महान सुनील गावस्कर को भारत ही नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाजों में एक शुमार किया जाता है. तकनीक के लिहाज से उन्हें सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. वह पहले ऐसे बल्लेबाज थे, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में दस हजार रन बनाने का कारनामा किया था. और दिग्गज बल्लेबाज ने अपने करियर में 34 शतक बनाए. लेकिन आपको हैरानी होगी कि गावस्कर खुद इनमें से किसी भी एक शतक अपनी सर्वश्रेष्ठ पारी नहीं मानते. गावस्कर अपने करियर की सबसे पसंदीदा और कठिन परिस्थिति में खेली गई सबसे संतोषजनक पारी 1971 में इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर (ओल्ड ट्रैफर्ड) में खेली गई 57 रनों की पारी को मानते हैं. चलिए जान लीजिए ऐसी क्या वजह रहीं, जिनके कारण सनी ने अपनी सर्वश्रेष्ठ पारी अपने 34 में से किसी एक भी शतक को नहीं चुना.
यूं तो गावस्कर इस पारी से पहले ही विंडीज दौरे में 21 साल की उम्र में सात सौ ज्यादा रन बनाकर धमाका कर चुके थे, लेकिन इसके बाद जब भारतीय टीम इंग्लैंड कई, तो यह गावस्कर का पहला दौरा था. मैनचेस्टर में यह उनके करियर का छठा टेस्ट था और इसमें उन्होंने पहली पारी में 129 गेंदों पर 5 चौकों से 57 रन बनाए. इसी पारी को सनी ने कई इंटरव्यू में अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी माना. चलिए वजहों पर गौर फरमा लीजिए.
1. पहली बार देखी पिच पर इतनी ज्यादा घास
सनी गावस्कर ने विंडीज में तूफानी आगाज जरूर किया था, लेकिन इन पिचों पर मैनचेस्टर जितनी घास नहीं थी. ऐसे में यह एक अलग तरह की चुनौती गावस्कर के लिए लेकर आई. ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच इतनी हरी थी कि उन्हें पिच और आउटफील्ड के अंतर को समझ पाना भी मुश्किल लग रहा था. गेंद पिच पर पड़ने के बाद बहुत तेजी से स्विंग और उछाल ले रही थी. ऐसे में सनी की दिमागी और तकनीक की जमकर परीक्षा हुई. और यह अनुभव हमेशा के लिए गावस्कर की यादों में बस गया.
2. घास के साथ ठंड का तड़का!
आप सोचिए एक तरफ पिच और मैदान की घास में अतंर करना मुश्किल हो और दूसरी तरफ कंपा देने वाली ठंड भी थी. उन दिनों में गावस्कर का अंधविश्वास यह भी था कि वह स्वेटर पनकर बैटिंग नहीं करते थे. ऐसे में बिना स्वेटर के सिर्फ एक पतली शर्ट में इतनी भीषण ठंड में क्रीज पर टिके रहना एक और टेस्ट था, जिसे गावस्कर ने पास किया.
3. ज्यॉफ थामसन और जॉन प्राइस जैसे पेसर
घसियाली पिच, कंपा देने वाली ठंड. और इस पर अगर एक छोर पर उस दौर के तूफानी पेसर ज्यॉफ थॉमसन और दूसरे पर जान प्राइस जैसे पेसर हों, तो बल्लेबाजी में मुश्किल वाला तत्व कहां पहुंच जाएगा, यह सहज समझा जा सकता है. इस मैच में इंग्लैंड के 6 फीट 4 इंच लंबे तेज गेंदबाज जॉन प्राइस भयंकर लय में थे और तेज बाउंसर व आउटस्विंगर फेंक रहे थे. बाद में गावस्कर ने माना कि उस समय प्राइस का वह स्पेल उनके करियर में खेले गए संभवत: सबसे खतरनाक स्पेल रहा.
गावस्कर के खुद के शब्द
F & Q: Frequently Asked Questions
प्र.-1. सुनील गावस्कर अपने करियर की सबसे संतोषजनक और पसंदीदा पारी किसे मानते हैं?
उत्तर-1. गावस्कर 1971 में इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर (ओल्ड ट्रैफर्ड) में खेली गई 57 रनों की पारी को अपने करियर की सबसे पसंदीदा और संतोषजनक पारी मानते हैं, न कि अपने 34 शतकों में से किसी एक को.
प्र.-2. मैनचेस्टर टेस्ट की पिच गावस्कर के लिए क्यों इतनी चुनौतीपूर्ण थी?
उत्तर-2. ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच पर इतनी ज्यादा हरी घास थी कि पिच और आउटफील्ड के बीच का अंतर पहचानना मुश्किल हो रहा था. गेंद बहुत तेजी से स्विंग और उछाल ले रही थी, जिसने उनकी तकनीक और मानसिक क्षमता की कड़ी परीक्षा ली.
प्र.-3. कड़ाके की ठंड में गावस्कर ने बिना स्वेटर पहने बल्लेबाजी क्यों की?
उत्तर-3. उन दिनों सुनील गावस्कर का एक अंधविश्वास था कि वह बल्लेबाजी करते समय स्वेटर नहीं पहनते थे. इसलिए, इंग्लैंड की कंपा देने वाली भीषण ठंड में भी उन्होंने सिर्फ एक पतली शर्ट पहनकर बल्लेबाजी की.
प्र.-4. गावस्कर के अनुसार अपने करियर का सबसे खतरनाक स्पेल उन्होंने किस गेंदबाज का सामना किया था?
उत्तर-4. मैनचेस्टर टेस्ट की पहली पारी में इंग्लैंड के 6 फीट 4 इंच लंबे तेज गेंदबाज जॉन प्राइस का स्पेल, जिसमें वे तेज बाउंसर और आउटस्विंगर फेंक रहे थे, गावस्कर के अनुसार उनके करियर का संभवतः सबसे खतरनाक स्पेल था.
प्र.-5. 57 रनों की इस छोटी पारी को गावस्कर अपने करियर का टर्निंग पॉइंट क्यों मानते हैं?
उत्तर-5. घसियाली पिच, जमाने वाली ठंड और खतरनाक तेज गेंदबाजी के बीच खेली गई इस संघर्षपूर्ण पारी से गावस्कर को अत्यधिक आत्मविश्वास मिला, जिससे उन्हें भविष्य में एक बेहतर और मजबूत बल्लेबाज बनने में बड़ी मदद मिली.
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