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पांडवों के वंश का वर्चस्व खत्म हुआ तो मगध का हुआ उदय, जानिए किस राजा ने रखी नींव

भारत के इतिहास में मगध का स्थान हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है. जब अयोध्या का वर्चस्व था तब भी और जब हस्तिनापुर का था तब भी. मगर जब पांडवों के कुल हस्तिनापुर छोड़ कौशांबी चला आया तो धीरे-धीरे मगध ने सबसे शक्तिशाली साम्राज्य बनने की शुरूआत कर दी.

पांडवों के वंश का वर्चस्व खत्म हुआ तो मगध का हुआ उदय, जानिए किस राजा ने रखी नींव
हस्तिनापुर के समाप्त होने के बाद मगध का उदय हुआ.
  • युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के विरोध में मगध के चंद्रवंशी राजा जरासंघ ने भीम से बारह दिन तक कुश्ती की और हार गया
  • जरासंघ के वंश का अंत हुआ जब मंत्री शुनक ने राजा रिपुंजय को मारकर मगध की सत्ता अपने बेटे प्रद्योत को सौंप दी
  • शुनक के पुत्र प्रद्योत के बाद शिशुनाग वंश ने मगध पर कब्जा किया और राजधानी राजगृह स्थापित की

युधिष्ठिर ने जब राजसूय यज्ञ करने का संकल्प लिया तो भगवान कृष्ण ने पांडवों को बताया कि मगध का चंद्रवंशी राजा जरासंघ ऐसा नहीं होने देगा. फिर कृष्ण ब्राह्मण वेश में भीम और अर्जुन को लेकर मगध पहुंचे. वहां उन्होंने जरासंघ से उन तीनों में से किसी एक से कुश्ती करने की चुनौती जरासंघ को दी. पहले तो जरासंघ ने इसे मजाक समझा पर जब कृष्ण जिद पर अड़े रहे तो उसने भीम की मजबूत कदकाठी देखते हुए उनसे लड़ना चुना.

ऐसे हुआ जरासंघ का वंश समाप्त

13 दिन तक लगातार दोनों लड़ते रहे. आखिरकार भीम ने जरासंघ के दो टुकड़े कर दिए. इसके बाद उसका राज्य जरासंघ के बेटे सहदेव को सौंप दिया. महाभारत युद्ध शुरू हुआ तो सहदेव पांडवों के पक्ष में लड़ने पहुंचा पर मारा गया. इसके बाद उसका उत्तराधिकारी सोमाधि गिरित्रजका मगध का राजा बना. उसके वंश में श्रुतश्रवा आदि कई राजा हुए. मत्स्य पुराण में इसके वंश के राजाओं की संख्या 32 बताई गई है. इस वंश का अंतिम राजा रिपुंजय हुआ. इस समय तक पांडवों का वंश भी कमजोर हो चुका था और कौशांबी आ गया था. रिपुंजय कमजोर राजा साबित हुआ और उसके ही मंत्री शुनक ने उसे मार डाला और इस तरह से जरासंघ के वंश का मगध से शासन समाप्त हो गया. 

फिर मगध पर बैठा शिशुनाग वंश

विश्वेश्वर रेउ की किताब 'भारत के राजवंश' के अनुसार, शुनक ने अपने बेटे प्रद्योत को मगध का नया राजा बनाया. उसका वंश पांच पीढ़ियों तक मगध पर राज करता रहा. इस समय और राजा तो थे पर मगध से कोई उलझना नहीं चाहता था. मगध की सेना बहुत ताकतवर मानी जाती थी. इस समय तक राज्य छोटे-छोटे हो गए थे. मत्स्य और वायु पुराण के अनुसार, प्रद्योत की पांच पीढ़ियों के बाद शिशुनाग ने मगध पर कब्जा कर लिया. उसने अपनी राजधानी राजगृह को बनाया. ये गया के पास है. शिशुनाग के बारे में पता चलता है कि वो काशी का राजा था और वहीं से आकर उसने मगध पर अपना कब्जा जमाया. बताया जाता है कि इसने 40 साल मगध के जरिए पूरे भारत पर राज किया. शिशुनाग के बाद उसका उत्तराधिकारी शाकवर्ण बना. इसने भी 36 साल तक मगध औ भारत पर राज किया. उसके बाद क्षेमधर्मा, क्षत्रौजा और फिर बिम्बिसार राजा बना. 

बिम्बिसार ने मगध का किया विस्तार

बिम्बिसार ने मगध का विस्तार पूर्वी राज्यों में किया था, इसलिए अजातशत्रु ने अपना ध्यान उत्तर और पश्चिम पर केंद्रित किया। उसने कोसल एवं पश्चिम में काशी को अपने राज्य में मिला लिया. वृजी संघ के साथ युद्ध के वर्णन में 'महाशिला कंटक' नाम के हथियार का वर्णन मिलता है जो एक बड़े आकर का यन्त्र था, इसमें बड़े बड़े पत्थरों को उछलकर मार जाता था. इसके अलावा 'रथ मुशल' का भी उपयोग किया गया. 'रथ मुशल' में चाकू और पैने किनारे लगे रहते थे, सारथि के लिए सुरक्षित स्थान होता था, जहाँ बैठकर वह रथ को हांककर शत्रुओं पर हमला करता था. बिम्बिसार को भारत के बहुत ही महान राजाओं में गिना जाता है. वहीं उसका बेटा अजातशत्रु भी मगध और भारत के बहुत शक्तिशाली राजाओं में से एक माना जाता है. बिम्बिसार बुद्ध का दोस्त था. उसके दौरे में बौद्ध और जैन धर्म का बहुत विस्तार हुआ मगर यह अपने बेटे अजातशत्रु के हाथों मारा गया. 

बेटे के हाथों क्यों मारा गया बिम्बिसार 

बिम्बिसार ने दो शादियां की थी. एक कोशल के राजा के यहां और दूसरा लिच्छवि वंश में. इसी लिच्छवी वंश की पत्नी से अजातशत्रु का जन्म हुआ था. गौतम बुद्ध के चचेरे भाई देवदत्त को लगता था कि गौतम बुद्ध की प्रसिद्धी बिम्बिसार की दोस्ती के कारण है. इसलिए उसने अजातशत्रु को भड़काना शुरू किया. इसी कारण अजातशत्रु ने उन्हें मार दिया. हालांकि, जैन मान्यता के अनुसार, पता चलता है कि अजातशत्रु ने जब विम्बिसार को जेल में डाला तो कुछ दिनों बाद उसे एहसास हो गया कि उसने गलती की है पर तब तक उन्होंने जहर खा लिया था. अजातशत्रु का राज गंगा से हिमालय तक फैला था. इसने पाटलीपुत्र में एक किला भी बनवाया था. फिर इसके वंश का दसवां और आखिरी राजा महानंदी हुआ. मगर इस क्षत्रिय राजा की महापद्मनंद ने हत्या कर दी. महापद्मनंद की माता शुद्र थीं. दावा किया जाता है कि महापद्मनंद राजा महानंदी और शुद्र माता से जन्मा. इसने अपना साम्राज्य कुरु देश से लेकर दक्षिण में गोदावरी घाटी तक बढ़ाया. 

महापद्मनंद के वंश की कहानी भारत का इतिहास के तीसरे अंक में...  

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