- एस्टोनिया के रक्षा मंत्री ने EU के पैसे से यूक्रेन के लिए तोप के गोले खरीदने के विवाद के बाद इस्तीफा दिया
- तोप के गोलों की खरीद एक इटली रजिस्टर्ड कंपनी डाटासेल एसआरएल से हुई, जिसका मालिकाना हक भारतीय कंपनी के पास है
- एस्टोनिया में खरीद प्रक्रिया में देरी और घटिया गुणवत्ता की शिकायतों के कारण सरकारी जांच शुरू कर दी गई थी
महज 13 लाख की आबादी वाले एक देश में एक रक्षा मंत्री को मजबूरन दबाव में इस्तीफा देना पड़ा है और इसके पीछे एक भारतीय कंपनी का नाम आ रहा है. हम बात कर रहे हैं उत्तरी यूरोपीय देश एस्टोनिया की. एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने सरकार से इस्तीफा दे दिया है. ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ के अनुसार यह फैसला यूरोपीय संघ (EU) के पैसों से यूक्रेन के लिए तोप के गोले खरीदने से जुड़े एक विवादित डील को लेकर हुए हंगामे के बाद आया. इन गोलों को एक ऐसी कंपनी से खरीदा जाना था, जिसका मालिकाना हक एक भारतीय कंपनी के पास है.
क्या है पूरा मामला?
हानो पेवकुर 2022 से एस्टोनिया के रक्षा मंत्री के पद पर थे. लेकिन उन्होंने बुधवार देर रात एक टीवी प्रोग्राम में आकर अपने इस्तीफे का ऐलान किया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 1991 में एस्टोनिया की आजादी के बाद से वह सबसे लंबे समय तक मंत्री पद पर रहने वाले मंत्री रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जाने जाते हैं.
हानो पेवकुर पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ रहा था. इसकी वजह यह थी कि एस्टोनिया के सरकारी प्रोसेक्यूटर ऑफिस ने ही गोला-बारूद खरीदने की प्रक्रिया की आपराधिक जांच शुरू कर दी थी. इस खरीद प्रक्रिया में गोले पहुंचाने में काफी देरी हुई थी और घटिया गुणवत्ता वाले गोले मिलने की भी शिकायतें थीं. इस डील के लिए पैसा यूरोपीय संघ ने दिया था. यह कई अरब यूरो की उस सैन्य मदद का हिस्सा था, जिसके तहत रूस के हमले के बीच यूक्रेन के हथियारों के भंडार को मजबूत किया जा रहा है. उस समय 155 मिलीमीटर के तोप के गोलों की भारी कमी थी. एस्टोनिया के रक्षा मंत्रालय की खरीद एजेंसी ने 2024 में सामान की सप्लाई पक्की करने के लिए कंपनी को बड़ी रकम पहले ही दे दी थी.
भारतीय कंपनी का क्या कहना है?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ‘जयसवाल नेको इंडस्ट्रीज' के डायरेक्टर रमेश जयसवाल ने इन खबरों पर सवाल उठाए. जयसवाल नेको इंडस्ट्रीज ही ‘नेको डिफेंस सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड' की मूल कंपनी है. रिपोर्ट के अनुसार रमेश जयसवाल ने कहा, “हमने एस्टोनिया के संबंधित अधिकारियों की गुणवत्ता जांच के बाद तोप के गोले भेजे थे. इसके बाद उन्होंने हमें और ठेके दिए, लेकिन बाद में पैसों की कमी के कारण उन्हें रोक दिया गया.”
बता दें कि अगस्त में एस्टोनिया की सत्ताधारी गठबंधन सरकार ने संसद में अपना बहुमत खो दिया था. ऐसे में अगर पेवकुर अपने पद पर बने रहते, तो विपक्ष उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता था और उनके हटने की संभावना काफी बढ़ जाती.
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