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जापान और जर्मनी के बाद अब चीन की कारों का जमाना, ऑटोनोमस कारों पर अब फोकस

चीनी ईवी बाजार में कीमतों की जबरदस्त होड़ चल रही है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है. चीनी कंपनियां अब ब्राजील जैसे उभरते बाजारों में फैक्ट्री लगा रही हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं.

जापान और जर्मनी के बाद अब चीन की कारों का जमाना, ऑटोनोमस कारों पर अब फोकस
कार निर्माता कंपनियों में तकनीक की जंग छिड़ी हुई है और चीन अभी इसमें सबसे आगे है.
  • चीन की कंपनी वीराइड और लेनोवो ने 2031 तक वैश्विक स्तर पर 200,000 ऑटोनोमस कारें तैनात करने का लक्ष्य रखा है
  • लेनोवो, तकनीकी हार्डवेयर प्रदान करके वीराइड के स्वायत्त वाहनों के वैश्विक व्यावसायीकरण को बढ़ावा देगा
  • चीन इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और बिक्री में विश्व का सबसे बड़ा देश है
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चीन तेजी से इलेक्ट्रिक कारों में अपना दबदबा बनाता जा रहा है. चीन की वीराइड ने लेनोवो के साथ समझौते के तहत 2031 तक 200,000 ऑटोनोमस कारों का लक्ष्य रखा है. चीनी तकनीक कंपनी वीराइड और लेनोवो अगले पांच वर्षों में वैश्विक स्तर पर 200,000 ऑटोनोमस वाहन तैनात करने के लिए अपनी साझेदारी का विस्तार करेंगी. दक्षिणी चीनी शहर ग्वांगझू स्थित वीराइड, बीजिंग के बढ़ते ऑटोनोमस ड्राइविंग क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्रयासों में एक प्रमुख कंपनी है.

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ऑटोनोमस कार कैसी होगी

ऑटोनॉमस कारें (स्वायत्त वाहन) ऐसी गाड़ियां हैं, जो बिना किसी इंसान के हस्तक्षेप के सेंसर, कैमरा, रडार, LiDAR और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग करके खुद चल सकती हैं. ये 360-डिग्री के वातावरण को समझकर, रास्ता खोजने, बाधाओं से बचने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने में सक्षम होती हैं. इनका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा बढ़ाना और मानवीय भूल को कम करना है. अभी ज्यादातर गाड़िया लेवल 0-2 (वर्तमान में सामान्य) की हैं. इसमें चालक को सतर्क रहना पड़ता है, लेकिन कारें क्रूज कंट्रोल या पार्किंग में सहायता कर सकती हैं. लेवल 3 अभी सिर्फ कुछ लक्जरी कारों में यह तकनीक उपलब्ध है, जो विशिष्ट परिस्थितियों में नियंत्रण ले सकती है. मगर लेवल 4-5 भविष्य की गाड़ियां होंगी. ये कारें लगभग पूरी तरह से स्वायत्त होंगी, जहां लेवल 5 में किसी भी मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होगी. चीन इसी की तैयारी में है. 

क्या होगा ऑटोनोमस वाहनों में 

चीन की कंपनियों के बयान में बताया गया है, “2026 से शुरू होकर, दोनों कंपनियां अगले पांच वर्षों में वैश्विक स्तर पर 200,000 ऑटोनोमस वाहन (AVs), जिनमें रोबोटैक्सी भी शामिल हैं, संयुक्त रूप से तैनात करने की उम्मीद करती हैं.बयान के साथ जारी एक तस्वीर में, कंपनी के अधिकारी ऑटो चाइना 2026 के दौरान आयोजित एक हस्ताक्षर समारोह में हाथ मिलाते हुए देखे गए. ऑटो चाइना 2026 वर्तमान में बीजिंग में चल रहा दुनिया का सबसे बड़ा कार शो है.

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वीराइड के संस्थापक और सीईओ टोनी हान ने कहा, “ऑटोनोमस ड्राइविंग वाणिज्यिक तैनाती के एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जिसमें उद्योग की प्रतिस्पर्धा केवल तकनीकी क्षमता से हटकर लागत दक्षता और व्यापक तैनाती की ओर बढ़ रही है.” यह अनुमान लगाया गया है कि 2035 तक चीन में संचालित साझा यात्री वाहनों के कुल बेड़े में रोबोटैक्सी का एक बड़ा हिस्सा होगा. इससे चीन सबसे बड़ा रोबोटैक्सी सेवा क्षेत्र बनकर उभरेगा और वैश्विक बाजार हिस्सेदारी के आधे से अधिक हिस्से पर कब्जा कर लेगा.

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चीन इलेक्ट्रिक गाड़ियों का किंग

चीन अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उत्पादक और निर्यातक है. वर्ष 2024 में वैश्विक ईवी उत्पादन के 70% से अधिक और बिक्री के 67% हिस्से को चीन नियंत्रित करता है. उसके बीवाईडी (BYD) जैसे ब्रांड टेस्ला को पछाड़कर दुनिया के सबसे बड़े ईवी निर्माता बन गए हैं, जो अपनी सस्ती और उन्नत बैटरी तकनीक के दम पर वैश्विक बाजार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं. चीन की प्रमुख कार कंपनियों में बीवाईडी (BYD), टेस्ला चीन, SAIC-GM-Wuling, Aion, और चंगान ऑटोमोबाइल (Changan Automobile) शीर्ष खिलाड़ी हैं. चीनी ईवी अपनी कम कीमत और अत्याधुनिक बैटरी तकनीक (जैसे ब्लेड बैटरी) के लिए जाने जाते हैं, जिससे वे यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों के लिए कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं. इसका कारण ये है कि चीन बैटरी उत्पादन क्षमता के तीन-चौथाई हिस्से और लिथियम, कोबाल्ट व ग्रेफाइट के शोधन में भी हावी है, जिससे उत्पादन लागत कम रहती है. यही कारण है कि चीन ने 2024 में लगभग 5.9 मिलियन वाहन निर्यात किए, जिनमें से लगभग 40% इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड थे.

5 मिनट में चार्ज होंगी गाड़ियां

कभी कार के बाजार में जापान और जर्मनी का दबदबा होता था. अमेरिका और इटली की कंपनियां भी अच्छी मानी जाती थीं. मगर चीन ने तकनीक के दम पर सभी को पीछे छोड़ दिया है. हालांकि, चीनी ईवी बाजार में कीमतों की जबरदस्त होड़ चल रही है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है. चीनी कंपनियां अब ब्राजील जैसे उभरते बाजारों में फैक्ट्री लगा रही हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं.  चीन की कोशिश है कि उन्नत चार्जिंग तकनीक (जैसे 5 मिनट में 400 किमी रेंज) के साथ वैश्विक ऑटोमोटिव उद्योग में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की है.

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