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This Article is From May 07, 2026

अमेरिका और ईरान दोनों चाहते हैं युद्ध हो खत्म हो, लेकिन इन दो बात पर अटक जाती है सुई

ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका की ओर से एक शांति प्रस्ताव मिला है, जिसकी फिलहाल समीक्षा की जा रही है. इस प्रस्ताव का मकसद तुरंत पूर्ण युद्धविराम लागू करना और अगले 30 दिनों के भीतर एक स्थायी समाधान की नींव रखना है.

अमेरिका और ईरान दोनों चाहते हैं युद्ध हो खत्म हो, लेकिन इन दो बात पर अटक जाती है सुई

अमेरिका और ईरान दोनों ही अब युद्ध की आग को शांत करना चाहते हैं, लेकिन कूटनीति के गलियारों में बात दो मुख्य मुद्दों पर आकर अटक गई है. एक तरफ व्हाइट हाउस समझौते की उम्मीद जता रहा है, वहीं तेहरान के भीतर से उठ रहे विरोधाभासी सुरों ने दुनिया को सस्पेंस में डाल दिया है. सवाल यह है कि क्या वाकई शांति का कोई ठोस रास्ता निकलने वाला है?

ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें अमेरिका की ओर से एक शांति प्रस्ताव मिला है, जिसकी फिलहाल समीक्षा की जा रही है. इस प्रस्ताव का मकसद तुरंत पूर्ण युद्धविराम लागू करना और अगले 30 दिनों के भीतर एक स्थायी समाधान की नींव रखना है. चर्चा है कि इस प्रस्ताव में 14 बिंदुओं का एक 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (MoU) शामिल है, जो दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म करने का जरिया बन सकता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा है कि ईरान अब समझौता करने का इच्छुक नजर आ रहा है और पिछले 24 घंटों में सकारात्मक बातचीत हुई है.

हॉर्मुज स्ट्रेट और न्यूक्लियर प्रोग्राम का पेच

दोनों देशों के बीच बातचीत की गाड़ी जिन दो पटरी पर आकर रुकी है, उनमें पहला है 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' का विवाद और दूसरा ईरान का परमाणु कार्यक्रम. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाए और वैश्विक व्यापार के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को पूरी तरह खोल दे. दूसरी ओर, ईरान इन शर्तों को अपनी संप्रभुता से जोड़कर देख रहा है और बिना किसी ठोस गारंटी के पीछे हटने को तैयार नहीं है.

जानकारों का मानना है कि अगर इन दो बिंदुओं पर सहमति बन जाती है, तो वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी. इस पूरी पर्दे के पीछे की डिप्लोमेसी का नेतृत्व अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर कर रहे हैं. खबर तो यह भी है कि पाकिस्तान और कुछ अन्य मध्यस्थों के जरिए बातचीत को अंतिम रूप दिया जा रहा है और जल्द ही इस्लामाबाद या जिनेवा में किसी बड़े समझौते का ऐलान हो सकता है.

शांति को लेकर ईरान क्या कह रहा है?

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स को 'दुष्प्रचार अभियान' करार दिया है. उन्होंने तंज कसते हुए इन खबरों को 'ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो' और 'ऑपरेशन फॉक्सिओस' जैसे शब्दों से संबोधित किया. गालिबफ का कहना है कि अमेरिका केवल भ्रम फैलाने के लिए इस तरह की सूचनाएं लीक कर रहा है.

ईरानी नेतृत्व के इस कड़े रुख ने शांति वार्ता की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है. जानकारों का कहना है कि ईरान यह संदेश देना चाहता है कि वह दबाव में आकर कोई समझौता नहीं करेगा. यह विरोधाभास साफ करता है कि ईरान के भीतर भी सत्ता के अलग-अलग केंद्रों के बीच इस शांति प्रस्ताव को लेकर मतभेद हो सकते हैं या फिर यह सौदेबाजी की एक पुरानी रणनीति का हिस्सा है.

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