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700 करोड़ रुपये का घोटाला; 6 हजार से अधिक निवेशकों की जीवनभर की कमाई फंसी, सड़कों पर उतरे बुजुर्ग

चेन्नई में हजारों जमाकर्ता 150 साल पुरानी मायलापुर हिंदू परमानेंट फंड निधि पर गंभीर आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतर आए हैं. पीड़ितों का कहना है कि वृद्धावस्था की सुरक्षा, इलाज के खर्च और जीवनभर की जमा पूंजी सब कुछ दांव पर लग गया. अब सरकार से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है.

700 करोड़ रुपये का घोटाला; 6 हजार से अधिक निवेशकों की जीवनभर की कमाई फंसी, सड़कों पर उतरे बुजुर्ग
700 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से 6,000 जमाकर्ताओं की जमा पूंजी फंसी, न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे वरिष्ठ नागरिक
NDTV
  • 700 करोड़ के कथित घोटाले से हजारों बुजुर्गों की जिंदगी प्रभावित
  • चेन्नई में प्रदर्शन, मायलापुर फंड मामले में जांच तेज करने की मांग
  • 150 साल पुरानी वित्तीय संस्था पर गंभीर आरोप
चेन्नई:

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में हजारों जमाकर्ता अपनी जमा पूंजी वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. मायलापुर हिंदू परमानेंट फंड निधि से जुड़े कथित 700 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले ने विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को गहरा झटका दिया है. जिन पैसों को लोगों ने अपनी वृद्धावस्था की सुरक्षा, इलाज के खर्च और भविष्य की जरूरतों के लिए जमा किया था, वही अब वर्षों से फंसे हुए हैं. प्रभावित लोगों का आरोप है कि संस्था ने जमा राशि लौटाना बंद कर दिया, ब्याज भुगतान रोक दिया और परिपक्व हो चुकी जमा राशि भी वापस नहीं की, जिससे हजारों परिवार आर्थिक संकट में आ गए हैं.

जीवनभर की कमाई फंसने का दर्द

80 वर्ष से अधिक उम्र के शन्मुगसुंदरम उन हजारों लोगों में शामिल हैं, जिनकी जमा पूंजी इस मामले में फंस गई है. NDTV से बात करते हुए उन्होंने बताया कि अपनी संपत्ति बेचकर उन्हें लगभग 68 लाख रुपये मिले थे जिसे उन्होंने मायलापुर हिंदू परमानेंट फंड निधि में जमा किए थे. उन्हें उम्मीद थी कि यह राशि उनकी वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा देगी.

शन्मुगसुंदरम ने बताया कि बैंकों की तुलना में संस्था अधिक ब्याज दे रही थी, इसलिए उन्होंने वहां निवेश किया. लेकिन अब उन्हें केवल पछतावा रह गया है.

उनका कहना है कि जरूरत के समय वह अपने परिवार की पर्याप्त मदद भी नहीं कर सके क्योंकि उनकी पूरी जमा पूंजी फंस गई.

विरोध प्रदर्शन करते हुए पीड़ित

विरोध प्रदर्शन करते हुए पीड़ित

6,000 से ज्यादा जमाकर्ता प्रभावित

जमाकर्ताओं के संगठन के अनुसार इस मामले से कम से कम 6,000 लोग प्रभावित हुए हैं. संगठन का दावा है कि अपनी जमा राशि की प्रतीक्षा करते-करते 40 से अधिक जमाकर्ताओं की मौत भी हो चुकी है. प्रभावित लोगों का कहना है कि इन जमाओं में उनकी सेवानिवृत्ति निधि, चिकित्सा खर्च के लिए रखी गई रकम और कई दशकों की मेहनत की कमाई शामिल थी.

पैसा जमा करने वालों का सपना टूटा

48 लाख रुपये गंवाने वाली देविका ने बताया कि उन्होंने अपनी वृद्धावस्था में आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए यह धन जमा किया था. उन्होंने कहा कि उन्होंने यह रकम अपने बेटे तक को नहीं सौंपी थी क्योंकि वह आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहना चाहती थीं. देविका का आरोप है कि उनके साथ खुलेआम धोखा हुआ है और सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर उनकी रकम वापस दिलानी चाहिए.

वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ी परेशानी

एक 87 वर्षीय जमाकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल हुए. उन्होंने बताया कि उन्हें और उनकी पत्नी को सुपर सीनियर सिटीजन के लिए अधिक ब्याज का लाभ देने का आश्वासन दिया गया था. इसी भरोसे दोनों ने 5-5 लाख रुपये जमा किए थे. लेकिन अब वही निवेश उनके लिए चिंता और परेशानी का कारण बन गया है.

इलाज और रोजमर्रा का खर्च भी प्रभावित

हृदय रोग से पीड़ित जयश्री ने बताया कि उनके परिवार के 10 लाख रुपये इस संस्था में फंसे हुए हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें हर महीने लगभग 9,000 रुपये ब्याज मिलता था, जिससे घर का खर्च और दवाइयों का खर्च चलता था. अब ब्याज भुगतान बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति काफी कठिन हो गई है. जयश्री का कहना है कि उनके पास कोई नियमित आय नहीं है और इलाज के लिए पैसों की आवश्यकता लगातार बनी हुई है.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मायलापुर हिंदू परमानेंट फंड निधि से जुड़ा है, जिसका नेतृत्व कारोबारी और राजनेता देवनाथन यादव कर रहे थे. मामले में उनकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है. जानकारी के अनुसार उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवगंगा सीट से एनडीए उम्मीदवार के रूप में भाजपा के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा था. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में जमानत से संबंधित कार्यवाही में 100 करोड़ रुपये जमा करने जैसी शर्तों का भी उल्लेख सामने आया है.

हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला

मद्रास हाईकोर्ट ने भी इस मामले से संबंधित सुनवाई की है. अदालती कार्यवाही के दौरान यह दर्ज किया गया कि फरवरी 2024 से भुगतान रुक गए थे. जमाकर्ताओं का आरोप है कि जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज बंद कर दिया गया, परिपक्व जमा राशि वापस नहीं की गई और भुगतान के लिए दिए गए कई चेक भी सम्मानित नहीं हुए.

जांच तेज करने की मांग

मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) कर रही है. हालांकि जमाकर्ताओं का कहना है कि जांच प्रक्रिया को और तेज किया जाना चाहिए. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मांग की है कि मामले की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जाए और संस्था के खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए.

संपत्तियां जब्त करने की मांग

प्रभावित जमाकर्ता यह भी मांग कर रहे हैं कि कानूनी रूप से संभव होने पर संस्था और उससे जुड़े लोगों की संपत्तियों को जब्त किया जाए. उनका कहना है कि संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त धनराशि का उपयोग जमाकर्ताओं को भुगतान करने में किया जाए.

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