- गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना ने अपनी ताकत और शौर्य का भव्य प्रदर्शन किया
- इस बार की परेड में पहली बार टी-90 और अर्जुन टैंक एक साथ कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित किए गए
- ब्रह्मोस मिसाइल और लंबी दूरी की एंटी शिप हाइपरसॉनिक मिसाइल को पहली बार परेड में शामिल किया गया
गणतंत्र दिवस पर एक बार फिर कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना ने अपने शौर्य का प्रदर्शन किया. इस खास मौके पर तमाम राज्यों की झांकियां भी दिखी और सेना ने अपनी ताकत से भी दुनिया को वाकिफ कराया. NDTV ने भी इस समारोह को बेहद करीब से कवर किया. आज हमारे रिपोर्टर आपको बताने जा रहे हैं आखिर उनके लिए इस समारोह को इतने करीब से कवर करना इतना खास कैसे रहा और इस बार का ये समारोह पहले के मुकाबले इतना खास क्यों था...
एक बार फिर से कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में कवर करने का मौका मिला. जब नोएडा से मेट्रो लेकर मंडी हाउस जा रहा था, तो कई परिवार मिले. दिल्ली की गलन वाली ठंड में भी वो उत्साह के साथ जा गणतंत्र दिवस की परेड देखने जा रहे थे. भारत में जैसे कल्चर का ट्रांसफर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को होता है, ये कुछ वैसा ही था. लग रहा था जैसे पुरानी पीढ़ी अपने बच्चों को परेड दिखाने ले जा कर ये कह रही हो, 'ये है वो देश जिसके लिए हमारे पुरखों ने अपने प्राण न्योछावर किए थे.

बच्चों ने अपने गालों के ऊपर तिरंगा बनाया था. देख कर लगा कि असली उत्सव तो इन छोटे-छोटे बच्चों का ही है. सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी थी. और होनी भी चाहिए क्योंकि कब क्या हो जाए कौन कह सकता है? दुश्मन तो हमेशा ताक में है कि कब भारत को खंजर घोंपा जाए.हालांकि यह भी लगा कि गणतंत्र के उत्सव में 'गण' कहीं खो सा गया है. लगा जैसे वो पूरी तरह से 'तंत्र' के दवाब में दब गया है. इस बार की परेड के लिए बनी दर्शक दीर्घा में बैठने के इनक्लोजर का नाम बदल दिया गया है.

वी 1 की जगह उसका नाम नर्मदा कर दिया गया. इसके पीछे तर्क दिया गया कि वीआईपी कल्चर को खत्म करना है पर नाम के अलावा कुछ और नही बदला है. यही बात परेड को लेकर भी कही गई कि परेड में इस बार बैटल अर्रे फार्मेशन दिखेगा. यानी जिस तरह लड़ाई के मैदान में सेना मूव करती है कुछ वैसा ही नजारा इस बार कर्तव्य पथ पर दिखेगा. लेकिन परेड की जगह सीमित जगह होने की वजह से बहुत कुछ नही दिखा.
इस बार परेड के सीक्वेंस में अंतर जरूर नज़र आया. हर बार सबसे पहले सेना के टैंक कर्तव्य पथ पर दिखते थे अब वो बाद में दिखे. इस बार दिलचस्प बात ये रही कि परेड में पहली बार टी-90 और अर्जुन टैंक एक साथ दिखे. इसके बाद परेड में एंट्री ली ब्रह्मोस मिसाइल ने. जैसे ही वो कर्तव्य पथ पर आई, लोगों ने तालियां बजाकर उसका स्वागत किया. करे भी क्यों न, यही तो वो मिसाइल है जिसने पाकिस्तान ने नानी याद करा दी. परेड लाइव देखने के दौरान भी मैंने अपने मोबाइल पर लाइव परेड लगा रखी थी. कमेंट सेक्शन में नजर गई तो पाकिस्तान के DG-ISPR के बॉट्स एक्टिव थे. लगातार वो भारत विरोधी बातें कर रहे थे. लेकिन ब्रह्मोस के आते ही जैसे उनका बटन 'पौज़' हो गया.

खास आकर्षण में चीन और पाकिस्तान से निपटने के लिये बनी भैरव बटालियन आक्रमक अंदाज में दिखी. लंबी दूरी की एंटी शिप हाइपरसॉनिक मिसाइल भी पहली बार परेड में शामिल हुई जो काफी चर्चा का विषय रही. इसकी स्पीड 5 मैक से 8 मैक के आसपास है. साफ है इसके आगे सारे एयर डिफेंस सिस्टम फेल हो जाएंगे. परेड में ड्रोन की कई किस्में नज़र आईं. साफ लगा कि ऑपेरशन सिंदूर से सबक लेकर सेना अपने आपको बदल रही है. निगरानी से लेकर कामेकाजी ड्रोन तक, सब कुछ इस बार कर्तव्य पथ पर दिखा. क्योंकि बीते कुछ दिनों से ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि जम्मू से लगी सीमा पर पाकिस्तान कुछ ड्रोन एक्टिविटी कर रहा है.

और इस बार लोगों और समारोह के चीफ गेस्ट का ध्यान किसी ने खींचा, तो वो थे भारत के हिम वीर. ऐसे योद्धा जो माइनस 40 डिग्री तक के तापमान में भारत की रक्षा करते हैं. लोगों ने पहली बार दिल्ली में सेना के बैक्ट्रियन कैमल और जांस्कर पोनी को देखा. यह लद्दाख में सेना को 14 से 16 हज़ार फीट की ऊंचाई पर मदद करते हैं. इन्हें सैनिक कहना गलत नही होगा क्योंकि ये साइलेंट योद्धा हमारे सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिला कर दुर्गम क्षेत्रों में उनकी मदद करते हैं. ये मुश्किल हालात में सरहद की रखवाली करते हैं.

इसके अलावा वही वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने तो ऑपेरशन सिंदूर को जैसे जमीन पर उतार दिया. रफाल, सुखोई और मिग 29 ने सिंदूर और विजय फॉर्मेशन के जरिये दिखाया कि कैसे उसने पाक को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था. समारोह की चीफ गेस्ट यूरोपियन यूनियन की प्रेसिडेंट और यूरोपियन कौंसिल के चेयरमैन थे. दिलचस्प बात ये रही कि यूरोप के भी सैन्य दस्ते ने परेड में हिस्सा लिया. ये भारत और यूरोप के रिश्तों की गहराई को दर्शाता है. कुल मिला कर भारत ने दुनिया को ये दिखाया कि ताकतवर होने का मतलब जिम्मेदार होना भी होता है. क्योंकि कहते हैं न, 'बड़ी ताकत के साथ बड़ी जिम्मेदारियां भी आती हैं.' उम्मीद है कि भारत यूं ही तरक्की करता रहे. लेकिन बेहतरी की गुंजाइश हमेशा, हर जगह होती है, यहां भी है.
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