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बांग्लादेश की जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में मंदिर के पास गोमांस बनाया, विरोध पर किया हंगामा, अब फिर से कर रहे दावत

इसके बाद छात्रों के एक समूह ने कैंपस में बड़े पैमाने पर बीफ दावत (गोमांस भोज) आयोजित करने की घोषणा की है. आयोजकों ने छात्रों से चंदा इकट्ठा करके एक गाय खरीदी है. खबर है कि 'बांग्लादेश छात्र मजलिस' ने भी एक और गाय देने का वादा किया है.

बांग्लादेश की जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में मंदिर के पास गोमांस बनाया, विरोध पर किया हंगामा, अब फिर से कर रहे दावत
विश्वविद्यालय में उग्र होकर छात्र-छात्राओं ने बीफ के लिए रैलियां निकालीं. (फोटो-सोशल मीडिया)
  • ढाका के जगन्नाथ विश्वविद्यालय में मंदिर के पास बीफ खिचड़ी पकाने को लेकर विवाद हुआ है
  • विश्वविद्यालय प्रशासन ने जानवरों की बलि पर रोक लगाने का नोटिस जारी किया, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया
  • मंदिर प्रतिनिधियों ने गाय काटने और बनाने पर रोक की मांग नहीं है पर मंदिर से दूर आयोजन करने की मांग की है

ढाका के जगन्नाथ विश्वविद्यालय में एक मंदिर के पास बीफ (गोमांस )खिचड़ी  पकाने को लेकर विवाद हो गया है. सोमवार को इस्लामिक इतिहास और संस्कृति विभाग के छात्रों की तरफ से आयोजित इस रात्रिभोज के बाद अब एक बार फिर बीफ भोज का आयोजन किया जा रहा है. यहां तक की रैलियां निकाली जा रही हैं. इसके साथ ही भारत विरोधी और हिंदू विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं. खास बात ये है कि ये सब नवरात्रि में हो रहा है, जब बांग्लादेश में भी हिंदू समुदाय नवरात्रि मना रहा है.

मंदिर के पास बनाने पर टोका

सोमवार शाम को, जगन्नाथ विश्वविद्यालय के इस्लामिक इतिहास और संस्कृति विभाग के 17वें बैच के छात्रों ने कैंपस के 'मुक्तमंच' के पास बीफ खिचड़ी पकाने का आयोजन किया. विश्वविद्यालय का मुख्य मंदिर पास ही स्थित है. कुछ हिंदू छात्रों ने खाना पकाने की इस जगह पर आपत्ति जताई. उनका कहना था कि मंदिर के इतने करीब बीफ पकाने से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. बीबीसी बांग्ला के अनुसार, रात करीब 8 बजे विश्वविद्यालय की 'केंद्रीय मंदिर प्रबंधन समिति' के सदस्य सचिव जॉय साहा, कुछ अन्य छात्रों के साथ आयोजकों के पास पहुंचे. उन्होंने बताया कि उन्होंने पूछा कि किस तरह का मांस पकाया जा रहा है, और बाद में पता चला कि वह गोमांस था. उन्होंने बीबीसी बांग्ला से कहा, "चूंकि यह मंदिर के ठीक सामने हो रहा था, इसलिए हमें बहुत बुरा लगा; हमारी धार्मिक भावनाएं आहत हुईं. हमने उनसे इसे कहीं और ले जाने के लिए कहा."

इसके बाद तीखी बहस हुई, जिसमें साहा ने आरोप लगाया कि कुछ आयोजकों ने उकसाने वाले अंदाज में जवाब दिया और मंदिर की सीमाओं पर सवाल उठाए. विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर ने बीच-बचाव किया, और खाना पकाने की व्यवस्था को कुछ दूर स्थानांतरित कर दिया गया. आयोजकों का कहना था कि उनका किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था. इस टकराव के बाद, हिंदू छात्रों ने कैंपस में एक जुलूस निकाला. बाद में यह मामला सोशल मीडिया पर फैल गया, जिससे छात्रों के बीच बहस छिड़ गई. 

