वाशिंगटन:
अमेरिकी परमाणु विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जापान में आए भूकंप में नष्ट हुए परमाणु संयंत्र को ठंडा करने के लिए समुद्र के पानी का इस्तेमाल निराशापूर्ण कदम है। इससे चेर्नोबिल जैसी दुर्घटना हो सकती है। संवाददाताओं के साथ बातचीत में कई परमाणु विशेषज्ञों ने आशंका व्यक्त की कि फुकुशिमा परमाणु रिएक्टर संख्या-1 में हुए नुकसान के नतीजों से परे यह घटना परमाणिवक पुनर्जागरण को नुकसान पहुंचाएगी। इंस्टिट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज में परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए काम करने वाले रॉबर्ट अलवारेज का कहना है, स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो गई है, उनके पास संयंत्र को ठंडा करने के लिए साफ और सादा पानी नहीं है। और अब, इस निराशाजनक काम में वे समुद्र के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, मैं इस कदम को हेल मेरी पास के तौर पर देखता हूं हेल मेरी पास शब्द का इस्तेमाल अमेरिकी फुटबॉल में लंबे फॉरवार्ड पास के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जापान में शुक्रवार को आए 8.9 तीव्रता के भूकंप से इस परमाणु संयंत्र में अपातकाल लगाना पड़ा था। इसी में शनिवार को एक धमाका भी हुआ जिसके बाद सरकार को आसपास के इलाकों को खाली करवाना पड़ा। भूकंप से संयंत्र की कूलिंग प्रणाली खराब हो जाने के बाद कर्मचारियों ने उसे समुद्र के पानी से ठंडा करने की कोशिश की। परमाणु संयंत्र पर जो परेशानी हुई उसमें मेन पावर के साथ साथ बैकअप पावर भी खराब हो गया था।
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