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India-New Zealand FTA: भारत-न्‍यूजीलैंड ने साइन की ऐतिहासिक डील... महंगे फल, वाइन, सीफूड हो जाएंगे सस्‍ते, ऐसे बढ़ेगा रोजगार

India New Zealand FTA Benefits to You: वैश्विक अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बीच, भारत-न्यूजीलैंड एफटीए एक मजबूत 'मील का पत्‍थर' बताया जा रहा है. जानिए इससे आपको क्‍या-क्‍या फायदे होंगे.

India-New Zealand FTA: भारत-न्‍यूजीलैंड ने साइन की ऐतिहासिक डील... महंगे फल, वाइन, सीफूड हो जाएंगे सस्‍ते, ऐसे बढ़ेगा रोजगार
India New Zealand FTA: भारत को क्‍या-क्‍या फायदे ?

India-New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड ने आज एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर कर व्यापारिक रिश्तों के नए युग की शुरुआत कर दी है. वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में, दोनों देशों ने रिकॉर्ड 9 महीनों के भीतर इस समझौते को अंजाम देकर दुनिया को एक मजबूत संदेश दिया है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले (Todd McClay) ने दस्तावेजों का आदान-प्रदान कर इस 'वन्स ए जनरेशन' (पीढ़ी में एक बार होने वाले) समझौते पर मुहर लगाई.

संयुक्त बयान के दौरान वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने क्रिकेट की शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए कहा, 'आज हिंद महासागर थोड़ा छोटा और दो बड़े लोकतंत्रों के बीच का बंधन और भी मजबूत महसूस हो रहा है. हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब दुनिया नए साझेदार चुन रही है, और इस बदलती दुनिया में भारत और न्यूजीलैंड ने एक-दूसरे को चुना है.' 

दोनों देशों ने इस डील को मील का पत्‍थर बताया 

ये समझौता महज एक व्यापारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भारत और प्रशांत क्षेत्र के विकसित राष्ट्र न्यूजीलैंड के बीच एक गहन, जन-केंद्रित और स्थायी साझेदारी का प्रवेश द्वार है.

दोनों देशों ने इस सौदे को 'मील का पत्थर' करार दिया है. इस डील का सबसे बड़ा लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. वहीं अगले 15 साल में 20 बिलियन डॉलर के निवेश लाने का भी लक्ष्‍य है. 

इस FTA को पिछले साल 16 मार्च को लॉन्च किया गया था और रिकॉर्ड 9 महीनों में इसे पूरा कर लिया गया. भारत को न्यूजीलैंड के 118 सेक्‍टर्स तक पहुंच मिलेगी, जबकि 139 सेक्‍टर्स में भारत को 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा प्राप्त होगा. ये समझौता किसानों, मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई (MSMEs), महिलाओं, पेशेवरों और छात्रों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगा.

पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री

व्यापार और निवेश का नया खाका

समझौते के तहत न्यूजीलैंड अपने बाजारों में भारतीय कंपनियों को पूरी तरह शुल्क-मुक्त प्रवेश देगा. वर्तमान में भारत से निर्यात होने वाले कई उत्पादों पर 10% तक की ड्यूटी लगती है, जो अब शून्य हो जाएगी. बदले में, भारत न्यूजीलैंड से आने वाले लगभग 95% उत्पादों पर शुल्क में बड़ी कटौती या छूट देगा. इसमें ऊन, लकड़ी, समुद्री भोजन और कुछ विशेष फल (एवोकैडो, चेरी) शामिल हैं.

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भारत-न्‍यूजीलैंड फ्री ट्रेड डील के फायदे 

  1. भारी निवेश: न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत के विनिर्माण और अवसंरचना क्षेत्रों में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा.
  2. ड्यूटी-फ्री एक्सेस: भारतीय कपड़ा, चमड़ा, कालीन और वाहन पुर्जों जैसे उत्पादों को न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा.
  3. वीजा और रोजगार: हर साल 5,000 भारतीय पेशेवरों (IT, इंजीनियरिंग, आयुष, योग शिक्षक) को 3 साल का रोजगार वीजा मिलेगा.
  4. छात्रों के लिए मौका: 'वर्किंग हॉलिडे वीजा' के तहत 1,000 युवा भारतीय साल भर के लिए न्यूजीलैंड जा सकेंगे और वहां काम कर सकेंगे.
  5. कृषि और तकनीक: कीवी, सेब और शहद जैसे उत्पादों पर 'विशेष कृषि-प्रौद्योगिकी कार्य योजना' के तहत सहयोग बढ़ेगा.

