पाकिस्तान एक बार फिर हाई-प्रोफाइल अपहरण हुआ है. खैबर पख्तूनख्वा सरकार में सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री फजल शकूर खान को सोमवार दोपहर नकाबपोश बंदूकधारियों ने दिनदहाड़े अगवा कर लिया. हमलावरों ने पहले उनकी गाड़ी को मोटरवे पर रोकने के लिए उस पर गोलियां चलाईं, टायरों को निशाना बनाया और फिर मंत्री को अपने साथ ले गए. घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं, लेकिन अब तक मंत्री का कोई पता नहीं चल सका है.
रिपोर्टों के मुताबिक, फजल शकूर खान अपनी गाड़ी से यात्रा कर रहे थे, तभी रास्ते में हथियारबंद लोगों ने उनका रास्ता रोक लिया. हमलावरों ने वाहन के टायरों पर फायरिंग की, जिससे गाड़ी रुक गई. इसके बाद बंदूक की नोक पर मंत्री को वाहन से उतारा गया और अज्ञात दिशा में ले जाया गया. अपहरण के पीछे किस संगठन का हाथ है, यह अभी साफ नहीं हो पाया है. न ही किसी समूह ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है और न ही अपहरण के मकसद को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है.
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब खैबर पख्तूनख्वा प्रांत पहले से ही सुरक्षा चुनौतियों, राजनीतिक तनाव और उग्रवादी गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में है. एक प्रांतीय मंत्री का दिनदहाड़े इस तरह अपहरण होना पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
पाकिस्तान में हाई-प्रोफाइल अपहरण के चर्चित मामले
फजल शकूर खान का अपहरण पाकिस्तान में किसी बड़े राजनीतिक या प्रभावशाली व्यक्ति के साथ हुई पहली घटना नहीं है. पिछले डेढ़ दशक में कई हाई-प्रोफाइल शख्सियतें अपहरण का शिकार हो चुकी हैं.
अबैदुल्लाह बेग (2022)
अक्टूबर 2022 में गिलगित-बालतिस्तान के वरिष्ठ मंत्री अबैदुल्लाह बेग को इस्लामाबाद से लौटते समय बाबूसर रोड पर आतंकियों ने बंधक बना लिया था. उग्रवादियों ने अपने कैद साथियों की रिहाई की मांग रखी थी. हालांकि स्थानीय जिरगा और नेताओं की मध्यस्थता के बाद उन्हें अगले ही दिन रिहा कर दिया गया.
अली हैदर गिलानी (2013)
पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के बेटे और चुनाव प्रत्याशी अली हैदर गिलानी को मई 2013 में मुल्तान से चुनाव प्रचार के दौरान अगवा कर लिया गया था. उन्हें अफगानिस्तान ले जाया गया, जहां करीब तीन साल बाद 2016 में अमेरिकी और अफगान विशेष बलों के संयुक्त अभियान के दौरान सुरक्षित छुड़ाया गया.
शाहबाज तासीर (2011)
पंजाब के पूर्व गवर्नर सलमान तासीर के बेटे शाहबाज तासीर का अगस्त 2011 में लाहौर से अपहरण कर लिया गया था. वे करीब साढ़े चार साल तक तालिबानी और उज्बेक आतंकियों की कैद में रहे. मार्च 2016 में बलूचिस्तान के कुचलाक इलाके से उन्हें आजाद कराया गया था.
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