- ईरान के साथ नई बातचीत सोमवार से शुरू होगी, ताकि युद्ध खत्म करने के लिए समझौते की कोशिश की जा सके- ट्रंप
- ट्रंप ने रविवार को पत्रकारों से कहा कि बातचीत में होर्मुज (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) का मुद्दा शामिल होगा
- ईरान ने अभी भी सार्वजनिक तौर पर इस बैठक की बात को नहीं कबूला है
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ नई बातचीत सोमवार से शुरू होगी. उनका दावा है कि उन्होंने ईरान पर हमला करने की योजना फिलहाल टाल दी है, ताकि युद्ध खत्म करने के लिए समझौते की कोशिश की जा सके. ईरान ने अभी भी सार्वजनिक तौर पर इस बैठक की बात को नहीं कबूला है. यह युद्ध अब छठे महीने में पहुंच चुका है और पूरी दुनिया पर असर डाल रहा है. ट्रंप ने रविवार को पत्रकारों से कहा कि बातचीत में होर्मुज (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) का मुद्दा शामिल होगा. यह दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जो इस संघर्ष में बड़ा विवाद का कारण बन गया है. उन्होंने कहा कि बातचीत का अंतिम लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना है.
दूसरी तरफ, ईरान ने कहा कि वह ओमान के साथ होर्मुज से गुजरने वाले एक नए रास्ते पर समझौते के करीब पहुंच गया है. रविवार को इस इलाके के पास एक तेल टैंकर में विस्फोट की खबर भी सामने आई, जिससे यह साफ हो गया कि यह रणनीतिक समुद्री मार्ग अभी भी बेहद अस्थिर बना हुआ है. ट्रंप द्वारा नई बातचीत की घोषणा के बाद सोमवार को एशियाई बाजार खुलते ही तेल की कीमतों में गिरावट आ गई. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत 4.7 प्रतिशत गिरकर 80.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई.
धमकी उम्मीद और धमकी... इस बार क्या कुछ बदलेगा?
अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से युद्ध चल रहा है. उसी दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अचानक हमला किया था. हालांकि, पिछले कई महीनों में रुक-रुक कर चली कूटनीतिक बातचीत के कारण कुछ समय के लिए तनाव कम भी हुआ था. पिछले महीने फिर से हमले शुरू होने के बाद यह डर बढ़ गया था कि लड़ाई एक बार फिर तेज हो सकती है. ट्रंप ने ईरान पर "बहुत बड़ा हमला" करने की धमकी दी थी. खबरें थीं कि वह ईरान के ऊर्जा ढांचे पर भी नए हमलों पर विचार कर रहे हैं. इस बीच, पूरे क्षेत्र में अमेरिकी दूतावासों को अलर्ट पर रखा गया था.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के अलावा अमेरिका के सहयोगी देश सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर ने भी उनसे हमला रोकने की अपील की थी. ट्रंप ने दावा किया कि अगर हमला होता, तो वह "द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला" होता. हालांकि, ईरानी मीडिया ने इस बात से इनकार किया कि तेहरान ने ट्रंप से हमला न करने की कोई अपील की थी.
इसके अलावा ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता और सांसद हसन गशगावी ने रविवार को कहा कि मध्यस्थ जून में हुए अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन को फिर से लागू कराने की कोशिश कर रहे हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं