Joshimath Observatory: जोशीमठ पिछले कई वर्षों से भू-धंसाव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है. यहां के इलाकों में मौजूद घरों में दरारें देखी गई हैं वहीं सड़कों का धंसते हुए देखा गया है. इसके अलावा कई स्थानों पर जमीन धंसने और संरचनाओं के कमजोर होने के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट भी करना पड़ा था. अब यहां वैज्ञानिक निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी की जा रही है. हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील जगहों में शामिल जोशीमठ में ट्रायल बेस पर एक ऑब्जर्वेटरी स्थापित की जाएगी, जिसके जरिए भू-धंसाव, भूकंपीय गतिविधियों और जमीन के भीतर पानी की हलचल से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे.

क्यों अहम है ये संवेदनशील जोन?
जोशीमठ में लेकर वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट भी दी थी. लगभग 9 संस्थानों में अपनी रिपोर्ट जारी की थी. जिसमें बताया गया था कि जोशीमठ क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से सबसे संवर्धनशील श्रेणी में आता है, क्योंकि इसके ठीक नीचे हेलंग एक ऐसा क्षेत्र है, जो MCT कहलाता है. MCT का मतलब मैन सेंट्रल ट्रस्ट होता है. जहां पर भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से लगातार टकरा रही है. इसी वजह से जोशीमठ भूकंप की दृष्टि से सबसे ज्यादा अति संवेदनशील श्रेणी में आता है. इसी कारण यहां पर भू धंसाव की तीव्रता ज्यादा बढ़ गई है.
जोशीमठ का पूरा क्षेत्र भूकंप के जोन 5 में आता है. वैज्ञानिक की रिपोर्ट के मुताबिक जोशीमठ शहर पूरा किसी ठोस चट्टान पर नहीं बल्कि किसी बड़े भूकंप या बड़े भूस्खलन के कारण इकट्ठे हुए मलबे और बालुआ पत्थर की ढाल पर बसा हुआ शहर है. ऐसे में जोशीमठ क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए अब वहां पर एक ऑब्जर्वेटरी लगाई जाएगी.

कहां लगेगी वेधशाला? क्या कुछ करेगी ऑब्जर्वेटरी?
इस ऑब्जर्वेटरी का उद्देश्य जोशीमठ क्षेत्र में भूकंप और भू धंसाव के साथ भूगर्भीय हलचल का डेट इक्कट्ठा करना के साथ कारण पता करना है.
उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में निरंतर भूगर्भीय हलचल होती रहती है, जिससे भूकंप और बड़े पैमाने पर भूस्खलन होते रहे हैं. इन्हीं प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और बचाव के लिए लगातार कई संस्थाएं काम कर रही हैं. इनमें जूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया, वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी, सी डैक पुणे का संस्थान और आईआईटी रुड़की, जैसे संस्थान शामिल हैं.
इसके अलावा तेजी से जमीन के अंदर पानी किस तरीके से हलचल पैदा कर रहा है उसका डाटा भी इसके जरिए इकट्ठा किया जाएगा और एक रिपोर्ट बनाई जाएगी ताकि भविष्य में जोशीमठ को बचाया जा सके.

जमीन की मांग हुई
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि जोशीमठ में एक ऑब्जर्वेटरी लगाए जाने पर सहमति हुई है. इस ऑब्जर्वेटरी के लिए जमीन की मांग की गई है. सचिव ने कहा कि जमीन का आवंटन हम कर देंगे. वहां पर उपकरण लगाए जाएंगे.
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