- ट्रंप के MAGA समर्थक मध्यावधि चुनावों में धांधली की आशंका पर असाधारण कदम उठाने की मांग कर रहे हैं
- MAGA समूह के प्रमुख कार्यकर्ता टीना पीटर्स को 2024 में चुनाव मशीनों से छेड़छाड़ के लिए दोषी ठहराया गया था
- MAGA कार्यकर्ताओं ने चुनाव सुरक्षा में बड़ी चूक की आशंका जताई और मार्शल लॉ लागू करने की सलाह दी है
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के लिए MAGA मतलब मेक अमेरिका ग्रेट अगेन का नारा दिया. चुनाव में जीत के बाद भी ये काम कर रहा है. रिपब्लिकन पार्टी तो ट्रंप के लिए काम करती ही है, मगर MAGA पूरी तरह से ट्रंप के लिए काम करता है. AXIOS की रिपोर्ट है कि MAGA कार्यकर्ता चाहते हैं कि अगर उन्हें लगे कि मध्यावधि चुनाव में धांधली हुई है, तो राष्ट्रपति ट्रंप असाधारण कदम उठाएं और इसमें मार्शल लॉ लागू करना भी शामिल है. मार्शल लॉ मतलब एक तरह से सैन्य शासन.
कैसे ये बात पता चली?
MAGA कार्यकर्ताओं के कुछ प्रस्ताव ट्रंप के कानूनी अधिकारों के दायरे से कहीं बाहर हैं और इस बात का भी कोई सबूत नहीं है कि चुनावों में धांधली होगी ही. लेकिन, चिंता की बात यह है कि इस समूह से जुड़े लोगों की राष्ट्रपति तक सीधी पहुंच है. MAGA की प्रमुख चुनाव कार्यकर्ता टीना पीटर्स ने इस महीने ट्रंप से मुलाकात की. चुनाव मशीनों से छेड़छाड़ से जुड़े अपराधों के लिए 2024 में दोषी ठहराई गईं पीटर्स को इस साल तब रिहा कर दिया गया, जब कोलोराडो के गवर्नर जेरेड पोलिस ने उनकी सजा कम कर दी. जून के आखिर में, पीटर्स और उनके वकील पीटर टिक्टिन ने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात भी की थी.
30 सितंबर को 'रंबल' पर MAGA चुनाव कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित एक वीडियो कॉल में, वक्ताओं ने नवंबर में होने वाले चुनावों में बड़े पैमाने पर सुरक्षा चूक होने की आशंका जताई और तुरंत इसके उपाय करने पर जोर दिया. ट्रंप के बचपन के दोस्त, टिक्टिन ने कॉल पर कहा कि अगर एक और धांधली वाला चुनाव होता है... तो मार्शल लॉ लागू करना पड़ सकता है. बाद में उन्होंने 'एक्सिओस' को बताया, "शायद उन्हें मतपत्रों और चुनाव उपकरणों को अपने कब्जे में लेना पड़े, ताकि कुछ और होने से पहले इस मामले की तह तक जाया जा सके."
ग्रेगरी स्टेनस्ट्रॉम (जिन्होंने 2020 में पेंसिल्वेनिया में कथित चुनावी गड़बड़ियों के बारे में गवाही दी थी) ने कहा कि सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए वह सबसे ज्यादा यही चाहते थे कि चुनाव को रोक दिया जाए. इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिया कि ट्रंप 'नेशनल इमरजेंसी एक्ट' (राष्ट्रीय आपातकाल अधिनियम) लागू करें, ताकि राज्यों को चुनाव कराने के तरीके बदलने के लिए मजबूर किया जा सके. टिप्पणी के लिए स्टेनस्ट्रॉम से संपर्क नहीं हो सका.
क्या ट्रंप के पास ये अधिकार है?
इस कॉल में पीटर्स भी शामिल थीं. वह अगस्त से ही ऑनलाइन अपनी एक योजना का प्रचार कर रही हैं, जिसमें हाथ से भरे जाने वाले कागजी मतपत्रों का इस्तेमाल करने और जहां संभव हो, वहां सभी वोटों की मैन्युअल रूप से दोबारा गिनती करने की बात कही गई है. टिकटिन ने कहा कि उनकी योजना पेपर बैलेट को सुरक्षित रखने और हाथों से दोबारा गिनती कराने की है. कोलोराडो पब्लिक रेडियो के साथ एक इंटरव्यू में, उन्होंने आगे बताया कि इससे मशीनों का जो भी असर है, वह खत्म हो जाएगा.
ब्रेनन सेंटर के चुनाव और सरकारी कार्यक्रम के वकील डेरेक टिसलर इन चर्चाओं पर कहते हैं, "आपातकालीन शक्तियां राष्ट्रपति के लिए कोई 'ब्लैंक चेक' नहीं हैं कि वे जो चाहें कर सकें. राष्ट्रपति को अभी भी संविधान और कांग्रेस द्वारा बनाए गए कानूनों के दायरे में रहकर ही काम करना होगा." उन्होंने बताया कि इन कानूनी सीमाओं में ये बातें शामिल हैं.
संघीय चुनावों की तारीख कांग्रेस (संसद) तय करती है. ट्रंप अपनी मर्जी से मध्यावधि चुनावों में देरी नहीं कर सकते. इसके साथ ही राज्य अपनी वोटिंग प्रणाली खुद चुनते हैं और तय करते हैं कि वोटों की गिनती कैसे होगी. हालांकि, यह संघीय कानूनों के अधीन होता है. ट्रंप पूरे देश में हाथों से दोबारा गिनती कराने का आदेश नहीं दे सकते, और न ही वे मशीनों को बदलने का निर्देश दे सकते हैं. इसके साथ ही आपातकालीन शक्तियां ट्रंप को राज्य के चुनाव कानूनों या संवैधानिक प्रतिबंधों को दरकिनार करने की अनुमति नहीं देती हैं. मार्शल लॉ भी ट्रंप को चुनाव सामग्री पर कब्जा करने या संघीय और राज्य चुनाव कानूनों को अनदेखा करने का अधिकार नहीं देता है.
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