भारत में क्‍या-क्‍या सस्‍ता होने वाला है? 

1. फल और ड्राई फ्रूट्स (Fruits)

न्यूजीलैंड अपने उच्च गुणवत्ता वाले फलों के लिए प्रसिद्ध है. समझौते के तहत इन पर विशेष रियायत दी गई है:

  • कीवी (Kiwifruit): इस पर कोटा-आधारित शुल्क में भारी कटौती की गई है. एक निश्चित मात्रा तक अब यह बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के भारत आ सकेगा.
  • सेब (Apples): न्यूजीलैंड के सेबों पर लगने वाले टैक्स में 50% तक की कटौती का प्रावधान है.
  • बेरीज और अन्य फल: एवोकैडो, ब्लूबेरी, चेरी और पर्सिमोन (Persimmons) जैसे प्रीमियम फल अब कम दामों पर उपलब्ध होंगे.

2. वाइन और स्पिरिट (Wine)

न्यूजीलैंड की वाइन दुनियाभर में मशहूर है. भारत अब तक इस पर 150% तक भारी शुल्क लगाता था, जिसे अब कम करके 25% से 50% (वाइन की कीमत के आधार पर) के दायरे में लाया जाएगा. इससे अच्छी क्वालिटी की कीवी वाइन भारत में काफी सस्ती हो जाएगी.

3. समुद्री भोजन (Seafood)

अगर आप सीफूड के शौकीन हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. 

  • न्यूजीलैंड से आने वाले सैल्मन (Salmon) और मसल्स (Mussels) जैसे समुद्री जीवों पर टैक्स कम या खत्म किया जा रहा है.

4. ऊन और लकड़ी (Wool & Wood)

  • भेड़ का मांस और ऊन: न्यूजीलैंड से आने वाले भेड़ के मांस (Lamb) और ऊन पर तत्काल प्रभाव से ड्यूटी खत्म कर दी गई है. इससे सर्दियों के ऊनी कपड़े और कंबल सस्ते हो सकते हैं.
  • लकड़ी (Timber): निर्माण और फर्नीचर में इस्तेमाल होने वाली न्यूजीलैंड की लकड़ी और वानिकी उत्पादों पर 95% तक शुल्क हटा दिया गया है.

5. अन्य विशेष उत्पाद

  • मनुका शहद (Manuka Honey): औषधीय गुणों वाला यह कीमती शहद अब कम शुल्क के कारण किफायती होगा.
  • शिशु आहार (Infant Formula): बल्क इन्फेंट फार्मूला और मिल्क एल्ब्यूमिन जैसे उत्पादों पर भी रियायत दी गई है.
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संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा: किसानों का हित सर्वोपरि

भारत ने इस समझौते में चतुराई से अपने घरेलू हितों की रक्षा की है. भारतीय किसानों और स्थानीय उद्योगों को नुकसान न हो, इसके लिए डेयरी उत्पादों (दूध, पनीर, दही), प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर को पूरी तरह से शुल्क छूट के दायरे से बाहर रखा गया है. यानी न्यूजीलैंड के डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में बिना टैरिफ के प्रवेश नहीं कर पाएंगे.

न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले का कहना है कि भारत न्यूजीलैंड के लिए एक रणनीतिक प्राथमिकता है. हमारे निर्यातकों के लिए 1.4 अरब की आबादी वाले बाजार में निवेश करने का यह 'पीढ़ी में एक बार' मिलने वाला मौका है. मैं अपने व्यवसायों से आग्रह करता हूं कि वे भारत में संयुक्त उद्यमों और निवेश को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाएं.

व्यावसायिक आवाजाही में क्रांति

न्यूजीलैंड ने किसी भी देश के साथ पहली बार छात्र आवाजाही और पढ़ाई के बाद वर्क वीजा पर विशेष अनुबंध किया है. सुगम वीजा प्रक्रिया से न केवल आईटी और स्वास्थ्य सेवा के पेशेवरों को लाभ होगा, बल्कि रसोइयों, संगीत शिक्षकों और पारंपरिक चिकित्सकों के लिए भी विदेशी धरती पर करियर बनाने के रास्ते खुलेंगे.

वैश्विक अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बीच, भारत-न्यूजीलैंड एफटीए एक मजबूत 'मील का पत्‍थर' बताया जा रहा है. ये समझौता भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक विश्वसनीय केंद्र बनाने और न्यूजीलैंड के निवेशकों को भारत की विकास गाथा में शामिल करने का सबसे बड़ा माध्यम साबित हो सकता है. 

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