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टाटा ग्रुप के लिए क्या थे N. चंद्रशेखरन के मायने ? विवादों से उबारकर बनाया 328 अरब डॉलर का साम्राज्य

टाटा संस के चेयरमैन पद से एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे ने कॉर्पोरेट जगत को चौंका दिया है. साइरस मिस्त्री विवाद के बाद कमान संभालने वाले 'चंद्र' ने 8 सालों में न सिर्फ टाटा समूह की साख को बढ़ाया, बल्कि उसका टर्नओवर 180 अरब डॉलर और मार्केट कैप 328 अरब डॉलर के पार पहुंचाया. जानिए टाटा के 'संकटमोचक' रहे चंद्रशेखरन का पूरा सफर.

टाटा ग्रुप के लिए क्या थे N. चंद्रशेखरन के मायने ? विवादों से उबारकर बनाया 328 अरब डॉलर का साम्राज्य

टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन के अचानक इस्तीफे की खबर ने देश के कॉर्पोरेट जगत को चौंका दिया है. 18 अगस्त 2026 को होने वाली टाटा समूह की एजीएम (AGM) से ठीक पहले आया यह फैसला एक बड़े युग के अंत का संकेत है. कॉर्पोरेट दुनिया में जिन्हें प्यार से 'चंद्र' कहा जाता है, उनका टाटा समूह में होना सिर्फ एक शीर्ष पद पर बने रहना नहीं था. वे उस दौर में समूह के 'संकटमोचक' और 'बदलाव का चेहरा' बनकर उभरे, जब 150 साल से भी अधिक पुराना टाटा ग्रुप अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था. खास बात यह है कि देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने की कमान संभालने वाले 'चंद्र' का खुद का सफर भी किसी मिसाल से कम नहीं है. तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में किसान परिवार में जन्मे चंद्रशेखरन ने 1987 में TCS में एक बेहद साधारण सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी. तब किसी ने नहीं सोचा था कि अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर एक दिन यही शख्स पूरे टाटा साम्राज्य की तकदीर लिखेगा.इस रिपोर्ट में समझते हैं कि आखिर टाटा ग्रुप के लिए नटराजन चंद्रशेखरन के होने के असल मायने क्या थे और उनके 8 साल के कार्यकाल ने इस कारोबारी समूह को कैसे बदलकर रख दिया...

विवादों के दौर में बने थे समूह के 'संकटमोचक'

साल 2016 में जब साइरस मिस्त्री को अचानक टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाया गया, तब 150 साल से भी अधिक पुराने टाटा समूह की साख और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल उठ रहे थे. उस दौर में रतन टाटा और बोर्ड ने चंद्रशेखरन पर भरोसा जताया. अक्टूबर 2016 में वे बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन नियुक्त किया गया. वे टाटा समूह के इतिहास में पहले ऐसे गैर-पारसी और पूरी तरह से प्रोफेशनल एग्जीक्यूटिव थे जिन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई. उन्होंने न सिर्फ साइरस मिस्त्री विवाद से उपजे तनाव को हैंडल किया, बल्कि समूह के अनुशासन और भरोसे को फिर से स्थापित किया.

30 साल का अनुभव और TCS से शीर्ष तक का सफर

चंद्रशेखरन सही मायनों में 'टाटा लिफर' (Tata Lifer) रहे हैं. टाटा लिफर शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है जिसने अपना पूरा केवल और केवल टाटा समूह में ही बिताया हो.

1963 में जन्मे चंद्रशेखरन ने कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर्स (MCA) करने के बाद 1987 में एक सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर के रूप में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से अपना करियर शुरू किया था. साल 2009 में वे TCS के CEO और MD बने. उनके नेतृत्व में TCS ने आईटी सेक्टर में ग्लोबल लेवल पर नई पहचान बनाई.

30 साल तक केवल काम के दम पर आगे बढ़ते हुए एक ट्रेनी से देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने का प्रमुख बनना ही टाटा में उनके कद और प्रशासनिक क्षमता को साबित करता है.

ब्रांड्स का पुनर्गठन और एयर इंडिया की 'घर वापसी'

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने कई ऐतिहासिक और बड़े साहसिक फैसले लिए. घाटे में चल रही कंपनियों को बंद या पुनर्गठित करना, डिजिटल इकोसिस्टम (Tata Neu) को खड़ा करना और एविएशन-ऑटोमोबाइल सेक्टर का विस्तार उनके प्रमुख रणनीतिक कदम रहे. सबसे ऐतिहासिक पल तब आया जब उनके नेतृत्व में टाटा ने सरकारी विमानन कंपनी 'एयर इंडिया' की सफल बोली लगाकर उसकी समूह में 'घर वापसी' कराई. इसके अलावा टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और इंडियन होटल्स (IHCL) को ग्लोबल लेवल पर दौड़ में बनाए रखने में उनकी भूमिका निर्णायक रही.

वित्तीय मजबूती और 328 अरब डॉलर का मार्केट कैप

चंद्रशेखरन के 8 साल के कार्यकाल में टाटा समूह का वित्तीय ढांचा बेहद मजबूत हुआ.जब फरवरी 2017 में नटराजन चंद्रशेखरन ने समूह की कमान संभाली थी, तब टाटा ग्रुप का कुल सालाना कारोबार (टर्नओवर) लगभग 103.27 अरब डॉलर था, जो 31 मार्च 2025 तक करीब 80 फीसदी बढ़कर 180 अरब डॉलर के पार पहुंच गया.

इसी दौरान शेयर बाजार में लिस्टेड टाटा की सभी कंपनियों की कुल वैल्यू (मार्केट कैप) भी लगभग 116-120 अरब डॉलर से करीब तीन गुना बढ़कर 328 अरब डॉलर  की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई, जो साफ दिखाता है कि 'चंद्र' के 8 सालों के दौर में टाटा ग्रुप ने कितनी तेजी से तरक्की की है.

100 से अधिक ऑपरेटिंग कंपनियों वाले इस विशाल समूह को उन्होंने वित्तीय स्थिरता के साथ-साथ भविष्य की टेक्नोलॉजी मसलन इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए तैयार किया.

ग्लोबल मंच पर देश और टाटा की साख बढ़ाई

व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2022 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया. इसके अलावा फ्रांस सरकार ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'लेजियन डी'ऑनूर' (Légion d'Honneur) से नवाजा. वे इंडो-यूएस, इंडिया-यूके और बी20 (B20) जैसे बड़े ग्लोबल मंचों पर भारत के बिजनेस नज़रिए का प्रतिनिधित्व करते रहे.टाटा ग्रुप में चंद्रशेखरन के होने का सीधा मतलब था—विवादों से दूर, सिर्फ परफॉर्मेंस पर ध्यान, दूरदर्शी रणनीतिक फैसले और टाटा के नैतिक मूल्यों के साथ आधुनिक बिजनेस का मेल. उनके जाने से टाटा समूह में एक सफल और ऐतिहासिक नेतृत्व के अध्याय का एक युग खत्म हुआ है.
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