- बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के मामले बढ़े हैं
- चटगांव में अल-कायदा से जुड़े हारुन इजहार ने हिंदुओं को खुलेआम मारने की धमकी दी है
- हारुन इजहार के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, इसने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर चिंता बढ़ी है
बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से निकलने के बाद अल्पसंख्यकों, मुख्य रूप से हिंदूओं पर अत्याचार की खबरें आती रही हैं. ऐसी कई रिपोर्टें सामने आईं है जिसमें यह पैटर्न सामने आया है कि वहां हिंदू विरोधी ताकतें मजबूत हो गई हैं. इस बीच एक बार फिर बांग्लादेश में हिंदुओं को खुलेआम धमकी देने का मामला सामने आया है और वह भी अल-कायदा से जुड़े नेता का. बांग्लादेश के चटगांव के एक रैली के दौरान अल-कायदा से जुड़े बताए जा रहे बांग्लादेशी नेता हारुन इजहार ने हिंदुओं को धमकी दी है. इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है.
‘दावा मूवमेंट' नाम के इस कार्यक्रम में हारुन इजहार ने कथित तौर पर कहा कि हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है. उसने यह भी कहा कि उसे खुद कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि उसके लोग ही इसके लिए काफी हैं. इजहार के इस कथित बयान को लेकर बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. बयान का वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर विवाद और चिंता बढ़ गई है.
At a rally, Bangladeshi al-Qaeda leader Harun Izhar said 🇧🇩🚨
— Voice Of BD Hindus 🇧🇩 (@HinduUnityBD) August 18, 2026
''We can kill Hindus in Bangladesh easily. I don't need to do anything myself; my people are enough to do it.
He is now threatening us simply because we tweeted about an Indian scholar attending his Dawah program. pic.twitter.com/Ciin0wfltm
बांग्लादेश में पांव पसार रहा अल-कायदा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हाल ही में चेतावनी दी है कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) बांग्लादेश को आधार बनाकर आतंकवादी सेल स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. यह निष्कर्ष संयुक्त राष्ट्र की विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी टीम की 38वीं रिपोर्ट में सामने आया है. यह रिपोर्ट इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और उससे जुड़े संगठनों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति को सौंपी गई है.
लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को उस जनविद्रोह के बाद देश छोड़कर निर्वासन में जाना पड़ा था, जिसमें कट्टर इस्लामवादी तत्वों की प्रमुख भूमिका बताई गई थी. इसके बाद से यह आशंका बढ़ गई है कि आतंकवादी संगठनों को वहां अपनी गतिविधियां फैलाने के लिए अनुकूल जमीन मिल सकती है.
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