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This Article is From Mar 01, 2011

दबाव के बावजूद गद्दी छोड़ने को तैयार नहीं गद्दाफी

त्रिपोली/वाशिंगटन: लीबिया के तानाशाह कर्नल मुअम्मार गद्दाफी पर गद्दी छोड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन इनसे बेखौफ इस तानाशाह ने साफ संकेत दिए हैं कि वह फिलहाल पीछे हटने वाले नहीं हैं। देश के अधिकांश हिस्सों में हालांकि मंगलवार को भी सरकार विरोधियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष हुआ। गद्दाफी पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने लीबिया की लगभग 30 अरब डॉलर की सम्पत्ति जब्त कर ली है। राजकोष विभाग में आतंकवाद एवं वित्तीय खुफिया मामलों के प्रमुख अधिकारी डेविड कोहेन ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के इतिहास में यह अपने तरह की अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय कार्रवाई है। इसके पहले अमेरिका ने पिछले शुक्रवार को लीबिया पर प्रतिबंध लगाए थे और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शनिवार को सर्वसम्मति से प्रतिबंधों के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून से मुलाकात की। बाद में बान ने संवाददाताओं से कहा कि इस दिशा में और अधिक कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है। बान ने कहा कि जब गद्दाफी ने लीबियाई जनता के खिलाफ युद्ध की घोषणा की, तभी उन्होंने अपनी वैधानिकता खो दी थी। उन्होंने कहा, "इस स्थिति को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता। मैं उम्मीद करता हूं और उनसे आग्रह करता हूं कि वे जनता की आवाज सुनें।" अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में कहा कि सभी विकल्प खुले हुए हैं। उन्होंने कहा, "गद्दाफी और उनके सहयोगियों को अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों और शालीनता के उल्लंघन के लिए उनके द्वारा की गई कार्रवाईयों की पूरी जवाबदेही लेनी चाहिए।" क्लिंटन ने कहा, "उन्होंने अपने कार्यो से सरकार चलाने की वैधानिकता खो दी है।" समाचार पत्र 'न्यूयार्क टाइम्स' में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि क्लिंटन ने गद्दाफी से कहा है कि उन्हें और हिंसा किए बगैर अविलम्ब सत्ता छोड़ देनी चाहिए। लेकिन गद्दाफी ने सोमवार को बीबीसी के साथ बातचीत में कहा था कि उनके पास छोड़ने के लिए कोई ऐसा पद नहीं है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को अल कायदा का सदस्य बताया था। गद्दाफी से जब अंतरराष्ट्रीय दबावों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "यदि वे चाहते हैं कि मैं गद्दी छोड़ दूं, तो आखिर मैं कौन-सा गद्दी छोड़ दूं? मैं कोई बादशाह तो नहीं हूं।" गद्दाफी ने कहा, "नहीं, नहीं, हमारे खिलाफ कोई नहीं है.. वे सभी मुझसे प्रेम करते हैं। वे मेरी और मेरे लोगों की हिफाजत के लिए अपनी जान दे देंगे।" गद्दाफी ने इस बात पर जोर का ठहाका लगाया था कि वह लीबिया छोड़कर भाग गए हैं। उधर, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी दूत सुसान राइस ने कहा है कि गद्दाफी भ्रमित हो गए हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने ही लोगों का कत्लेआम कर रहे हैं, जो बताता है कि वह सरकार चलाने के लिए कितने अयोग्य हैं। फ्रांस और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों ने क्लिंटन के सुर में सुर मिलाया है, जबकि जर्मनी ने लीबिया के खिलाफ 60 दिनों के लिए वित्तीय लेन-देन पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव किया है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख, कैथरीन एस्टन के एक प्रवक्ता ने कहा कि विपक्ष के साथ सम्पर्क स्थापित किए जा रहे हैं। इटली के विदेश मंत्री ने रविवार को लीबिया के साथ एक दूसरे के खिलाफ युद्ध से बचने सम्बंधी संधि को इस आधार पर स्थगित कर दिया कि अब लीबिया का अस्तित्व नहीं रह गया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने घोषणा की, "कर्नल गद्दाफी के जाने का समय आ गया है।" मेक्सिको की विदेश मंत्री पेट्रीसिया एस्पिनोसा ने जेनेवा में कहा है कि गद्दाफी सरकार द्वारा लीबिया में जारी दमनात्मक कार्रवाई 'मानवता के खिलाफ अपराधों' की श्रेणी में आता है। एस्पिनोसा ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 16वें नियमित सत्र में अपने सम्बोधन में कहा, "हम सभी शर्मिंदा हैं और यह बिल्कुल असह्य है, क्योंकि यह मानवता के खिलाफ अपराध है, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का क्रूरता के साथ दमन है।" एस्पिनोसा ने कहा, "नागरिकों की जायज मांगों के आलोक में केवल बातचीत और न्याय ही स्वीकार्य है। लेकिन गद्दाफी शासन द्वारा अपने ही नागरिकों के खिलाफ की जा रही हिंसा अस्वीकार्य है।" पिछले सप्ताह मेक्सिको के राष्ट्रपति फीलिप काल्डेरॉन ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई के लिए गद्दाफी सरकार की निंदा की थी। यूरोपीय संघ ने सोमवार को लीबिया पर कई सारे प्रतिबंध लगा दिए। इसमें हथियारों की आपूर्ति पर प्रतिबंध के साथ ही वीजा प्रतिबंध तथा गद्दाफी व उनके 25 पारिवारिक सदस्यों व सम्बंधियों की सम्पत्तियां जब्त करना शामिल है। उधर, लीबिया सरकार के प्रवक्ता मूसा इब्राहिम ने उन खबरों का खण्डन किया है, जिनमें कहा गया था कि कर्नल गद्दाफी के वफादारों ने नागरिकों पर गोलियां बरसाई थी। मूसा इब्राहिम ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "कोई नरसंहार नहीं हुआ, कोई बमबारी नहीं हुई, नागरिकों के खिलाफ कोई हिंसा नहीं की गई।" संवाददाता सम्मेलन में विदेशी पत्रकार भी मौजूद थे। लेकिन मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि लीबिया में पिछले दो सप्ताहों से जारी सरकार विरोधी अशांति में लगभग 1,000 लोग मारे गए हैं और 100,000 से अधिक पलायन कर गए हैं। दूसरी ओर सोमवार को सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने चार लीबियाई शहरों पर कब्जा कर लिया और मुअम्मार गद्दाफी के 41 वर्ष के शासन की समाप्ति के लिए एक परिषद का गठन किया। अल जजीरा के अनुसार, जिन इलाकों पर सरकार विरोधियों ने कब्जा कर लिया है, उनमें अज-जाविया, मिसुराता, बेनघाजी और अल बैदा शामिल हैं। लेकिन, मंगलवार को मुअम्मार गद्दाफी के वफादार सुरक्षा बलों ने विरोधियों द्वारा कब्जाए गए इलाकों को फिर से हासिल करने की कोशिश की। इस कारण कई स्थानों पर संघर्ष होने की खबर है। समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार, कार्यकर्ताओं द्वारा ऑनलाइन जारी किए गए संदेशों में कहा गया है कि देश के पश्चिमी हिस्से में लगातार संघर्ष होता रहा, क्योंकि सुरक्षा बलों ने अल-जाविया शहर पर फिर से कब्जा करने की कोशिश की। राजधानी त्रिपोली के दक्षिण में लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि सभी प्रमुख चौराहों पर टैंकों और विमानरोधी दस्तों को तैनात किया गया है।

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