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लौटकर आने का वादा रह गया अधूरा... न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के शख्स की मौत, उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार

पंजाब के रहने वाले रमनदीप साल 2015 में स्टूडेंट वीजा पर न्यूजीलैंड आए थे. 1.5 साल पहले उनके घर बेटी ने जन्म लिया था. उसकी देखभाल के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ ऊबर चलाना शुरू किया था.

लौटकर आने का वादा रह गया अधूरा... न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के शख्स की मौत, उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार
हादसे वाले दिन की कहानी बताते हुए उनकी पत्नी वीरपाल कौर भावुक हो गईं.
givealittle.Com Nz/X

न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के शख्स की सड़क हादसे में मौत हो गई. वह अपनी पत्नी से वादा करके गए थे कि रात के खाने तक घर लौट आएंगे, लेकिन वह वादा अधूरा ही रह गया. न्यूजीलैंड के पामामोआ में रहने वाले 36 वर्षीय रमनदीप ढिल्लों पेशे से उबर ड्राइवर थे.

बीते बुधवार की शाम करीब 7:15 बजे जब वह अपनी लेट-इवनिंग शिफ्ट पर थे, तभी ते पुके हाईवे (Te Puke Highway) पर उनकी गाड़ी की टक्कर एक दूसरे व्हीकल से हो गई. हादसा इतना भयानक था कि रमनदीप ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरी गाड़ी में सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

पंजाब से न्यूजीलैंड तक का सफर 

मूल रूप से पंजाब के रहने वाले रमनदीप साल 2015 में स्टूडेंट वीजा पर न्यूजीलैंड आए थे. सालों की कड़ी मेहनत के बाद जब जिंदगी थोड़ी पटरी पर लौटी, तो वह साल 2024 में भारत आए और वीरपाल कौर से शादी कर ली. शादी के बाद वीरपाल भी उनके साथ न्यूजीलैंड आ गईं. दोनों पामामोआ में रहकर कीवीफ्रूट बागानों में काम करने लगे.

सब कुछ अच्छा चल रहा था और करीब 18 महीने पहले उनके घर एक नन्हीं परी ने जन्म लिया, जिसका नाम उन्होंने कुदरत रखा. बेटी के जन्म के बाद रमनदीप ने अपनी नौकरी बदल ली. उन्होंने उबर चलाना शुरू किया ताकि काम के घंटों में थोड़ी ढील मिल सके और वह अपनी बेटी की परवरिश के लिए पत्नी की मदद कर सकें और परिवार के साथ वक्त बिता सकें.

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आखिरी मुलाकात और वो अधूरा वादा...

हादसे वाले दिन की कहानी बताते हुए उनकी पत्नी वीरपाल कौर भावुक हो गईं. उन्होंने बताया कि उस दिन रमनदीप ने अपनी 18 महीने की बेटी कुदरत के साथ काफी वक्त बिताया था. शाम को जब वह काम के लिए घर से निकलने लगे, तो उन्होंने वीरपाल से मुस्कुराकर कहा था कि वह रात का खाना साथ में खाएंगे और जल्दी लौट आएंगे.

वीरपाल के मुताबिक, रमनदीप जिस रास्ते पर गाड़ी चला रहे थे, वह उनके लिए बिल्कुल नया नहीं था. वह अक्सर उस हाईवे से गुजरते थे. लेकिन उस शाम जब काफी देर होने पर भी रमनदीप घर नहीं लौटे, तो वीरपाल ने उन्हें फोन करना शुरू किया. कई बार घंटी जाने के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला, तो वीरपाल की चिंता बढ़ने लगी. कुछ ही देर बाद उनके दरवाजे पर पुलिस आई और उसने वो खबर दी जिसने वीरपाल की दुनिया उजाड़ दी.

'मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई'

पति की मौत की खबर सुनते ही वीरपाल सदमे में आ गईं. उन्होंने रोते हुए कहा, "मैं बस रोती रही, रोती रही. मुझे लगा कि मेरी जिंदगी पूरी तरह बर्बाद हो गई है." 

वीरपाल ने रमनदीप को याद करते हुए बताया कि वे दोनों एक पारिवारिक पार्टी में मिले थे, जहां पहले दोस्ती हुई और फिर रमनदीप ने उन्हें प्रपोज किया. वह एक बेहद सीधे, समझदार और वफादार इंसान थे. वीरपाल कहती हैं कि जब रमनदीप को पता चला था कि वह पिता बनने वाले हैं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था.

अब हालत यह है कि डेढ़ साल की मासूम कुदरत लगातार अपने पापा को ढूंढ रही है और उनके बारे में पूछती है. वीरपाल कहती हैं कि कुदरत बिल्कुल अपने पिता जैसी दिखती है और उसकी मुस्कान भी हूबहू रमनदीप जैसी ही है.

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