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This Article is From Jan 28, 2026

डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को खरीदने की जिद, किसी देश को खरीदना कितना मुमकिन?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने की बात को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं. पहले भी उन्होनें कई बार ग्रीनलैंड को खरीदने की बात कही है.

डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को खरीदने की जिद, किसी देश को खरीदना कितना मुमकिन?
क्या किसी देश को खरीदा जा सकता है?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सार्वजनिक रूप से कहे गए बयान को लेकर चर्चा में आ गए  हैं. उन्होनें  ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जताई है और उनके इस प्रस्ताव ने पूरी देश में राजनीतिक और कूटनीतिक बहस छेड़ दी है. हालांकि ग्रीनलैंड को बेचे जाने से डेनमार्क ने साफ मना कर दिया है. फिलहाल इस मुद्दे को लेकर ट्रंप काफी नाराज हैं और किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड को हथियाना चाहते हैं. 

बता दें कि ग्रीनलैंड (Greenland),विश्व का सबसे बड़ा द्वीप है, जो उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों के बीच में स्थित है. यह डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है. जो भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप का हिस्सा है .इसके क्षेत्रफल का 80% से ज्यादा  हिस्सा बर्फ की चादर से ढका रहता है. 

क्या कोई देश दूसरे देश को खरीद सकता है?

तर्राष्ट्रीय कानून के अधीन किसी एक देश के द्वारा दूसरे देश को खरीदना या बेचना लगभग नामुमकिन और गैर कानूनी है. संप्रभुता का नियम कहता है कि कोई देश कोई निजी संपत्ति या जमीन का टुकड़ा नहीं है, जिसकी खरीद-फरोख्त की जा सके. संयुक्त राष्ट्र चार्टर हर राष्ट्र को एक संप्रभु इकाई के रूप में साफ तौर से परिभाषित किया है कि किसी भी देश की जमीन, सरकार और वहां रहने वाले लोग स्वतंत्र हैं. सरकार किसी कंपनियों की तरह अपने देश का मालिक नहीं होतीं. इसलिए वहां की मौजूदा सरकार के पास उसे बेचने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता है. इसे केवल लोगों की इच्छा के जरिए ही वैध बनाया जा सकता है.    

 जनता की होनी चाहिए सहमति

अंतरराष्ट्रीय कानून के सबसे मौलिक सिद्धांत में से एक आत्मनिर्णय का अधिकार है. इसका सिद्धांत होता है कि किसी भी देश का भविष्य वहां की जनता के इच्छा से तय होता है. आज के अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी क्षेत्र को उसकी जनता की इच्छा के बिना नहीं बेचा जा सकता है.

 सीधे तौर पर खरीदना  नामुमकिन 

वर्तमान के समय में किसी देश को सीधे तौर पर खरीदना नामुमकिन है, लेकिन आर्थिक संसाधनों की मदद से उस देश पर दबाव डाला जा सकता है. अधिकांश मामलों में देखा गया है कि कुछ देश गंभीर कर्ज में डूबे होने के कारण बंदरगाह या रणनीतिक संपत्तियों को लंबे समय के लिए लीज (पट्टे) पर दे देते हैं. जिसे डेट ट्रैप डिप्लोमेसी कहा जाता है.

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