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गाजा, ईरान में नेतन्याहू ने जो किया वो गलत या सही? आ रही फैसले की घड़ी

इजरायल में 27 अक्टूबर को होंगे आम चुनाव. जानिए वे कौन से 5 अहम मुद्दे हैं जो पहले से ही बैकफुट पर दिखते पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की किस्मत तय करेंगे.

गाजा, ईरान में नेतन्याहू ने जो किया वो गलत या सही? आ रही फैसले की घड़ी
Israel elections 2026: इजरायल में 27 अक्टूबर को होंगे आम चुनाव (फोटो- NDTV)
  • इजरायल में इस साल 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने जा रहा है, संसद ने इसकी घोषणा की
  • अब जनता बताएगी कि गाजा, हमास, लेबनान और ईरान के खिलाफ हुई जंग में नेतन्याहू की रणनीति सही थी या नहीं
  • 76 साल के नेतन्याहू पहले से ही देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले PM हैं और इस बार भी मैदान में होंगे

Israel elections Date Announced: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक जिंदगी के सबसे अहम चुनाव की तारीख अब सामने आ गई है. इजरायल में इस साल 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने जा रहा है. यह चुनाव सिर्फ सरकार चुनने का नहीं, बल्कि जनता का फैसला होगा कि गाजा, हमास, लेबनान और ईरान के खिलाफ हुई जंग में नेतन्याहू की रणनीति सही थी या नहीं. क्या सुरक्षा के नाम पर उन्हें फिर मौका मिलेगा, या जनता सत्ता बदल देगी? इस चुनाव में युद्ध, ईरान, हमास, सेना में भर्ती, भ्रष्टाचार के आरोप और गाजा का भविष्य सबसे बड़े मुद्दे बनने वाले हैं. 

नेतन्याहू के लिए मुश्किल होगा चुनाव

इजरायल की संसद ने घोषणा की है कि देश में आम चुनाव 27 अक्टूबर को होंगे. यह इजरायली कानून के तहत तय आखिरी तारीख है. इजरायली संसद यानी नेसेट का मौजूदा कार्यकाल 17 जुलाई को खत्म होने वाला है, जिससे सत्ताधारी गठबंधन दशकों में पहली बार अपना पूरा चार साल का कार्यकाल पूरा कर पाएगा. 76 साल के नेतन्याहू पहले से ही देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री हैं. उन्होंने कई बार (लगातार नहीं) प्रधानमंत्री के तौर पर काम किया है और फिर से चुनाव लड़ने का इरादा जाहिर किया है.

उन्होंने कहा है कि उनका इरादा चुनाव जीतने का है, जिससे उनके राजनीतिक जीवन की सबसे अहम लड़ाई की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है. हाल के दिनों में, उनकी सरकार अपने गठबंधन को मजबूत करने और मजबूत स्थिति में चुनाव में उतरने के लिए तेजी से कई बिल पास करने की कोशिश कर रही है. विपक्षी दलों तक पहुंच बनाकर, नेतन्याहू वैचारिक जुड़ाव के बजाय राष्ट्रीय एकता के आधार पर अपनी चुनावी अपील को नए सिरे से पेश करने की कोशिश करते दिख रहे हैं.

लेकिन हाल के सर्वे से पता चलता है कि ज्यादातर इजरायली उन्हें पद से हटाना चाहते हैं, और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर उभर रहे हैं.

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चुनाव में अहम मुद्दे क्या होंगे?

1- जंग में उलझा इजरायल

जेरूसलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी ने एक सर्वे किया है. इसके अनुसार 92 प्रतिशत से ज्यादा इजरायली मानते हैं कि ईरान ने मिडिल ईस्ट की जंग जीत ली है. साथ ही, मार्च की शुरुआत में प्रधानमंत्री पद के लिए नेतन्याहू का समर्थन 40.5 प्रतिशत था, जो जून में गिरकर 29.4 प्रतिशत रह गया. यानी जंग के बाद बहुत गिरावट हुई. फरवरी के आखिर में इजरायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जंग शुरू की थी, जिसे एक सीजफायर से रोक दिया गया. इस सीजफायर के बाद ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ, जिसे कई लोग इजरायल के लिए नुकसानदेह मानते हैं. (हालांकि अमेरिका और ईरान फिर से लड़ रहे हैं)

हिजबुल्लाह और ईरान के खिलाफ युद्धों ने नेतन्याहू के लिए राजनीतिक रूप से मुश्किल हालात पैदा कर दिए हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद बनने वाली सरकार इजरायल की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करेगी. नेतन्याहू के बयानों से संकेत मिलता है कि वह ईरान और लेबनान के चरमपंथी समूह हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल के सैन्य अभियान को अपने चुनावी नैरेटिव का मुख्य केंद्र बनाना चाहते हैं. वह एक कमजोर वैचारिक गठबंधन से हटकर सुरक्षा पर केंद्रित व्यापक जनादेश की ओर बढ़ना चाहते हैं.

2- सुरक्षा चूक

7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों के दौरान सुरक्षा में हुई चूक को लेकर भी इजरायली लोगों में नाराजगी है, जिसका असर नेतन्याहू की छवि पर पड़ रहा है. 

3- सेना में अनिवार्य सेवा

वोटरों की राय पर इस बात का भी असर पड़ सकता है कि क्या अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी पुरुषों के लिए सेना में भर्ती होना जरूरी होना चाहिए या नहीं. नेतन्याहू के कई बड़े सहयोगियों ने कई बार सरकार गिराने की धमकी दी थी. उनका कहना था कि अगर उनके समर्थकों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट नहीं मिली, तो वे सरकार का साथ छोड़ देंगे. दूसरी ओर, इजरायली सेना और देश के कई लोग मानते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की सेना में भर्ती जरूरी है, क्योंकि कई सालों से लगातार हो रही जंग की वजह से सेना पर बहुत ज्यादा दबाव है.

4, 5- भ्रष्टाचार और न्यायिक सुधार

चुनाव के बड़े मुद्दों में गाजा युद्ध से पहले नेतन्याहू द्वारा शुरू किए गए न्यायिक सुधार भी शामिल हैं. इसके अलावा, उन पर चल रहे भ्रष्टाचार के मामले और युद्ध खत्म होने के बाद गाजा का शासन कैसे चलेगा और वहां की व्यवस्था कौन संभालेगा, यह भी वोटरों के लिए अहम सवाल होंगे.

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