- स्पेन के अखबार के अनुसार, पुतिन मेडिटेरेनियन में ड्रोन हमलों की साजिश रच रहे हैं
- रूस यूक्रेन को सैन्य मदद देने वाले देशों पर समुद्र से ड्रोन हमले कर राजनीतिक और आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है
- पश्चिमी खुफिया एजेंसियां रूस के सीमित नाटो हमलों की चेतावनी दे रही हैं, जिनमें भूमध्य सागर क्षेत्र भी शामिल है
स्पेन के एक अखबार का दावा है कि व्लादिमीर पुतिन मेडिटेरेनियन में टूरिस्ट जगहों पर ड्रोन हमले की साजिश रच रहे हैं. दावा है कि मर्चेंट जहाजों से लॉन्च किए गए अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAVs) का इस्तेमाल करके स्पेन, फ्रांस या इटली पर हमले हो सकते हैं. 'एल मुंडो' के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियों ने एक डिटेल्ड रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें छुट्टियों की जगहों पर रूस के संभावित ऑपरेशन के बारे में चेतावनी दी गई है.
कैसे होगा हमला
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन की तरह, जिन तीनों देशों पर खतरा बताया जा रहा है, वे सभी रूस के साथ युद्ध में यूक्रेन को सैन्य मदद दे रहे हैं. यूक्रेन के ब्लैक सी रिसॉर्ट ओडेसा में, पुतिन की सेना ने समुद्र तट पर आने वाले लोगों को लगातार डराया-धमकाया है, भले ही उनके निशाने जमीन के अंदर के इलाके रहे हों. अखबार ने इन दावों के पीछे के अमेरिकी अधिकारियों का नाम नहीं बताया है, लेकिन नाटो के सदस्य लिथुआनिया में रक्षा-संबंधी एक सूत्र ने कहा, 'वे समुद्र से लॉन्च किए गए और कार्गो कंटेनरों में छिपाए गए ड्रोन का इस्तेमाल करेंगे. यह बहुत मुश्किल काम नहीं है.'

इस योजना के तहत, पुतिन के गेरबेरा ड्रोन को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में, संभवतः तट से 125 से 190 मील दूर, व्यापारिक जहाजों से लॉन्च किया जा सकता है. गेरबेरा की पेलोड क्षमता इतनी है कि इससे आग लग सकती है, खुले में रखे उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है या कुछ समय के लिए बंदरगाह या हवाई अड्डे को बंद करना पड़ सकता है. रिपोर्ट में किसी खास टारगेट का नाम नहीं लिया गया. 'इसका असर न सिर्फ चीजों या इंफ्रास्ट्रक्चर पर, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक तौर पर भी हो सकता है.'
कई देशों की चेतावनी
यह रिपोर्ट पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों की उन चेतावनियों के बीच आई है, जिनमें कहा गया है कि रूस कुछ महीनों के अंदर ही NATO देशों पर सीमित हमले कर सकता है. अब तक, यह खतरा मुख्य रूप से उत्तरी यूरोप में महसूस किया गया है, जहां ड्रोन पहले ही NATO देशों - पोलैंड, रोमानिया, लिथुआनिया और लातविया - के साथ-साथ पश्चिमी देशों के समर्थक मोल्दोवा के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर चुके हैं. जर्मनी भी लीपज़िग में रूसी ड्रोन ऑपरेशन का शिकार हो चुका है.
अखबार के सूत्रों का कहना है कि एक महीने पहले CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा और पुतिन के खुफिया प्रमुखों के साथ बातचीत के बाद यूरोपीय देशों को रूसी खतरे (जिसमें भूमध्य सागर का इलाका भी शामिल है) के बारे में चेतावनी दी गई थी. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 16 सितंबर को अपनी डिफेंस काउंसिल की बैठक बुलाई थी और दो दिन बाद, उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और 2027 के राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवारों को एलिसी पैलेस बुलाया.

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भी माना कि उन्हें यूक्रेन को हथियार सप्लाई करने वाले देशों पर रूसी हमलों की चेतावनी मिली थी. इस बीच, यूरोप के खुफिया प्रमुखों ने चेतावनी दी है कि रूस NATO की परीक्षा ले सकता है; एक अधिकारी का कहना है कि हमला कुछ ही महीनों में हो सकता है.'द गार्जियन' से बात करते हुए, चेक गणराज्य की BIS सुरक्षा सेवा के प्रमुख मिशाल कौडेलका ने कहा कि NATO के इलाके में रूस की घुसपैठ संभव है. उन्होंने कहा, 'इसके साथ ही, 'फॉल्स-फ्लैग' उकसावे की कार्रवाई और प्रभाव डालने वाले अभियान कुछ ही महीनों में शुरू हो सकते हैं, इसमें सालों नहीं लगेंगे.'
कुछ इसे मान रहे सिर्फ डर
वहीं, लातविया की राज्य सुरक्षा सेवा VDD के डायरेक्टर जनरल नोरमुंड्स मेज़विट्स ने कहा कि हालांकि मॉस्को के यूरोप में दखल बढ़ाने के साफ संकेत हैं, लेकिन एजेंसी को 'तुरंत हमले के कोई संकेत नहीं' दिख रहे हैं. उन्होंने आगे कहा, 'यह अभी भी एक खुला सवाल है कि क्या उनके पास सीधे और ठोस प्लान हैं या यह पश्चिमी समाज में डर और अनिश्चितता फैलाने की उनकी कोशिशों का ही एक हिस्सा है.' मिस्टर मेज़विट्स ने कहा कि यह एक अच्छी बात है कि पश्चिमी यूरोप को रूस से होने वाले खतरे का एहसास हो गया है.
स्वीडन की मिलिट्री इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी सर्विस के प्रमुख थॉमस निल्सन ने 'द गार्डियन' को बताया, 'मुझे ऐसे कोई संकेत नहीं दिखे हैं, जिनसे लगे कि मॉस्को में असली बातचीत को लेकर कोई गंभीर विचार-विमर्श हो रहा है. मेरा मानना है कि वे अभी भी सोच रहे हैं कि वे अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल कर सकते हैं, इसलिए वे बस बातचीत का दिखावा कर रहे हैं.' तीनों खुफिया प्रमुख इस बात पर सहमत थे कि आने वाले महीनों में रूस का 'शैडो वॉर' (गुप्त युद्ध) और तेज हो सकता है.
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