- उन्होंने ब्राह्मणों के अपमान और सवर्ण वर्ग के खिलाफ यूजीसी की गाइडलाइन को असंवैधानिक और विषम बताया है
- इस्तीफे में उन्होंने प्रशासन द्वारा शिष्यों के साथ की गई बेरहमी को मानवता के अपमान के रूप में स्वीकार किया
- अलंकार अग्निहोत्री ने सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधित्व करने के लिए वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था बनाने की बात भी कही है
यूपी में एक तरफ़ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा तो वहीं दूसरी तरफ अब UGC की नई गाइडलाइन को लेकर सवर्णों ने विरोध शुरू कर दिया है. इन विवादों के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा देना चर्चा का विषय बन गया है. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इन दोनों मामलों से नाराज़गी जताते हुए अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को भेज दिया है. यूपी पीसीएस 2019 बैच के अधिकारी और बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri SDM) ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है. उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को ब्राह्मणों के अपमान से जोड़ते हुए अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है. इसके अलावा यूजीसी की गाइडलाइन को अपने इस्तीफे का कारण बताया है. अलंकार अग्निहोत्री ने कहा है कि उनका इस्तीफ़ा पद और प्रतिष्ठा से ऊपर स्वधर्म और स्वाभिमान है.
हर नागरिक को जानना चाहिए- मैंने क्यों दिया इस्तीफा
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे को लेकर कहा है कि वी अपने पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह निर्णय व्यक्तिगत लाभ या हानि का नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनकी जवाबदेही और अंतरात्मा की आवाज है. उन्होंने कहा कि इस्तीफे के कारण हर नागरिक को जानने चाहिए. इसका कारण है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की छोटी पकड़कर पिटाई ब्राह्मणों का अपमान है.अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि पूज्य संतों का अपमान और ब्राह्मणों का उत्पीड़न किया हा रहा है. प्रयागराज माघ मेले में जो हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है. ज्योतिष्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज के बटुक शिष्यों की चोटी पकड़कर प्रशासन द्वारा बेरहमी से पिटाई की गई. जिस समाज में संतों की शिखा को छुआ नहीं जाता, वहां उन्हें घसीटा गया. उन्होंने सवाल किया कि क्या यह प्रशासन अब ब्राह्मणों के नरसंहार की मूक सहमति दे रहा है?
क्या राजनीति में एंट्री मारेंगे अलंकार अग्निहोत्री?
यूजीसी की नई गाइडलाइन को रॉलेट एक्ट 1919 की संज्ञा देते हुए सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कहा है कि यूजीसी की नई गाइडलाइन सामान्य वर्ग के छात्रों का शोषण करने वाली है. उन्होंने लिखा है कि इस गजेटियर में पैरा 2, 5, 6 और 7 सवर्णों के ख़िलाफ़ है. इनसे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ और भूमिहार जैसी जातियों के बच्चों के प्रति विषमताओं और षड्यंत्र करने का मौक़ा मिलेगा.बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे के एक पैरा को पढ़कर ये अंदेशा मिलता है कि इस्तीफे के बाद वो राजनीति में कदम रखने वाले हैं. उन्होंने एक पैरा में लिखा है कि अब समय आ गया है कि ब्राह्मण और अन्य सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधित्व करने के लिए वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण करने का. उन्होंने लिखा है कि सामान्य वर्ग की बात करने वाला कोई नहीं बचा है.
सरकार को बताया ब्राह्मण विरोधी
फ़िलहाल सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफ़े को लेकर विपक्षी दलों को बीजेपी पर निशाना साधने का एक बड़ा मौक़ा मिल गया है. यूपी में ब्राह्मण राजनीति को लेकर बीते दो महीनों से बवाल मचा हुआ है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दे को ब्राह्मण विरोधी बताने की कोशिश के बीच अब यूजीसी को सवर्णों के ख़िलाफ़ बताकर माहौल बनाया जा रहा है. इस बीच सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मौक़ा दे दिया है. देखना होगा बीजेपी अब आगे किस रणनीति पर आगे बढ़ती है.
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