- बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों को हड़ताल तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए हैं
- कोर्ट ने कहा कि किसी भी म्युनिसिपल अस्पताल में एक भी मरीज की मौत नहीं होनी चाहिए
- डॉक्टर होने के नाते आप मरीजों का इलाज करने से मना नहीं कर सकते, भले ही वह OPD सेवा ही क्यों न हो
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई के दौरान तत्काल हड़ताल वापस लेने के निर्देश दिए. कोर्ट ने डॉक्टरों से कहा कि हम आपका पक्ष सुनेंगे, लेकिन आप पहले अपनी हड़ताल वापस लें. अदालत ने यह भी कहा कि हम मरीजों की स्थिति को लेकर चिंतित हैं.बता दें कि ये डॉक्टर्स पिछले तीन दिनों से हड़ताल कर रहे हैं.
'अस्पताल में एक भी मरीज की मौत नहीं होनी चाहिए'
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले पर बहस के दौरान कहा कि किसी भी म्युनिसिपल अस्पताल में एक भी मरीज की मौत नहीं होनी चाहिए, डॉक्टरों की हड़ताल तुरंत खत्म की जानी चाहिए. इस मामले की सुनवाई पहले से ही एक डिवीन बेंच कर रही है, हम इस मामले में तेजी लाएंगे और जरूरत पड़ने पर रोजाना सुनवाई की भी इजाजत दी जाएगी.
मरीजों का इलाज करने से मना नहीं कर सकते
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट से बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि आपकी कई परेशानियां और मांगें हो सकती हैं. लेकिन एक डॉक्टर होने के नाते आप मरीजों का इलाज करने से मना नहीं कर सकते. भले ही वह OPD सेवा ही क्यों न हो. इससे आप इनकार नहीं कर सकते.कोर्ट ने ये बात उस समय कही जब प्रेसिडेंट यह बता रहे थे कि इमरजेंसी सेवाएं चल रही हैं और OPD में भी फैकल्टी सदस्य मौजूद हैं.
डॉक्टरों के वकील ने उठाए होम्योपैथ डॉक्टर्स पर सवाल
डॉक्टरों की ओर से पेश वकील ने कहा कि होम्योपैथ डॉक्टरों के ब्रिज कोर्स के बाद उनके रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी जाए, तो हम तुरंत हड़ताल खत्म कर देंगे. वकील ने तर्क दिया कि 6 महीने का कोर्स करने वाला होम्योपैथ, MBBS डॉक्टर के बराबर कैसे हो सकता है, जिसने अपनी डिग्री पाने और प्रैक्टिस करने के लिए सालों तक कड़ी मेहनत की है? ये होम्योपैथ जटिल सर्जरी कैसे कर पाएंगे.
सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे डॉक्टर्स
महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टर पिछले दो दिन से हड़ताल पर हैं. ये लोग महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिसमें होम्योपैथी डिग्री के साथ 1 साल का सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले डॉक्टरों को एलोपैथी दवाएं लिखने की इजाजत मिली है. MBBS डॉक्टर सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि ये बहुत ही खतरनाक बात है. IMA भी इस विरोध में शामिल हो गया है.
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