विरोध के बाद दावत की तैयारी

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, शुरुआती असहमति को प्रॉक्टर के हस्तक्षेप से मौके पर ही सुलझा लिया गया था. अगले दिन दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत से मामला शांत हो गया. हालांकि, ऑनलाइन बहस जारी रही. कुछ छात्रों ने आपत्तियों को इस तरह पेश किया, मानो यह कैंपस में उनके बीफ खाने की आजादी को सीमित करने की कोशिश हो. वहीं, दूसरों का कहना था कि मुद्दा यह नहीं था कि छात्र क्या खा सकते हैं, बल्कि यह था कि मंदिर के आसपास के धार्मिक स्थान का सम्मान किया जाए. इस विवाद के बीच, कुछ छात्रों ने कैंपस में गायों को काटकर एक बड़ी 'बीफ दावत' आयोजित करने की योजना पर चर्चा शुरू कर दी. इसके चलते विश्वविद्यालय प्रशासन को फिर से हस्तक्षेप करना पड़ा.

बुधवार को, विश्वविद्यालय ने प्रॉक्टर प्रोफेसर डॉ. मो. आजम खान के हस्ताक्षर वाला एक नोटिस जारी किया. इसमें छात्रों, शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों से परिसर के भीतर जानवरों की बलि नहीं देने के लिए कहा गया. इस निर्देश के बाद छात्रों की ओर से नए सिरे से आपत्तियां सामने आईं. उन्होंने सवाल उठाया कि 'बीफ खिचड़ी' को लेकर हुए विवाद के बाद विश्वविद्यालय जानवरों की बलि पर रोक क्यों लगा रहा है. बुधवार को फिर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपना रुख बदल दिया. अपने पिछले नोटिस से हुई गलतफहमी पर खेद जताते हुए, प्रशासन ने कहा कि परिसर में किसी भी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार सभी को है, जिसमें जानवरों की बलि से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल हैं. 

आज बनाएंगे फिर से बीफ

इसके बाद छात्रों के एक समूह ने कैंपस में बड़े पैमाने पर बीफ दावत (गोमांस भोज) आयोजित करने की घोषणा की है. आयोजकों ने छात्रों से चंदा इकट्ठा करके एक गाय खरीदी है. खबर है कि 'बांग्लादेश छात्र मजलिस' ने भी एक और गाय देने का वादा किया है. सोशल मीडिया पर की गई घोषणाओं में बताया गया है कि इसमें शामिल होने वाले हर व्यक्ति को 70 टका (Tk70) का रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होगा. एक आयोजक ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि यह कार्यक्रम प्रशासन द्वारा पहले लगाई गई पाबंदी के विरोध में आयोजित किया जा रहा है. आयोजक ने संकेत दिया कि गायों को मंदिर के बाहर के बजाय, आर्ट्स बिल्डिंग के पास किसी खुले मैदान में काटा जाएगा.  जगन्नाथ यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव अब्दुल अलीम आरिफ ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि छात्र प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मुलाकात की है और एक सहमति बनी है, जिसके तहत आज की तारीख तय की गई है.

मुख्य मंदिर के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि वे कैंपस में बीफ खाने या गाय काटने पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग नहीं कर रहे हैं. उनकी मुख्य चिंता उस जगह को लेकर है, और इस बात को लेकर है कि इसका धार्मिक गतिविधियों पर क्या असर पड़ सकता है. जॉय साहा ने बीबीसी बांग्ला से कहा, "अगर वे कैंपस में गाय काटना चाहते हैं, तो काटें, इसमें कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन, ऐसा मंदिर के सामने नहीं होना चाहिए, और न ही इससे मंदिर परिसर की व्यवस्था और पवित्रता भंग होनी चाहिए."

जगन्नाथ विश्वविद्यालय किसने बनवाया 

जगन्नाथ विश्वविद्यालय, बांग्लादेश का एक सरकारी वित्तपोषित सार्वजनिक विश्वविद्यालय है, जो ढाका शहर के दक्षिणी हिस्से में बुरीगंगा नदी के पास स्थित है. इस प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान का लगभग 156 साल पुराना इतिहास है. इसकी शुरुआत 1858 में हुई थी, जब दीनानाथ सेन, प्रभातीचरण रॉय, अनाथबंधु मल्लिक और ब्रजसुंदर कैत्रा ने 'ढाका ब्रह्म स्कूल' की स्थापना की थी.

'जगन्नाथ स्कूल' नाम बलियादी के ज़मींदार किशोरीलाल चौधरी ने दिया था. उन्होंने 1872 में इस स्कूल का प्रबंधन अपने हाथों में लिया और अपने पिता के नाम पर इसका नाम 'जगन्नाथ' रखा. 2005 में इस कॉलेज को 'जगन्नाथ विश्वविद्यालय' में बदल दिया गया. वर्तमान में, इस विश्वविद्यालय में 7 संकायों और 2 संस्थानों के अंतर्गत कुल 38 विभाग हैं.

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