नई दिल्ली:
मुम्बई हमले के बाद से अवरुद्ध शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए भारत और पाकिस्तान आतंकवादियों और आतंकी खतरों के बारे में सूचना साझा करने के लिए हॉटलाइन शुरू करने पर सहमत हो गए। पाकिस्तान ने भारतीय जांच एजेंसियों को 26/11 के आतंकी हमलों के संदिग्धों से पूछताछ की अनुमति भी दे दी है। केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लै और उनके पाकिस्तानी समकक्ष चौधरी कमर जमां की दो दिवसीय बैठक में दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया, "दोनों देश आतंकी खतरों के संदर्भ में सही समय पर सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए भारतीय गृह सचिव एवं पाकिस्तानी आंतरिक सचिव के बीच एक हॉटलाइन शुरू करने पर राजी हो गए हैं।" पाकिस्तान ने 2008 में हुए मुम्बई हमले की जांच में भारत के साथ सहयोग करने की सहमति जताई है। वह मुम्बई हमले के उन संदिग्धों से भारतीय दल को पूछताछ की अनुमति देने के लिए भी राजी हो गया है, जिनके खिलाफ पाकिस्तान में मुकदमे चल रहे हैं और वे वहां की जेल में कैद हैं। इस रजामंदी के बाद अब भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जकीउर रहमान लखवी, अबू अल-कामा और जरार शाह सहित लश्कर-ए-तैयबा के सात सदस्यों से पूछताछ कर सकती है। इन्हीं आतंकियों ने मुम्बई हमले की साजिश रची थी। एक अधिकारी ने बताया कि जांच दल के दौरे की रूपरेखा और तारीखें बाद में तय की जाएंगी। बयान में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों की आतंकवाद विरोधी जांच एजेंसियों ने मुम्बई हमले के सम्बंध में जांच की दिशा में सहयोग जारी रखने का फैसला किया है। साथ ही आतंकवाद के सभी स्वरूपों के खिलाफ लड़ाई को लेकर प्रतिबद्धता दोहराते हुए इस तरह के अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के कटघरे में खड़ा करने की जरूरत पर सहमति जताई है। दोनों पक्षों के बीच कैदियों के आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई। बयान के अनुसार, "इस बात पर सहमति जताई गई है कि दोनों पक्ष 15 अप्रैल, 2011 को उन मछुआरों और कैदियों को रिहा कर देंगे, जिनकी सजा पूरी हो गई है और जिनकी नागरिकता की पुष्टि तथा यात्रा सम्बंधी दस्तावेज सम्बंधित देश से प्राप्त हो गए हों।" इसके अतिरिक्त बैठक में मुम्बई हमले के संदिग्धों के खिलाफ पाकिस्तान में चल रहे मुकदमे, समझौता एक्सप्रेस विस्फोट की जांच, वीजा नियमों को उदार बनाने, फर्जी भारतीय मुद्रा की तस्करी एवं नशीले पदार्थो पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। दोनों पक्ष साल में दो बार गृह सचिव स्तर की बातचीत आयोजित करने को भी सहमत हुए हैं।
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