पहाड़ों की रानी मसूरी में रहने वाला एक गरीब परिवार इन दिनों बीमारी और आर्थिक तंगी की दोहरी मार झेल रहा है. परिवार के मुखिया ओंकार की पत्नी पिछले दो वर्षों से पैरालिसिस के कारण बिस्तर पर है, जबकि हाल ही में जांच में ओंकार के दिल में दो छेद होने का पता चला है. डॉक्टरों ने जल्द इलाज की सलाह दी है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति उपचार कराने की अनुमति नहीं दे रही. इकलौता बेटा मजदूरी कर घर का खर्च चला रहा है. आधार कार्ड न बनने से सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लेने में भी परेशानी आ रही है, जिसके चलते परिवार ने मदद की अपील की है. मसूरी से NDTV के लिए सुनील सोनकर की रिपोर्ट.
मजदूरी कर घर चला रहा बेटा
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण ओंकार के सामने इलाज का खर्च जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है. परिवार में इकलौता बेटा मजदूरी कर माता-पिता का भरण-पोषण कर रहा है. सीमित आमदनी में घर का खर्च और दवाइयां जुटाना ही मुश्किल है, ऐसे में ओंकार के इलाज का खर्च परिवार के लिए भारी पड़ रहा है.

पैरालिसिस से पीड़ित ओंकार की पत्नी
आधार कार्ड न बनने से योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी
परिवार की परेशानी इस कारण भी बढ़ गई है कि ओंकार का आधार कार्ड अब तक नहीं बन पाया है. परिजनों के अनुसार कई बार आवेदन के बावजूद आधार नहीं बन सका, जिसके चलते यदि वह पात्र है तो आयुष्मान भारत योजना जैसी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने में भी दिक्कत आ रही है.
सरकार और समाजसेवियों से लगाई मदद की गुहार
ओंकार की पत्नी खुद बिस्तर से उठने में असमर्थ है, लेकिन पति के इलाज के लिए मदद की गुहार लगा रही है. उसकी आंखों में पति के स्वस्थ होने की उम्मीद है, लेकिन आर्थिक मजबूरी आड़े आ रही है.
ओंकार के परिवार ने सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं और सक्षम लोगों से मदद की अपील की है. परिवार का कहना है कि समय पर सहायता मिल जाए तो ओंकार का उपचार कराया जा सकता है. साथ ही प्रशासन से आधार कार्ड की समस्या का समाधान कराने की मांग की गई है.
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