विज्ञापन

परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान को तालिबान कैसे देता है मात? गुरिल्ला रणनीति, भूगोल और पश्तून समर्थन से बदलते जंग के समीकरण

अफगानिस्तान‑पाकिस्तान युद्ध में तालिबान गुरिल्ला रणनीति, दुर्गम पहाड़ी भूगोल और दुरंड लाइन के दोनों ओर बसे पश्तून समुदाय के समर्थन के कारण पाकिस्तान को भारी चुनौती दे रहा है. शक्तिशाली सैन्य क्षमता और एयरस्ट्राइक के बावजूद पाकिस्तान तालिबान के फुर्तीले लड़ाकों को निर्णायक रूप से दबाने में नाकाम दिख रहा है.

परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान को तालिबान कैसे देता है मात? गुरिल्ला रणनीति, भूगोल और पश्तून समर्थन से बदलते जंग के समीकरण
  • पाकिस्तान के पास आधुनिक हथियार और परमाणु शक्ति होने के बावजूद तालिबान की रणनीति उसे चुनौती देती है.
  • डूरंड लाइन के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में तालिबान को छिपने और लड़ने में प्राकृतिक सुरक्षा कवच प्राप्त है.
  • पश्तून जनसमूह जो सीमा के दोनों ओर फैला है तालिबान को सामाजिक और रसद समर्थन प्रदान करता है.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच छिड़ी खुली जंग ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है. पाकिस्तान ने काबुल समेत कई अफगान शहरों पर भारी हवाई हमले किए हैं और इसे आधिकारिक रूप से 'ओपन वॉर' घोषित किया है. इसके जवाब में अफगान पक्ष ने सीमा चौकियों पर कब्जे और पाक सैनिकों के हताहत होने के दावे किए हैं.

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि परमाणु शक्ति और आधुनिक हथियारों से लैस पाकिस्तान को तालिबान बार‑बार कैसे चोट पहुंचा देता है?

इसका जवाब तीन प्रमुख कारकों में छिपा है. गुरिल्ला रणनीति, पहाड़ी भूगोल, और पश्तून समर्थन.

1. पाकिस्तान की विशाल सैन्य शक्ति बनाम तालिबान की गुरिल्ला क्षमता

पाकिस्तान के पास लड़ाकू जेट, टैंक, मिसाइल सिस्टम और परमाणु हथियार जैसी उन्नत सैन्य क्षमता है. मौजूदा संघर्ष में पाकिस्तान ने काबुल, कंधार और पकतिया पर बड़े पैमाने के एयरस्ट्राइक किए और 130 से अधिक तालिबान लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया है. इसके विपरीत, तालिबान के पास पारंपरिक सेना नहीं है. उनकी ताकत है- छोटे, फुर्तीले लड़ाके. सीमित लेकिन मोबाइल हथियार. हिट‑एंड‑रन गुरिल्ला युद्ध. रात में हमले और छोटे समूहों में बंटकर लड़ना.  यही रणनीति पाकिस्तान जैसे शक्तिशाली और बड़े सैन्य ढांचे वाले देश को उलझाए रखती है.

यह भी पढ़ें- पाकिस्तान का अफगानिस्तान के खिलाफ युद्ध का ऐलान, दोनों देशों में जोरदार संघर्ष, जानें 10 बड़े अपडेट

2. दुर्गम पहाड़ी इलाके: तालिबान का प्राकृतिक सुरक्षा कवच

लड़ाई का केंद्र डूरंड लाइन के आसपास के पहाड़ी जिले हैं. नंगरहार, पकतीका, खोस्त आदि. यहां संघर्ष कई क्षेत्रों में फैला है और दोनों देशों की फौजें एक-दूसरे की चौकियों पर भारी हमले कर रही हैं.  इन इलाकों में बड़ी सेनाओं की मूवमेंट धीमी हो जाती है. एयरस्ट्राइक का प्रभाव सीमित हो जाता है. तालिबान के लड़ाकों को गुफाओं, जंगलों और पहाड़ियों में आसानी से छिपने का मौका मिलता है. यह भूगोल तालिबान के लिए एक बड़ा हथियार है और पाकिस्तान के लिए स्थायी सिरदर्द.

3. पश्तून जनसमूह का समर्थन: तालिबान की 'मानव ढाल'

पश्तून समुदाय डूरंड लाइन के दोनों ओर फैला है. काबुल, कंधार से लेकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान तक. कई रिपोर्टों में बताया गया है कि सीमा पर रहने वाले पश्तून समूह तालिबान को न केवल सामाजिक समर्थन देते हैं, बल्कि रसद, आश्रय, सुरक्षित ठिकाने भी उपलब्ध कराते हैं. इसी सामुदायिक गहराई ने तालिबान को वर्षों तक अमेरिकी और नाटो सेनाओं से भी लड़ने में क्षमता दी, और अब पाकिस्तान के लिए भी चुनौती खड़ी की है.

यह भी पढ़ें-  Pakistan Afghanistan War LIVE: पाक ने तालिबान के खिलाफ किया खुली जंग का ऐलान, सुलह कराने ईरान आया सामने

4. पाकिस्तान की रणनीतिक सीमाएं भी समस्या बढ़ाती हैं

पाकिस्तान भले ही एयरस्ट्राइक में भारी नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहा हो, लेकिन सीमाई इलाकों में अपनी पोस्टों की लंबी लाइन, तालिबान के छोटे-छोटे मॉड्यूल, सीमांत क्षेत्रों की गहरी सामाजिक जटिलताएं, उसे तालिबान के खिलाफ निर्णायक बढ़त नहीं लेने देतीं.

इसके अलावा, कई बार पाकिस्तान के दावे और तालिबान के दावे एक-दूसरे से मेल नहीं खाते, जिससे सूचनात्मक युद्ध भी चल रहा है. जैसे तालिबान ने पाक जेट मार गिराने और सैनिकों को बंदी बनाने का दावा किया, जिसे पाकिस्तानी पक्ष चुनौती देता है.

परमाणु हथियारों और आधुनिक सेनाओं के बावजूद जंग की जमीन पर निर्णायक जीत हमेशा टोही, भूगोल और स्थानीय समर्थन तय करता है. और यही तीन चीजें तालिबान को पाकिस्तान के सामने मजबूती देती हैं. डूरंड लाइन पर चल रही मौजूदा संघर्ष स्थिति, दोनों देशों के बीच पहले से बिगड़े रिश्तों को और खतरनाक दिशा में धकेल रही है.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Pakistan Afghanistan, Pakistan Afghanistan Border Clash, Pakistan Afghanistan War, Pakistan Afghanistan War 2026, Pakistan Afghanistan War Latest Updates
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com