विज्ञापन
This Article is From Jan 15, 2026

Explained: ट्रंप vs ग्रीनलैंड: अगर अमेरिका दबाव बढ़ाए तो यूरोप कैसे बचा सकता है आर्कटिक का 'रत्न'?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे टर्म में ग्रीनलैंड (डेनमार्क का सेमी-ऑटोनॉमस क्षेत्र) को अमेरिका के कंट्रोल में लाने की जोरदार कोशिश तेज कर दी है. उन्होंने इसे नेशनल सिक्योरिटी का बड़ा मुद्दा बताया है. आर्कटिक में रूस और चीन की बढ़ती मौजूदगी को रोकने के लिए वो ऐसा कर रहे हैं.

Explained: ट्रंप vs ग्रीनलैंड: अगर अमेरिका दबाव बढ़ाए तो यूरोप कैसे बचा सकता है आर्कटिक का 'रत्न'?
  • डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को US की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य मानते हैं.
  • डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने साफ किया है कि उनकी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा और अमेरिकी दबाव अस्वीकार्य है.
  • अमेरिका का ग्रीनलैंड में एक सैन्य बेस है जहां सीमित संख्या में सैनिक रडार और स्पेस सर्विलांस के लिए तैनात हैं.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर अड़े हुए हैं. उनका दावा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है और इसके बिना अमेरिका सुरक्षित नहीं रह सकता. यही जिद अब यूरोप के लिए एक बड़ा रणनीतिक सिरदर्द बन गई है.

डेनमार्क और ग्रीनलैंड साफ कह चुके हैं कि संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा, लेकिन सवाल यह है कि अगर वॉशिंगटन दबाव बढ़ाता है या आक्रामक रुख अपनाता है, तो यूरोप के पास बचाव के क्या विकल्प हैं?

वॉशिंगटन में डेनमार्क-ग्रीनलैंड की बैठक कैसी रही?

14 जनवरी को डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्ज़फेल्ट ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की. यह बैठक इसलिए अहम थी क्योंकि ट्रंप बार-बार कह चुके हैं कि अमेरिका को ग्रीनलैंड चाहिए.

बैठक के बाद डेनमार्क ने साफ कर दिया:

  • अमेरिका और डेनमार्क के बीच ग्रीनलैंड की स्थिति पर बुनियादी असहमति है.
  • ट्रंप अपने इरादे से पीछे नहीं हटे.
  • अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं पर बात हो सकती है, लेकिन संप्रभुता डेनमार्क की रेड लाइन है.

डेनमार्क के एक मंत्री एंडर्स फोग रासमुसेन ने कहा, 'हम अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा कर सकते हैं, लेकिन डेनमार्क की सीमाओं और ग्रीनलैंड की हैसियत से कोई समझौता नहीं होगा.' हालांकि, दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति जताई.

ग्रीनलैंड में अमेरिका पहले से कितना मौजूद है?

अमेरिका कोई नया खिलाड़ी नहीं है. 1951 के समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी का अधिकार है. फिलहाल उत्तर-पश्चिम ग्रीनलैंड में एक बेस है. यहां 200 से भी कम अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. यह बेस स्पेस सर्विलांस और रडार अर्ली वॉर्निंग के लिए इस्तेमाल होता है. डेनमार्क पहले ही कह चुका है, 'अगर अमेरिका सुरक्षा के नाम पर अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है, तो वह मौजूदा ढांचे में कर सकता है.'

ट्रंप की चिंता दूर करने के लिए डेनमार्क और नाटो क्या कर रहे हैं?

डेनमार्क ने ऐलान किया है कि आर्कटिक और नॉर्थ अटलांटिक में सैन्य ताकत बढ़ाई जाएगी. यह सब नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर होगा.

अब तक जर्मनी, फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन के सैनिक ग्रीनलैंड पहुंचे हैं. नीदरलैंड, कनाडा भी सैन्य अभ्यास में शामिल हुए हैं. NATO आर्कटिक में अपनी मौजूदगी की समीक्षा भी कर रहा है.

