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सचमुच इमरान खान की मौत हो गई ? सेना ने कहा- ‘सब बकवास’, PTI ने दिया CCTV का हवाला

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की जेल में मौत की अफवाहों पर देश में हड़कंप मचा है. अमेरिकी पत्रकार के सनसनीखेज दावों के बीच सेना (ISPR) ने इसे बकवास बताया है, जबकि परिवार ने CCTV में इमरान खान को देखने की पुष्टि की है. पढ़ें पूरी विस्तृत रिपोर्ट.

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की सलामती और सेहत को लेकर एक बार फिर तरह-तरह की चर्चाओं और राजनीतिक बवाल का दौर शुरू हो गया है. अमेरिका में रह रहे वरिष्ठ पत्रकार वजाहत एस. खान के सनसनीखेज दावे के बाद पाकिस्तानी राजनीति और फौज के गलियारों में हड़कंप मच गया है. हालांकि, पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR (इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस) ने इन दावों को पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठा करार दिया है. वहीं, दूसरी तरफ PTI का दावा है कि उनके परिवार ने जेल के CCTV कैमरे की लाइव फीड में इमरान खान की स्थिति देखी है. बता दें कि वजाहत एस खान ने अपने पहले के वीडियो में पाकिस्तानी सेना के तीन अधिकारियों के हवाले से इमरान खान की मौत की आशंका जताई थी. हालांकि बाद में खुद उन्होंने ही वीडियो जारी करके कहा कि ये खबर कन्फर्म नहीं है. 

पत्रकार वजाहत एस. खान का बड़ा दावा: GHQ में डर और निगरानी का माहौल

10 और 11 अगस्त को जारी अपनी वीडियो रिपोर्ट में वजाहत एस. खान ने दावा किया कि उन्होंने रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय (GHQ) के जनरल स्टाफ, मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) और कम्युनिकेशंस-मॉनिटरिंग डायरेक्टरेट में तैनात तीन अफसरों और एक जूनियर जवान से बात की है. वजाहत खान ने साफ किया कि अफसरों ने इमरान खान की मौत की सीधे पुष्टि नहीं की है, लेकिन उन्होंने फौज के अंदर फैले गहरे डर और सन्नाटे को लेकर विस्तार से बात रखी है. रिपोर्ट के मुताबिक, जासूसी और सर्विलांस के डर से कुछ फौजी अफसर अपने ही घरों में फोन पर इस मुद्दे पर बात करने से बच रहे हैं. ऐसा भी कहा जा रहा है कि वे अपने मोबाइल सिग्नल्स को ब्लॉक करने के लिए फोन को किचन के माइक्रोवेव में रख रहे हैं ताकि वह 'फैराडे केज' की तरह काम कर सके. इसे आम फौजी अनुशासन के बजाय एक खौफ के रूप में देखा जा रहा है.

अदियाला जेल पर मिलिट्री का नियंत्रण और 24/7 लाइव स्ट्रीम

वजाहत की रिपोर्ट में रावलपिंडी की अदियाला जेल की सुरक्षा को लेकर भी बेहद चौंकाने वाले दावे किए गए हैं, जहां इमरान खान अगस्त 2023 से तोशाखाना मामले में बंद हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अदियाला जेल का कंट्रोल अब सिविल जेल स्टाफ के हाथ में नहीं है, बल्कि इसे एक खास मिलिट्री इंटेलिजेंस टीम को सौंप दिया गया है. जेल के चारों तरफ हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक जासूसी उपकरण लगाए गए हैं और इमरान खान की बैरक (सेल) से सीधे GHQ को 24 घंटे लाइव स्ट्रीम भेजी जा रही है. इस सिस्टम के चलते सिविल जेल सुपरिटेंडेंट की ताकत अब सिर्फ नाममात्र की रह गई है.
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ISPR का खंडन और 'प्रूफ ऑफ लाइफ' का तर्क

पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR ने इन खबरों को पूरी तरह से आधारहीन बताया. दिलचस्प बात यह है कि पत्रकार वजाहत खान ने सेना के इस जवाब का स्वागत भी किया है. उन्होंने कहा कि महीनों की आधिकारिक खामोशी के बाद सेना का खंडन ही इस बात का सबसे बड़ा सबूत (Proof of Life) है कि पूर्व प्रधानमंत्री जीवित हैं. उन्होंने कहा,

"मुझे खुशी है कि ISPR ने जवाब दिया—चाहे फर्जी कहें या कुछ भी, लेकिन इसका मतलब है कि इमरान जीवित हैं." इसी बीच, PTI की ओर से भी एक बयान आया है जिसमें कहा गया कि इस हफ्ते जब परिवार के लोग बुशरा बीबी से मिलने अदियाला जेल पहुंचे, तो उन्होंने जेल के CCTV फीड में इमरान खान को अपनी पत्नी से मुलाकात के लिए पैदल जाते हुए देखा.

हालांकि, पार्टी ने इमरान खान की आंखों की रोशनी और ब्लड प्रेशर को लेकर अपनी चिंताएं बरकरार रखी हैं.
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तख्तापलट से जेल तक: राजनीतिक संकट की पूरी कहानी

इमरान खान का जेल जाना और सेना के साथ उनके रिश्तों में दरार की शुरुआत अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उन्हें सत्ता से हटाए जाने के बाद हुई थी. इमरान खान ने लगातार इसे अमेरिकी साजिश और पाकिस्तानी सेना की शह पर हुआ तख्तापलट करार दिया, हालांकि अमेरिका और पाक सेना दोनों ने इससे इनकार किया है. इसके बाद 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद PTI समर्थकों ने लाहौर कोर कमांडर के आवास सहित कई सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला कर दिया. सेना ने इस घटना को एक 'रेड लाइन' माना और सैकड़ों नागरिकों पर सैन्य अदालतों में मुकदमे चलाए. इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर PTI कार्यकर्ताओं ने लगातार प्रदर्शन किए, जिनमें नवंबर 2024 का इस्लामाबाद मार्च भी शामिल है, जहां सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई में कई लोगों की जान गई थी.

फील्ड मार्शल असीम मुनीर की भूमिका पर सवाल

PTI के गुस्से का मुख्य केंद्र इस समय फील्ड मार्शल असीम मुनीर हैं, जिन्होंने नवंबर 2022 में सेना प्रमुख का पद संभाला था. आलोचकों का आरोप है कि असीम मुनीर ने 2024 के आम चुनावों में PTI समर्थित उम्मीदवारों को किनारे करने, नागरिक मामलों में सेना के हस्तक्षेप को बढ़ाने वाले संवैधानिक संशोधनों को पास कराने और इमरान खान की स्थिति पर पूरी तरह से ब्लैकआउट बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाई है. दूसरी ओर, ISPR के वरिष्ठ अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए जेल से इमरान खान के बयानों और बयानबाजी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया है. वहीं, PTI इसे साधारण राजनीतिक असंतोष को अपराध बनाने का प्रयास मानती है और 2023-2024 की हिंसा पर स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रही है.
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