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बलूचिस्तान के लिए हरियाणा में प्रदर्शन, वकील बोले- खून से लिखेंगे UN और पीएम मोदी को खत

वकीलों ने कहा का पाकिस्तान ने अवैध रूप से बलूचिस्तान पर नियंत्रण कर लिया था. अब भी बलूचिस्तान के लोग उससे लड़ रहे हैं.

सोनीपत:

बलूचिस्तान के विद्रोही 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं. इस बीच भारत से भी बलूचिस्तान के लिए समर्थन वाली आवाज उठी है. मंगलवार को हरियाणा के सोनीपत में वकीलों ने एक प्रदर्शन किया है. इसमें बलूचिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए वकील निकले. उनके हाथों में बलूचिस्तान का झंडा भी था. वकीलों ने कहा कि हम बलूचिस्तान के साथ हैं और उसकी आजादी के लिए आवाज उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान ने कभी भी पाकिस्तान के शासन को स्वीकार नहीं किया है. इन लोगों ने कहा कि बलूचिस्तान 11 अगस्त, 1947 से ही भारत को अपना देश मानता है. वे चाहते थे कि हमारा विलय भारत के साथ होना चाहिए. इसकी मांग भी उनकी ओर से उठाई गई थी.

वकीलों ने कहा का पाकिस्तान ने अवैध रूप से बलूचिस्तान पर नियंत्रण कर लिया था. अब भी बलूचिस्तान के लोग उससे लड़ रहे हैं और आजादी चाहते हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ और इंटरनेशनल कोर्ट को तत्काल दखल देने की जरूरत है. वकीलों का कहना था कि हम पीएम नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र संघ को इस मामले में अपने खून से खत लिखेंगे. इस दौरान भले ही वकीलों की संख्या कम थी, लेकिन उनका कहना था कि हम भविष्य में एक बड़ी रैली का आयोजन करेंगे. बता दें कि बलूचिस्तान को लेकर अकसर भारत में ही आवाज उठती रही है.

बलूचिस्तान में दशकों से एक विद्रोह पाकिस्तान के खिलाफ रहा है. पाकिस्तान ने 1948 में बलूचिस्तान के कलात पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी और जबरन विलय करा लिया था. यह तब हुआ था, जब कुछ महीने पहले ही खुद मोहम्मद अली जिन्ना ने वादा किया था कि बलूचिस्तान एक स्वतंत्र मुल्क रहेगा. इसके बाद भी वादाखिलाफी हुई थी. कलात को छोड़कर पहले मकरान समेत कुछ छोटी रियासतों का विलय कराया गया था. इसके बाद कलात पर सैन्य कार्रवाई की धमकी देते हुए पाकिस्तान ने उसका विलय करा लिया था. तब से ही बलूच विद्रोही पाकिस्तान के खिलाफ हैं. 

बता दें कि क्षेत्रफल के मामले में बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन वहां देश की 5 फीसदी आबादी ही बसती है. इस राज्य में बड़े पैमाने पर खनिज और पेट्रोलियम पाया जाता है. बलूच विद्रोहियों का कहना है कि पाकिस्तान की सेना और सरकार उनका उत्पीड़न करती है, लेकिन यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर वह नियंत्रण करना चाहती है.

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