आप दिन के वक्त अपने घर से एक कदम बाहर रखिए और उपर देखें तो सूरज को पाएंगे. यहां से देखने पर तो सब नॉर्मल लगता है लेकिन क्या हो अगर कोई आपको बताए कि उसकी सतह पर आग के विशाल भंवर उठ रहे हैं, जो लाखों किलोमीटर दूर पृथ्वी की जिंदगी तक को प्रभावित कर सकते हैं? वैज्ञानिकों ने अब सूरज के अंदर छिपे एक ऐसे ही रहस्य से पर्दा उठाया है. दुनिया के सबसे पावरफुल सोलर टेलीस्कोप ने पहली बार सूरज की सतह पर होने वाली उस हलचल को कैद किया है, जिसने दशकों से वैज्ञानिकों को उलझा रखा था.
सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के हवाई के माउई द्वीप पर स्थित नेशनल साइंस फाउंडेशन के डेनियल के. इनोए सोलर टेलीस्कोप ने सूरज की अब तक की सबसे साफ तस्वीरें और टाइम-लैप्स वीडियो रिकॉर्ड किए हैं. वैज्ञानिकों ने इस टेलीस्कोप से सूरज के एक सनस्पॉट, यानी बहुत ही ज्यादा एक्टिव इलाके के पास झांककर देखा कि वहां बेहद छोटे लेकिन शक्तिशाली भंवर बन रहे हैं. ये भंवर सूरज की दिखाई देने वाली सतह पर पैदा हो रहे थे. सूरज की दिखाई देने वाली सतह को फोटोस्फीयर कहा जाता है.

सूर्य की सतह की अब तक ली गई हाइएस्ट-रिजॉल्यूशन वाली तस्वीर (NSF NSO)
वैज्ञानिकों ने क्या पाया?
टेलीस्कोप से क्लिक की गईं इन तस्वीरों और कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि ये भंवर एक खास प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसे केल्विन-हेल्महोल्ट्ज इनस्टैबिलिटी (KHI) कहा जाता है. यह वही प्रक्रिया है, जो सूरज के कई बड़े रहस्यों का जवाब हो सकती है. दरअसल वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि सूरज की बाहरी परत, यानी कोरोना, उसकी सतह से कहीं ज्यादा गर्म क्यों है. अब माना जा रहा है कि ये घूमते हुए भंवर ही उस अतिरिक्त ऊर्जा को पैदा करते हैं, जो कोरोना को बेहद गर्म बना देती है.
यह रिसर्च वर्ल्ड फेमस जर्नल नेचर में छपी है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से सूरज के व्यवहार को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी. आज भी सूरज की गतिविधियों का सटीक अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है. लेकिन हो सकता है कि आग के इन रहस्यमयी भंवरों ने उस पहेली का एक अहम टुकड़ा हमारे सामने रख दिया हो. तो है न यह बड़ी खोज.
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