इन सबका मकसद साफ है, 'अमेरिका को यह दिखाना कि सुरक्षा की जरूरतें बिना संप्रभुता बदले भी पूरी हो सकती हैं.'

अगर ट्रंप दबाव बढ़ाते हैं तो यूरोप क्या कर सकता है?

Latest and Breaking News on NDTV

यूरोपीय नीति-निर्माताओं के सामने तीन रणनीतियां हैं:

1. तनाव कम करना

वर्किंग ग्रुप: नाटो के तहत 'आर्कटिक सेंट्री' जैसे निगरानी मिशन. संयुक्त सैन्य अभ्यास को बढ़ावा देना आदि शामिल है.

2. डराना (Deterrence)

ग्रीनलैंड में यूरोपीय सैनिकों की रोटेशनल तैनाती. बिना स्थानीय अनुमति खनन करने वाली अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध. रिपब्लिकन सांसदों और अमेरिकी सिस्टम के भीतर लॉबिंग करने जैसे कदम EU उठा सकता है. 

3. इंतजार करना (Wait and Watch)

कुछ यूरोपीय नेता मानते हैं कि ट्रंप का ध्यान ईरान, चुनाव, घरेलू राजनीति में बंट सकता है. ग्रीनलैंड सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है. ऐसे में इंतजार करना भी एक तरह की रणनीति का हिस्सा है. 

ट्रंप ग्रीनलैंड पर इतना जोर क्यों दे रहे हैं?

ग्रीनलैंड की अहमियत तीन बड़े कारणों से बढ़ी है:

1. आर्कटिक में रणनीतिक स्थिति

जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिघल रही है. यूरोप-एशिया के बीच नए समुद्री रास्ते खुल सकते हैं. वैश्विक व्यापार के समीकरण बदल सकते हैं.

2. दुर्लभ खनिज संसाधन

ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ मिनरल्स, स्मार्टफोन, कंप्यूटर और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली धातुएं पाई जाती हैं. हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि ये खनिज मोटी बर्फ के नीचे हैं. खनन बेहद महंगा और तकनीकी रूप से कठिन है. 

3. मिसाइल डिफेंस और चीन-रूस फैक्टर

ट्रंप का दावा है कि रूस और चीन आर्कटिक में सक्रिय हैं. ग्रीनलैंड अमेरिका की मिसाइल डिफेंस 'गोल्डन डोम' के लिए जरूरी है. लेकिन जानकारों की मानें तो ग्रीनलैंड के पानी में नाटो मिशन की कोई ठोस सुरक्षा जरूरत नहीं दिखती.

क्या विशेषज्ञ ट्रंप के दावों से सहमत हैं?

नहीं. आर्कटिक विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीनलैंड के आसपास रूस-चीन की गतिविधि सीमित है. नाटो मिशन की तत्काल जरूरत नहीं है. खनिज निकालना बेहद महंगा और जटिल है.

क्या अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा सकता है?

हां, लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सहमति जरूरी होगी. डेनमार्क पहले ही कह चुका है कि मौजूदा समझौतों के तहत विस्तार संभव है.

क्या यूरोप अमेरिका से ट्रेड वॉर छेड़ सकता है?

इस बारे में बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में कुछ सख्त विकल्पों पर चर्चा जरूर है:

इनमें EU-US ट्रेड डील रोकना. अमेरिकी टेक कंपनियों पर सख्ती करना. यूरोप में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर सवाल उठाने जैसे विकल्प शामिल हैं.

इस कदम के साथ ही डर यह भी है कि यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद प्रभावित हो सकती है.

हालांकि इस मुद्दे पर यूरोपीय नेताओं की राय एक जैसी नहीं है.

फ्रांस और डेनमार्क सख्त रुख में हैं. जर्मनी और कुछ देश कूटनीति के पक्ष में हैं. यानी नाटो खुलकर ट्रंप के समर्थन में नहीं है. मतलब साफ है कि यूरोप एकजुट तो है, लेकिन कितनी दूर जाएगा, इस पर आम सहमति नहीं है. 
 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Greenland, Greenland America, Greenland America Europe, EU Vs USA, Trump On Greenland
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com