू यॉर्क टाइम्स' ने अपनी एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया है कि मोसाद ने ईरान में तख्तापलट करने के लिए ईरान के धुर कट्टरपंथी और अपने सबसे बड़े दुश्मनों में से एक रहे पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को ही मोहरा बनाकर उन्हें ईरान का नया नेता बनाना चाहता था हालांकि, यह बेहद गुप्त और बड़ा ऑपरेशन पूरी तरह फेल हो गया है. 

अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के हवाले से छपी इस रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने अहमदीनेजाद को अपने पाले में लाने के लिए सालों तक मेहनत की थी लेकिन हाल ही में दोनों देशों के बीच छिड़ी जंग के दौरान यह योजना पटरी से उतर गई. फिलहाल अहमदीनेजाद ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) की खुफिया शाखा की हिरासत में हैं और उन्हें नजरबंद कर दिया गया है. 

यूनिवर्सिटी बनी गुप्त मुलाकातों का अड्डा

इस पूरे खुफिया खेल की शुरुआत साल 2024 की शुरुआत में हुई थी. हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में स्थित 'लुडोविका यूनिवर्सिटी ऑफ पब्लिक सर्विस' के रेक्टर प्रोफेसर गेरगेली डेली को सरकार के एक शीर्ष अधिकारी से एक अजीब अनुरोध मिला.

अधिकारी ने कहा कि यूनिवर्सिटी में जलवायु परिवर्तन पर एक कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाए और उसमें ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को बुलाया जाए.

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हैरान करने वाली बात यह थी कि यह कॉन्फ्रेंस सिर्फ एक दिखावा थी. असली मकसद यह था कि अहमदीनेजाद वहां आकर इजरायली खुफिया एजेंटों के साथ गुप्त बैठकें कर सकें. 

यूनिवर्सिटी के रेक्टर डेली को पता था कि इस आमंत्रण से उनकी और यूनिवर्सिटी की साख खराब हो सकती है, लेकिन उन्हें लगा कि वह दो कट्टर दुश्मनों को बात कराने का मौका देकर शायद लोगों की जान बचाने का काम कर रहे हैं. रेक्टर ने बाद में खुद माना कि उन्हें इस खेल में एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया था.

रईसी की अचानक मौत के बाद ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद सत्ता में वापसी करना चाहते थे.

रईसी की अचानक मौत के बाद ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद सत्ता में वापसी करना चाहते थे.

मोसाद चीफ खुद पहुंचे थे मिलने

यह ऑपरेशन इजरायल के लिए कितना जरूरी था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मोसाद के तत्कालीन प्रमुख डेविड बार्निया खुद साल 2024 में अहमदीनेजाद से मिलने बुडापेस्ट पहुंचे थे. इस मुलाकात के तुरंत बाद मोसाद ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) को भी जानकारी दी थी कि वे अहमदीनेजाद के संपर्क में हैं.

इतना ही नहीं, इजरायल ने अहमदीनेजाद के रहने और विदेश यात्राओं के खर्च के लिए उन्हें गुप्त तौर से पैसे भी दिए थे. इसके बाद जून 2025 में अहमदीनेजाद दोबारा बुडापेस्ट गए. वहां वह अपने ईरानी बॉडीगार्ड्स को चकमा देकर दो बार गायब हुए और इजरायली एजेंटों के साथ लंबी बैठकें कीं.

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कट्टरपंथी से 'उदारवादी' बनने का ढोंग

महमूद अहमदीनेजाद साल 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे थे. अपने कार्यकाल में वह इजरायल को दुनिया के नक्शे से मिटाने की धमकी देने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तेज करने और 'होलोकॉस्ट' को झूठा बताने के लिए जाने जाते थे.

लेकिन राष्ट्रपति पद से हटने के बाद उनका रुख अचानक बदलने लगा. उन्होंने खाकी विंडब्रेकर छोड़कर महंगे सूट पहनने शुरू कर दिए, अंग्रेजी सीखी और खुद को एक उदारवादी नेता के तौर पर पेश करने लगे. वह जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनने लगे.

अहमदीनेजाद ने कई बार सत्ता में वापस लौटने की कोशिश की है.

अहमदीनेजाद ने कई बार सत्ता में वापस लौटने की कोशिश की है.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदीनेजाद सत्ता के भूखे थे. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और वहां के सिस्टम ने उन्हें तीन बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया था, जिससे वह बेहद नाराज थे.

वह मान चुके थे कि इस सिस्टम के रहते वह कभी दोबारा सत्ता में नहीं आ सकते है. इसलिए उन्होंने विदेशी ताकतों यानी इजरायल और अमेरिका की मदद से ईरान का बॉस बनने का सपना देखना शुरू कर दिया. उन्होंने अपने करीबियों से कहा था कि अगर वह सत्ता में आए, तो वह इजरायल को मान्यता दे देंगे और संबंध सामान्य कर लेंगे. 

जंग के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन

यह पूरी योजना इस साल (2026) फरवरी के अंत में अपने चरम पर थी, जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ. अहमदीनेजाद तेहरान में ईरानी खुफिया एजेंसियों की सख्त निगरानी में रह रहे थे. 28 फरवरी को इजरायल ने अहमदीनेजाद के ठिकाने पर एक बड़ा हवाई हमला किया. इस हमले का मकसद ईरान के सुरक्षाकर्मियों को उलझाकर अहमदीनेजाद को वहां से निकालना था.

हमले के तुरंत बाद मचे हड़कंप के बीच एक काली प्यूजो कार वहां पहुंची कार में मोसाद के एजेंट सवार थे, जो अहमदीनेजाद को सुरक्षित निकालकर ईरान में ही एक गुप्त सेफ हाउस में ले गए. लेकिन इस अफरातफरी और हमले से अहमदीनेजाद घबरा गए और इजरायल के प्लान को लेकर उनका मोहभंग हो गया. वह उस सेफ हाउस से कैसे और किन हालातों में निकले, यह अभी साफ नहीं है लेकिन इसके बाद वह अचानक गायब हो गए. 

अब जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे अहमदीनेजाद

पिछले दिनों ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद सोमवार को उनके जनाजे में अहमदीनेजाद को महीनों बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से देखा गया. झुलसाने वाली गर्मी में वह भारी जैकेट और चेहरे पर सर्जिकल मास्क लगाए बेहद गुमसुम खड़े थे और उनके चारों तरफ सुरक्षा घेरा था. ईरान के दो अन्य पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी और मोहम्मद खातमी को तो इस जनाजे में बुलाया भी नहीं गया था.

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इजरायली हमले के बाद ईरान की खुफिया एजेंसियों ने कड़ियां जोड़ीं और अहमदीनेजाद के इजरायल के साथ संबंधों का भंडाफोड़ कर दिया. फिलहाल वह आईआरजीसी की खुफिया विंग की हिरासत में हैं और देशद्रोह के आरोपों के तहत नजरबंद हैं.

यह भी पढ़ें: ब्रिटेन ने ईरान की सेना IRGC को आतंकवादी संगठन किया घोषित, क्या-क्या हो जाएगा बैन?

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